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उतम आर्जव धर्म को अंगीकार किया
Updated Tue, 29 Aug 2017 12:39 AM IST
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उत्तम आर्जव धर्म को अंगीकार किया
बड़ौत (बागपत)। जैन समाज के चल रहे दशलक्षण पर्व के तीसरे दिन जैन अनुयायियों ने उत्तम आर्जव धर्म को अंगीकार कर मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना की। दिगंबर जैन समाज समिति के तत्वावधान में बड़ा जैन मंदिर में अनुमान सागर महाराज के सानिध्य में दिगंबर जैन युवा मंच द्वारा आयोजित 13 द्वीप महामंडल विधान में भगवान चंद्र प्रभु का अभिषेक किया । इसके बाद पंडित अमर चंद जैन के निर्देशन में संगीत मधुर लहरियों के बीच नित्य नियम की पूजा, दशलक्षण पर्व की पूजा विधि विधान से की । इसके बाद 13 द्वीप महामंडल विधान शुरू हुआ। विधान में सुदर्शन मेरू के पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण क्षेत्र समेत कुल सात पूजा की। इनमें जंबू वृक्ष, भरत क्षेत्र, रूपांचल, ऐरावत क्षेत्र आदि पूजा शामिल रही। विधान के बीच-बीच में अमर चंद जैन ने विधान की महत्ता पर प्रकाश डाला। विधान में संगीतमय पूजन के बीच में इंद्र-इंद्राणियों ने भक्ति भाव होकर नृत्य प्रस्तुत किए।
उधर दिगंबर जैन छोटा मंदिर में सुबह से ही भक्तों ने सामूहिक पूजा कर भगवान का अभिषेक किया। दिगंबर जैन अतिथि भवन में श्रद्धालुओं ने पीत वस्त्र धारण करके दशलक्षण धर्म की पूजा अर्चना की। सांय काल दिगंबर जैन बड़ा मंदिर, छोटा जैन मंदिर, जैन अतिथि भवन में श्रद्धालुओं ने भगवान की सामूहिक आरती उतारी और भजनों, नृत्य, लघु नाटिका के कार्यक्रम हुए। मीडिया प्रभारी अतुल जैन ने बताया कल-आज सोच धर्म बनाया जाएगा। इस मौके पर प्रवीण जैन, अतुल जैन, विपुल जैन, सुरेंद्र जैन, सुभाष जैन, पंकज जैन आदि रहे।
मानसिक बीमारी से ऊपर उठाने वाला आर्जव धर्म
बड़ौत। दिगंबर जैन अतिथि भवन में अनुमान सागर महाराज ने कहा परमात्मा और मनुष्य के बीच की निकटतम दूरी का नाम ही आर्जव धर्म है। आर्जव धर्म सरल, प्रभाविकता और बच्चों जैसे भोलेपन के लिए होता है। मानसिक बीमारी से ऊपर उठाने वाला आर्जव धर्म होता है। असीम आनंद में बौद्ध करने वाला आर्जव धर्म है।
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उत्तम आर्जव धर्म की पूजा अर्चना की
बड़ौत। अजित नाथ दिगंबर जैन मंदिर कमेटी मंडी के तत्वावधान में आचार्य सुंदर महाराज के सानिध्य में विहर्ष सभागार सत्यवती धर्मसभा में उत्तम आर्जव धर्म की पूजा की। इसमें सुबह के समय ब्रह्मचारिणी रीता दीदी और नीरज भैया के निर्देशन में इंद्र-इंद्राणियों ने अजितनाथ भगवान की प्रतिमा का प्रासुक जल से अभिषेक किया। शांति धारा का सौभाग्य राकेश जैन को प्राप्त हुआ। इसके बाद नित्य नियम की पूजन में नव देवता पूजन, शांतिनाथ पूजा, सोलहकरण और दशलक्षण धर्म की पूजा की और जैन श्रद्धालुओं ने उत्तम आर्जव धर्म को अंगीकार किया। इस दौरान आचार्य सुंदर सागर महाराज ने कहा आर्जव अथवा भाव की शुद्धता जो सोचना सो कहना, जो कहना सो करना उत्तम आर्जव कपट मिटाने का साधन है अर्थात उत्तम आर्जव धर्म आ जाने से सरल हृदय व्यक्तियों के घर में लक्ष्मी का भी स्थायी वास रहता है।
फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता आयोजित
बड़ौत। स्याद्वाद महिला संगठन ने रविवार की रात्रि में विहर्ष सभागार में फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता का आयोजन किया। इस दौरान बच्चे कोई योगी आदित्य नाथ तो कोई कृष्ण के रूप में सुशोभित होकर आया।
लोभ तो मुनियों को भी नहीं छोड़ता - अरुण मुनि
बड़ौत। जैन स्थानक शहर में संवतसरि पर्व के बाद धर्मसभा में अरुण मुनि ने कहा धर्म रूपी दीवारें बन जाती है। अब उन पर लेंटर डाला जाना है, तभी यह धार्मिक महल पूरा होगा। पाप तत्व दुर्गती में ले जाने वाले, दीन-हीन करने वाले और जीवन में दुख लाने वाले हैं। संयम पथ पर चलकर मुनि बनकर भी अनगिनत कष्ट सहे, काफी तप आराधना की, मगर इन पापों में से इस लोभ को नहीं छोड़ा तो सब कुछ व्यर्थ है। उन्होंने कहा जीवन यदि 18 पापों में लाभ नाम का यह कसाय बाकी है तो सारे पाप जिंदा हो जाते हैं। लोभ सभी पापों पर नियंत्रण माना जाता है। यह लोभ रूपी कसाय तो मुनियों को भी नहीं छोड़ता। उन्हें भी किसी न किसी रूप में यह परेशान करता है। किसी को नाम की चिंता है तो किसी को भीड़ की चिंता है। इस मौके पर मनीष जैन, अतुल जैन, कालू जैन, गौरव जैन, हंस कुमार जैन, शील चंद, दीपक जैन, अजय जैन, शैल बाला, कमलेश, गीता आदि रहे।
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बड़ौत (बागपत)। जैन समाज के चल रहे दशलक्षण पर्व के तीसरे दिन जैन अनुयायियों ने उत्तम आर्जव धर्म को अंगीकार कर मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना की। दिगंबर जैन समाज समिति के तत्वावधान में बड़ा जैन मंदिर में अनुमान सागर महाराज के सानिध्य में दिगंबर जैन युवा मंच द्वारा आयोजित 13 द्वीप महामंडल विधान में भगवान चंद्र प्रभु का अभिषेक किया । इसके बाद पंडित अमर चंद जैन के निर्देशन में संगीत मधुर लहरियों के बीच नित्य नियम की पूजा, दशलक्षण पर्व की पूजा विधि विधान से की । इसके बाद 13 द्वीप महामंडल विधान शुरू हुआ। विधान में सुदर्शन मेरू के पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण क्षेत्र समेत कुल सात पूजा की। इनमें जंबू वृक्ष, भरत क्षेत्र, रूपांचल, ऐरावत क्षेत्र आदि पूजा शामिल रही। विधान के बीच-बीच में अमर चंद जैन ने विधान की महत्ता पर प्रकाश डाला। विधान में संगीतमय पूजन के बीच में इंद्र-इंद्राणियों ने भक्ति भाव होकर नृत्य प्रस्तुत किए।
उधर दिगंबर जैन छोटा मंदिर में सुबह से ही भक्तों ने सामूहिक पूजा कर भगवान का अभिषेक किया। दिगंबर जैन अतिथि भवन में श्रद्धालुओं ने पीत वस्त्र धारण करके दशलक्षण धर्म की पूजा अर्चना की। सांय काल दिगंबर जैन बड़ा मंदिर, छोटा जैन मंदिर, जैन अतिथि भवन में श्रद्धालुओं ने भगवान की सामूहिक आरती उतारी और भजनों, नृत्य, लघु नाटिका के कार्यक्रम हुए। मीडिया प्रभारी अतुल जैन ने बताया कल-आज सोच धर्म बनाया जाएगा। इस मौके पर प्रवीण जैन, अतुल जैन, विपुल जैन, सुरेंद्र जैन, सुभाष जैन, पंकज जैन आदि रहे।
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मानसिक बीमारी से ऊपर उठाने वाला आर्जव धर्म
बड़ौत। दिगंबर जैन अतिथि भवन में अनुमान सागर महाराज ने कहा परमात्मा और मनुष्य के बीच की निकटतम दूरी का नाम ही आर्जव धर्म है। आर्जव धर्म सरल, प्रभाविकता और बच्चों जैसे भोलेपन के लिए होता है। मानसिक बीमारी से ऊपर उठाने वाला आर्जव धर्म होता है। असीम आनंद में बौद्ध करने वाला आर्जव धर्म है।
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उत्तम आर्जव धर्म की पूजा अर्चना की
बड़ौत। अजित नाथ दिगंबर जैन मंदिर कमेटी मंडी के तत्वावधान में आचार्य सुंदर महाराज के सानिध्य में विहर्ष सभागार सत्यवती धर्मसभा में उत्तम आर्जव धर्म की पूजा की। इसमें सुबह के समय ब्रह्मचारिणी रीता दीदी और नीरज भैया के निर्देशन में इंद्र-इंद्राणियों ने अजितनाथ भगवान की प्रतिमा का प्रासुक जल से अभिषेक किया। शांति धारा का सौभाग्य राकेश जैन को प्राप्त हुआ। इसके बाद नित्य नियम की पूजन में नव देवता पूजन, शांतिनाथ पूजा, सोलहकरण और दशलक्षण धर्म की पूजा की और जैन श्रद्धालुओं ने उत्तम आर्जव धर्म को अंगीकार किया। इस दौरान आचार्य सुंदर सागर महाराज ने कहा आर्जव अथवा भाव की शुद्धता जो सोचना सो कहना, जो कहना सो करना उत्तम आर्जव कपट मिटाने का साधन है अर्थात उत्तम आर्जव धर्म आ जाने से सरल हृदय व्यक्तियों के घर में लक्ष्मी का भी स्थायी वास रहता है।
फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता आयोजित
बड़ौत। स्याद्वाद महिला संगठन ने रविवार की रात्रि में विहर्ष सभागार में फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता का आयोजन किया। इस दौरान बच्चे कोई योगी आदित्य नाथ तो कोई कृष्ण के रूप में सुशोभित होकर आया।
लोभ तो मुनियों को भी नहीं छोड़ता - अरुण मुनि
बड़ौत। जैन स्थानक शहर में संवतसरि पर्व के बाद धर्मसभा में अरुण मुनि ने कहा धर्म रूपी दीवारें बन जाती है। अब उन पर लेंटर डाला जाना है, तभी यह धार्मिक महल पूरा होगा। पाप तत्व दुर्गती में ले जाने वाले, दीन-हीन करने वाले और जीवन में दुख लाने वाले हैं। संयम पथ पर चलकर मुनि बनकर भी अनगिनत कष्ट सहे, काफी तप आराधना की, मगर इन पापों में से इस लोभ को नहीं छोड़ा तो सब कुछ व्यर्थ है। उन्होंने कहा जीवन यदि 18 पापों में लाभ नाम का यह कसाय बाकी है तो सारे पाप जिंदा हो जाते हैं। लोभ सभी पापों पर नियंत्रण माना जाता है। यह लोभ रूपी कसाय तो मुनियों को भी नहीं छोड़ता। उन्हें भी किसी न किसी रूप में यह परेशान करता है। किसी को नाम की चिंता है तो किसी को भीड़ की चिंता है। इस मौके पर मनीष जैन, अतुल जैन, कालू जैन, गौरव जैन, हंस कुमार जैन, शील चंद, दीपक जैन, अजय जैन, शैल बाला, कमलेश, गीता आदि रहे।