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किसान की हत्या में सात लोग दोषमुक्त
Updated Fri, 12 Jan 2018 12:33 AM IST
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किसान की हत्या में सात लोग दोषमुक्त
बागपत। बूढ़पुर गांव के किसान सुभाष की साढ़े चार साल पूर्व खेत में गोली मारकर हत्या हुई थी। इस मामले की कोर्ट ने सुनाई करते हुए साक्ष्य के अभाव में सातों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है।
बूढ़पुर गांव के किसान सुभाष की खेत में सात जुलाई 2013 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उसके भाई पुष्पेंद्र ने पुलिस को बताया था कि सुभाष खेत में दोपहर करीब दो बजे फसल की सिंचाई करने के लिए गया था। देर रात तक भी सुभाष घर नहीं लौटा। वह साढ़े नौ बजे खेत में उसको देखने के लिए गया तो उसका भाई खेत में जामुन के पेड़ के नीचे मृत हालत में पड़ा मिला। उसकी तहरीर पर रमाला थाने में अज्ञात में हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ था। पुलिस की विवेचना में सामने आया था कि किसान सुभाष की हत्या, धर्मेंद्र, अमित, अमित उर्फ मोटा, सुमित पंडित, प्रवेंद्र, अंकित निवासी बूढ़पुर और सचिन उर्फ विजय निवासी गांव भैसवाल (शामली) ने की है। उनके खिलाफ पुलिस ने कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया था। बचाव पक्ष के अधिवक्ता रामकुमार तोमर ने बताया कि केस एडीजे स्पेशल (एससी/एसटी एक्ट) रमेश चंद की कोर्ट में चल रहा था। इसमें 11 लोगों की गवाही हुई। कोर्ट ने केस की सुनवाई करते हुए साक्ष्य के अभाव में आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है।
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बागपत। बूढ़पुर गांव के किसान सुभाष की साढ़े चार साल पूर्व खेत में गोली मारकर हत्या हुई थी। इस मामले की कोर्ट ने सुनाई करते हुए साक्ष्य के अभाव में सातों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है।
बूढ़पुर गांव के किसान सुभाष की खेत में सात जुलाई 2013 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उसके भाई पुष्पेंद्र ने पुलिस को बताया था कि सुभाष खेत में दोपहर करीब दो बजे फसल की सिंचाई करने के लिए गया था। देर रात तक भी सुभाष घर नहीं लौटा। वह साढ़े नौ बजे खेत में उसको देखने के लिए गया तो उसका भाई खेत में जामुन के पेड़ के नीचे मृत हालत में पड़ा मिला। उसकी तहरीर पर रमाला थाने में अज्ञात में हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ था। पुलिस की विवेचना में सामने आया था कि किसान सुभाष की हत्या, धर्मेंद्र, अमित, अमित उर्फ मोटा, सुमित पंडित, प्रवेंद्र, अंकित निवासी बूढ़पुर और सचिन उर्फ विजय निवासी गांव भैसवाल (शामली) ने की है। उनके खिलाफ पुलिस ने कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया था। बचाव पक्ष के अधिवक्ता रामकुमार तोमर ने बताया कि केस एडीजे स्पेशल (एससी/एसटी एक्ट) रमेश चंद की कोर्ट में चल रहा था। इसमें 11 लोगों की गवाही हुई। कोर्ट ने केस की सुनवाई करते हुए साक्ष्य के अभाव में आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है।
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