{"_id":"59cc03914f1c1b72548b4be3","slug":"71506542481-baghpat-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"विधान में 501 इंद्र-इंद्राणियों ने की पूजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विधान में 501 इंद्र-इंद्राणियों ने की पूजा
Updated Thu, 28 Sep 2017 01:43 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बड़ौत (बागपत)।
विहर्ष सभागार में आचार्य सुंदर सागर महाराज के सहसंघ सानिध्य में अजित नाथ दिगंबर जैन समिति के तत्वावधान में चल रहे कल्पद्रुम महामंडल विधान में 501 इंद्र-इंद्राणियों ने विधान की पूजा की और 144 अर्घ्य समर्पित किए ।
ब्रह्मचारिणी डॉ. रीना के निर्देशन में शांति धारा का सौभाग्य चक्रवती गौरव जैन, सौ धर्म इंद्र अशोक जैन, कुबेर इंद्र वीरेंद्र जैन और यज्ञ नायक देवेंद्र जैन को प्राप्त हुआ। विधान में श्रद्धालुओं ने जिनेंद्र भगवान की प्रतिमा का अभिषेक किया और विधान की पूजा में आर्य पूजन में 20 अर्घ्य तथा पंच कल्याणक पूजा में 120 अर्घ्य भव्य समोशरण के मांडले पर समर्पित किए। संगीतकार विजय की भजनों की प्रस्तुति पर इंद्राणियों ने भाव विभोर होकर नृत्य किए।
विधान के मध्य बोलते हुए आचार्य सुंदर सागर महाराज ने कहा भगवान के समोशरण में अतिश्य तीर्थंकर भगवान के केवल ज्ञान का है। प्रत्येक व्यक्ति अपने पुण्य के प्रभाव से ही सब कुछ प्राप्त करता है। भगवान की भक्ति जन्म-जन्म के दुखों को दूर कर देती है। शाम को गुरू भक्ति, भजन संध्या और आरती के कार्यक्रम हुए। इसमें प्रमोद जैन, मदन लाल जैन, वरदान जैन, मुकेश जैन, शशि जैन, संदीप जैन, बाल किशन जैन, अतुल जैन, आदीश, अभय, अशोक जैन, राकेश, शरद जैन, विवेक जैन आदि रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
विहर्ष सभागार में आचार्य सुंदर सागर महाराज के सहसंघ सानिध्य में अजित नाथ दिगंबर जैन समिति के तत्वावधान में चल रहे कल्पद्रुम महामंडल विधान में 501 इंद्र-इंद्राणियों ने विधान की पूजा की और 144 अर्घ्य समर्पित किए ।
ब्रह्मचारिणी डॉ. रीना के निर्देशन में शांति धारा का सौभाग्य चक्रवती गौरव जैन, सौ धर्म इंद्र अशोक जैन, कुबेर इंद्र वीरेंद्र जैन और यज्ञ नायक देवेंद्र जैन को प्राप्त हुआ। विधान में श्रद्धालुओं ने जिनेंद्र भगवान की प्रतिमा का अभिषेक किया और विधान की पूजा में आर्य पूजन में 20 अर्घ्य तथा पंच कल्याणक पूजा में 120 अर्घ्य भव्य समोशरण के मांडले पर समर्पित किए। संगीतकार विजय की भजनों की प्रस्तुति पर इंद्राणियों ने भाव विभोर होकर नृत्य किए।
विज्ञापन
विधान के मध्य बोलते हुए आचार्य सुंदर सागर महाराज ने कहा भगवान के समोशरण में अतिश्य तीर्थंकर भगवान के केवल ज्ञान का है। प्रत्येक व्यक्ति अपने पुण्य के प्रभाव से ही सब कुछ प्राप्त करता है। भगवान की भक्ति जन्म-जन्म के दुखों को दूर कर देती है। शाम को गुरू भक्ति, भजन संध्या और आरती के कार्यक्रम हुए। इसमें प्रमोद जैन, मदन लाल जैन, वरदान जैन, मुकेश जैन, शशि जैन, संदीप जैन, बाल किशन जैन, अतुल जैन, आदीश, अभय, अशोक जैन, राकेश, शरद जैन, विवेक जैन आदि रहे।
विज्ञापन