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नकली दवाई बनाने और बेचने के तीन आरोपियों पर चार्जशीट
Updated Fri, 18 Aug 2017 01:28 AM IST
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बागपत। नकली दवा बनाने और बेचने के मामले में औषधि निरीक्षक ने सीजेएम कोर्ट में तीन लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। इसका खुलासा दो साल पहले बड़ौत की एक मेडिकल से दवा का नमूना लेने से हुआ था।
औषधि निरीक्षक वैभव बब्बर ने बताया वर्ष 2015 में टीम ने बड़ौत की अंशुल मेडिकल एजेंसी में छापामारी कर एंटीबायोटिक टैबलेट का सैंपल लिया था। जांच करने वह नकली पाया था। एजेंसी संचालक जसवीर सिंह ने बताया था कि उनको यह दवा मुजफ्फरनगर का युवक शहजाद देकर जाता है। उनको नहीं पता दवाई असली है या नकली। शहजाद से संपर्क करने पर उसने बताया यह दवा रामफल भाटी देता है। उसने ही दवा का भंडारण कर रखा है। रामफल भाटी के पास पहुंचे तो एक कमरे में दवा का काफी भंडारण मिला । उसने जानकारी दी उनको मुंबई की शीतल नाम की मेडिकल कंपनी दवा उपलब्ध कराती है। जबकि वहां पर इस नाम की कोई दवाई कंपनी नहीं मिली थी। आरोपी रामफल भाटी खुद ही दवाई बनाकर सप्लाई कराता है। इसका मुजफ्फरनगर के सिविल लाइन थाना में एफआईआर दर्ज कराई । केस की विवेचना करने पर पता चला रामफल भाटी ने नकली दवा तैयार कर बगैर लाइसेंस के उसका शहजाद से वितरित कराया है। एजेेंसी संचालक जसवीर पर लाइसेंस तो है, लेकिन उसने नकली दवा बेची है। इस कारण तीनों आरोपियों पर औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम 1940 की धारा 18/27 के तहत कार्रवाई कर कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया।
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औषधि निरीक्षक वैभव बब्बर ने बताया वर्ष 2015 में टीम ने बड़ौत की अंशुल मेडिकल एजेंसी में छापामारी कर एंटीबायोटिक टैबलेट का सैंपल लिया था। जांच करने वह नकली पाया था। एजेंसी संचालक जसवीर सिंह ने बताया था कि उनको यह दवा मुजफ्फरनगर का युवक शहजाद देकर जाता है। उनको नहीं पता दवाई असली है या नकली। शहजाद से संपर्क करने पर उसने बताया यह दवा रामफल भाटी देता है। उसने ही दवा का भंडारण कर रखा है। रामफल भाटी के पास पहुंचे तो एक कमरे में दवा का काफी भंडारण मिला । उसने जानकारी दी उनको मुंबई की शीतल नाम की मेडिकल कंपनी दवा उपलब्ध कराती है। जबकि वहां पर इस नाम की कोई दवाई कंपनी नहीं मिली थी। आरोपी रामफल भाटी खुद ही दवाई बनाकर सप्लाई कराता है। इसका मुजफ्फरनगर के सिविल लाइन थाना में एफआईआर दर्ज कराई । केस की विवेचना करने पर पता चला रामफल भाटी ने नकली दवा तैयार कर बगैर लाइसेंस के उसका शहजाद से वितरित कराया है। एजेेंसी संचालक जसवीर पर लाइसेंस तो है, लेकिन उसने नकली दवा बेची है। इस कारण तीनों आरोपियों पर औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम 1940 की धारा 18/27 के तहत कार्रवाई कर कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया।
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