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सरसों में माहू और गेहूं में पीली-काली गेरूई रोग
Updated Tue, 09 Jan 2018 12:45 AM IST
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बागपत। बदलते मौसम में सरसों और गेहूं की फसल में माहू और पीली, सफेद, काली गेरूई रोग का प्रकोप बढ़ जाता है। इससे कृषकों को काफी नुकसान की आशंका है।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी डॉ. संतराम ने बताया कि मौसम में बदलाव हो रहा है। तापमान में असामान्य उतार चढ़ाव होने के कारण रबी फसलों में कीट और रोग का प्रकोप की संभावना बढ़ गई है। सरसों की फसल में सफेद गेरूई रोग का प्रकोप बढ़ने की संभावना है। इससे पत्ती की निचली सतह पर सफेद फफोले जैसे बनते हैं। माहू कीट से भी सरसों की फसल को नुकसान पहुंचता है। पौधे का रस चूसकर सुखा देता है। इसकी रोकथाम के लिए कृषि विशेषज्ञों से सलाह कर दवा का छिड़काव जरूरी है। गेहूं की फसल में पीली और काली गेरूई से नुकसान होता है। पौधे पर फफूंदी से लग जाती है। यह रोग सूखे मौसम और तेज हवा के चलने से अधिक फैलता है। इससे पत्तों पर पीले रंग का चूर्ण फैलता है। किसान सावधानी बरतें ओर समय-समय पर कृषि विशेषज्ञों से सलाह करते रहे।
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जिला कृषि रक्षा अधिकारी डॉ. संतराम ने बताया कि मौसम में बदलाव हो रहा है। तापमान में असामान्य उतार चढ़ाव होने के कारण रबी फसलों में कीट और रोग का प्रकोप की संभावना बढ़ गई है। सरसों की फसल में सफेद गेरूई रोग का प्रकोप बढ़ने की संभावना है। इससे पत्ती की निचली सतह पर सफेद फफोले जैसे बनते हैं। माहू कीट से भी सरसों की फसल को नुकसान पहुंचता है। पौधे का रस चूसकर सुखा देता है। इसकी रोकथाम के लिए कृषि विशेषज्ञों से सलाह कर दवा का छिड़काव जरूरी है। गेहूं की फसल में पीली और काली गेरूई से नुकसान होता है। पौधे पर फफूंदी से लग जाती है। यह रोग सूखे मौसम और तेज हवा के चलने से अधिक फैलता है। इससे पत्तों पर पीले रंग का चूर्ण फैलता है। किसान सावधानी बरतें ओर समय-समय पर कृषि विशेषज्ञों से सलाह करते रहे।