{"_id":"59ab0a884f1c1b4e738b4f1a","slug":"71504381576-baghpat-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"चार गांवों को बीमार बना रहा गड्ढ़े वाला हाईवे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चार गांवों को बीमार बना रहा गड्ढ़े वाला हाईवे
Updated Sun, 03 Sep 2017 01:16 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बागपत।
दिल्ली-सहारनपुर हाईवे से चार जिलों के सैकड़ों गांवों के लोग प्रभावित हैं। लेकिन, बागपत के चार गांव ऐसे हैं, जिन्हें हाईवे सबसे ज्यादा बीमारियां परोस रहा है। धूप खिले तो धूल उड़कर घरों तक पहुंचती है और बरसात में जलभराव से जल जनित बीमारियां ग्रामीणों को अपनी चपेट में ले रही है।
इस हाईवे किनारे स्थित गौरीपुर जवाहरनगर, निवाड़ा, सिसाना और सरूरपुर कलां के लोग बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। सांस की बीमारियों के मरीज बढ़े हैं। अस्थमा का खतरा है। आंखों की बीमारियां लोगों को जकड़ रही है। त्वचा और पेट की बीमारियों से भी लोग परेशान हैं। ग्रामीण बताते हैं कि सांस की बीमारियों ने सबसे अधिक लोगों को अपनी चपेट में लिया है। गौरीपुर के टी-प्वाइंट पर गड्ढे, गंदगी और धूल के गुबार के कारण लोगों का व्यापार भी चौपट होने लगा है। फल और मिठाई की दुकानों पर ग्राहक नहीं टिकते।
ये है बागपत का गौरीपुर मोड़
बागपत। दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर सोनीपत की तरफ घूमते ही टी-प्वाइंट बनता है। यही गौरीपुर मोड़ है। हरियाणा, यूपी और दिल्ली के वाहनों का यहां सबसे ज्यादा आवागमन रहता है। यहां पर कई-कई फीट गहरे गड्ढे हैं, जिनसे वाहनों का निकलना मुश्किल हैं। आए दिन यहां हादसे होते हैं, जिनमें लोगों की जान भी जा चुकी है। गढ़-सोनीपत हाईवे इसी मोड़ से जुड़ता हुआ आगे बढ़ता है।
विज्ञापन
क्या कहते हैं लोग?
खेकड़ा के पूर्व सैनिक ब्रह्म सिंह धामा कहते हैं कि सिस्टम अंधा हो गया है। लोगों की समस्याओं के समाधान का कार्य प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का है, लेकिन कोई नहीं सुन रहा। हाईवे का निर्माण होना चाहिए।
बड़ौत निवासी अक्षय कुमार का कहना है कि लोगों की जान जा रही है, लेकिन नेताओं को जरा भी चिंता नहीं है। हाईवे का निर्माण क्यों नहीं हो सकता। क्या सरकार को इसके गड्ढे नहीं दिखते। चार जिलों के लोगों की समस्या है।
बड़ौत के कमल वर्मा कहते हैं कि आजादी के बाद प्रदेश और देश में लगातार बागपत की दमदार उपस्थिति के बावजूद विकास नहीं हुआ। हाईवे पर वोट मांगने वाले जनता को बताए कि क्यों निर्माण नहीं हो रहा है।
सरूरपुर कलां के संजीव नैन कहते हैं कि नेता सिर्फ वायदे करते हैं। लोगों को धरना प्रदर्शन करना होगा, तभी सरकार की कुंभकर्णी नींद इस मामले में टूटेगी।
गैड़बरा गांव के अंशु जयंत का कहना है कि हाईवे में गड्ढों से लोगों की जिंदगी जा रही है, लेकिन सरकार को चिंता नहीं है। लोगों को एकजुट होकर आंदोलन करना होगा। जनप्रतिनिधियों से इस पर जवाब मांगना होगा।
अस्थमा का खतरा, डस्ट एलर्जी
जिला अस्पताल में कार्यरत मेडिकल अफसर डॉ. भूपेंद्र सिंह बताते हैं कि धूल लगातार उड़ने और उसके संपर्क में आने से डस्ट एलर्जी हो जाती है। इसके अलावा धूल में अधिक समय तक रहने के कारण अस्थमा का खतरा रहता है। धूल से नेत्र, त्वचा और सांस संबंधी बीमारियां फैलती है।
गड्ढों पर आंदोलन की तैयारी
बागपत। दिल्ली-सहारनपुर हाईवे की खस्ता हालत और गड्ढों के विरोध में आंदोलन की तैयारी है। लोगों का कहना है कि सिस्टम को जगाना होगा। पूर्व सैनिक सुभाष कश्यप ने चार सितंबर को गौरीपुर मोड़ पर धरना देने का एलान किया है। पूर्व सैनिक ब्रह्म सिंह धामा ने कहा कि वह अपने संगठन के साथ कलक्ट्रेट में डीएम का घेराव करेंगे। लोगों को अधिक से अधिक जागरूक करेंगे।
विज्ञापन
दिल्ली-सहारनपुर हाईवे से चार जिलों के सैकड़ों गांवों के लोग प्रभावित हैं। लेकिन, बागपत के चार गांव ऐसे हैं, जिन्हें हाईवे सबसे ज्यादा बीमारियां परोस रहा है। धूप खिले तो धूल उड़कर घरों तक पहुंचती है और बरसात में जलभराव से जल जनित बीमारियां ग्रामीणों को अपनी चपेट में ले रही है।
इस हाईवे किनारे स्थित गौरीपुर जवाहरनगर, निवाड़ा, सिसाना और सरूरपुर कलां के लोग बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। सांस की बीमारियों के मरीज बढ़े हैं। अस्थमा का खतरा है। आंखों की बीमारियां लोगों को जकड़ रही है। त्वचा और पेट की बीमारियों से भी लोग परेशान हैं। ग्रामीण बताते हैं कि सांस की बीमारियों ने सबसे अधिक लोगों को अपनी चपेट में लिया है। गौरीपुर के टी-प्वाइंट पर गड्ढे, गंदगी और धूल के गुबार के कारण लोगों का व्यापार भी चौपट होने लगा है। फल और मिठाई की दुकानों पर ग्राहक नहीं टिकते।
विज्ञापन
ये है बागपत का गौरीपुर मोड़
बागपत। दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर सोनीपत की तरफ घूमते ही टी-प्वाइंट बनता है। यही गौरीपुर मोड़ है। हरियाणा, यूपी और दिल्ली के वाहनों का यहां सबसे ज्यादा आवागमन रहता है। यहां पर कई-कई फीट गहरे गड्ढे हैं, जिनसे वाहनों का निकलना मुश्किल हैं। आए दिन यहां हादसे होते हैं, जिनमें लोगों की जान भी जा चुकी है। गढ़-सोनीपत हाईवे इसी मोड़ से जुड़ता हुआ आगे बढ़ता है।
विज्ञापन
क्या कहते हैं लोग?
खेकड़ा के पूर्व सैनिक ब्रह्म सिंह धामा कहते हैं कि सिस्टम अंधा हो गया है। लोगों की समस्याओं के समाधान का कार्य प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का है, लेकिन कोई नहीं सुन रहा। हाईवे का निर्माण होना चाहिए।
बड़ौत निवासी अक्षय कुमार का कहना है कि लोगों की जान जा रही है, लेकिन नेताओं को जरा भी चिंता नहीं है। हाईवे का निर्माण क्यों नहीं हो सकता। क्या सरकार को इसके गड्ढे नहीं दिखते। चार जिलों के लोगों की समस्या है।
बड़ौत के कमल वर्मा कहते हैं कि आजादी के बाद प्रदेश और देश में लगातार बागपत की दमदार उपस्थिति के बावजूद विकास नहीं हुआ। हाईवे पर वोट मांगने वाले जनता को बताए कि क्यों निर्माण नहीं हो रहा है।
सरूरपुर कलां के संजीव नैन कहते हैं कि नेता सिर्फ वायदे करते हैं। लोगों को धरना प्रदर्शन करना होगा, तभी सरकार की कुंभकर्णी नींद इस मामले में टूटेगी।
गैड़बरा गांव के अंशु जयंत का कहना है कि हाईवे में गड्ढों से लोगों की जिंदगी जा रही है, लेकिन सरकार को चिंता नहीं है। लोगों को एकजुट होकर आंदोलन करना होगा। जनप्रतिनिधियों से इस पर जवाब मांगना होगा।
अस्थमा का खतरा, डस्ट एलर्जी
जिला अस्पताल में कार्यरत मेडिकल अफसर डॉ. भूपेंद्र सिंह बताते हैं कि धूल लगातार उड़ने और उसके संपर्क में आने से डस्ट एलर्जी हो जाती है। इसके अलावा धूल में अधिक समय तक रहने के कारण अस्थमा का खतरा रहता है। धूल से नेत्र, त्वचा और सांस संबंधी बीमारियां फैलती है।
गड्ढों पर आंदोलन की तैयारी
बागपत। दिल्ली-सहारनपुर हाईवे की खस्ता हालत और गड्ढों के विरोध में आंदोलन की तैयारी है। लोगों का कहना है कि सिस्टम को जगाना होगा। पूर्व सैनिक सुभाष कश्यप ने चार सितंबर को गौरीपुर मोड़ पर धरना देने का एलान किया है। पूर्व सैनिक ब्रह्म सिंह धामा ने कहा कि वह अपने संगठन के साथ कलक्ट्रेट में डीएम का घेराव करेंगे। लोगों को अधिक से अधिक जागरूक करेंगे।