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वाटरमैन के बागपत में ही पेयजल का टोटा

Fri, 23 Mar 2018 12:56 AM IST
Updated Fri, 23 Mar 2018 12:56 AM IST
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वाटरमैन के बागपत में ही पेयजल का टोटा

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बागपत। डौला में जन्मे जलपुरुष राजेेंद्र सिंह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बागपत की पहचान हैं। राजस्थान के अलवर में लोगों को पानी उपलब्ध कराने के कार्य के लिए उन्हें मैग्सेसे अवार्ड से नवाजा जा चुका है। लेकिन जल स्तर गिरने से जलपुरुष के जिले के कई गांव के लोग ही पेयजल की समस्या से जूझ रहे हैं। चढ़ता पारा चौगामा क्षेत्र के लिए मुसीबत बनने लगा है। शुद्ध पेयजल आपूर्ति के लिए एनजीटी के आदेश पर 413 हैंडपंप उखाड़ दिए गए थे लेकिन ग्रामीणों को पेयजल आपूर्ति के लिए कोई इंतजाम नहीं हुआ। जल निगम के अनुसार हैंडपंप और पाइप पेयजल योजना के लिए बजट नहीं है, जिस वजह से पाइप पेयजल योजना या हैंडपंप नहीं लग पा रहे हैं। जल निगम की ओर से दो सौ हैंडपंपों के लिए भेजा गया 197.708 लाख का बजट डेढ़ साल बाद भी स्वीकृत नहीं हुआ है।

ये थे एनजीटी ने आदेश
एनजीटी ने सात सितंबर 2016 को बागपत के 55 गांवों से 413 हैंडपंप उखाड़कर शुद्ध पेयजल की आपूर्ति के आदेश दिए थे। इसके लिए बाकायदा एक कमेटी बनी। 18 जनवरी 2017 तक हैंडपंप हटा दिए गए। लेकिन इसके बाद शुद्ध पेयजल की आपूर्ति के इंतजाम अब तक नहीं किए गए हैं।
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27 गांव का भेजा है बजट
जल निगम के अधिकारियों ने बताया कि एनजीटी ने 55 गांव के विषय में आदेश दिया था। इनमें 21 गांव के अलावा टीकरी और दोघट कस्बे में पाइप पेयजल योजना से पानी की आपूर्ति सुचारू है। जैवाबाद एवं कोहनाबाद गैर आबाद गांव है। बाकी बचे 30 गांव में से बिराल और बिजरौल के लिए जलकल परिसर के लिए जगह उपलब्ध नहीं है। सरौरा की आबादी कम है। बाकी बचे 27 गांव के लिए 3647 लाख का बजट भेजा गया, लेकिन अभी धनराशि उपलब्ध नहीं हुई। अधिशासी अभियंता संजय गौतम का कहना है कि बजट मिलते ही कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
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डार्कजोन खत्म किए, मुसीबत बरकरार
पिछले वर्ष तक बागपत का प्रत्येक प्रत्येक ब्लाक डार्क जोन में शामिल था। लेकिन सीएम योगी आदित्यनाथ ने डार्क जोन खत्म कर दिए। किसानों को ट्यूबवैल के कनेक्शन मिलने लगे। सवाल है कि अंधाधुंध भूगर्भ जल के दोहन से प्रत्येक वर्ष जलस्तर गिर रहा है। भविष्य में इस क्षेत्र के लिए जल संकट खड़ा हो सकता है।

खेकड़ा में गिरा 1.17 मीटर जलस्तर
भूजल स्तर के मामले में खेकड़ा ब्लाक के हालात बदतर हैं। 2014 के सापेक्ष 2015 में प्री मानसून में यहां 1.17 मीटर जलस्तर गिरा। बागपत में 18 सेमी, बड़ौत में 55 सेमी, पिलाना में पांच सेमी गिरावट दर्ज की गई थी। पुसार गांव में जलस्तर 32 मीटर और निरपुड़ा में 30.55 मीटर पर पहुंच गया है। इसके अलावा दाहा, टीकरी और अन्य गांवों समस्या विकराल है। उत्तर प्रदेश जल निगम के आंकड़ों के अनुसार हर साल जल स्तर में 60 से 70 सेमी गिरावट दर्ज की जा रही है। जिले के कई इलाकों में भूगर्भ जल 90 से एक सौ फीट तक पहुंच गया है।

जलस्तर में गिरावट की वजह
- तालाबों पर अवैध कब्जे।
- गन्ने की अधिक पैदावार।
- हिंडन और कृष्णा नदी का सूखना।
- सबमर्सिबल पंपों की बढ़ती संख्या।

इन गांव में पेयजल दूर की कौड़ी
पेयजल की समस्या से तवेलागढ़ी, पट्टी बंजारान, झूंडपुर, मिलाना, खपराना, चंदायन, बेगमाबाद गढ़ी, रहतना, मांगरौली, दादरी, निरपुड़ा, पलड़ी, दाहा, मुलसम, कान्हड़, पुसार, मौजिजाबाद नांगल में पेयजल की समस्या है।


हिंडन और कृष्णा परोस रहीं बीमारियां
हिंडन और कृष्णा नदी बीमारियां परोस रही हैं, इस वजह से पेयजल की अधिक दिक्कत है। अकेले दाहा, निरपुडा, भड़ल और गांगनौली में ब्लड कैंसर और लीवर कैंसर से मरने वालों की संख्या 50 से अधिक है। एक सौ फीट गहराई तक भूजल प्रभावित है। हैंडपंपों से निकलने वाले पानी में नाइट्रेट, फ्लोराइड, फास्फोरस और केडियम की मात्रा अधिक है। दोआबा पर्यावरण समिति के अध्यक्ष डॉ चंद्रवीर सिंह का कहना है कि अगर समय रहते इंतजाम नहीं किए गए पेयजल और बीमारी इस क्षेत्र के लिए सबसे बड़ी चुनौती होंगे।
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