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भ्रष्ट चकबंदी अधिकारियों के खिलाफ लड़ेंगे लड़ाई
Updated Mon, 01 Jan 2018 12:53 AM IST
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दोघट (बागपत)। बामनौली गांव में पूर्व प्रधान महीपाल के आवास पर चकबंदी से आहत किसानों की पंचायत हुई। इसमें भ्रष्ट चकबंदी अधिकारियों के खिलाफ एकजुट होकर लड़ाई लड़ने का आह्वान किया और आंदोलन धमकी दी।
पंचायत की अध्यक्षता करते महेंद्र सिंह ने कहा कि चकबंदी ने गांव के किसानों को बर्बाद कर दिया है। चकबंदी में किसानों की अच्छी जमीन छीन ली गई और उन्हें खराब व कम कीमत की जमीन दी । कुछ किसानों को आज तक यह भी पता नहीं चला कि उनके चक कहां काटे गए हैं। सैकड़ों के किसानों के हवाई चक काट दिए। चकबंदी अधिकारियों ने किसानों से खूब धन की उगाही की, लेकिन उनके मनमाफिक चक नहीं बनाए। इससे किसान भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। चकबंदी में आधे किसानों को कब्जे दिलाए और आधे किसानों को आज तक भी कब्जे नहीं दिलाए और उन्हें आपस में लड़ने के लिए मजबूर कर दिया। किसानों ने जब-जब भी गलत चकबंदी का विरोध किया तो तब-तब प्रशासन ने उनकी आवाज दबाने का प्रयास किया। चकबंदी के कारण किसान कृष्णपाल की जान चली गई। आज तक भी उसके परिवार को कुछ नहीं मिला और मृतक की पत्नी को दर-दर की ठोकरे खाने को मजबूर कर दिया। चकबंदी अधिकारी गांव में आकर खानापूर्ति कर चले जाते हैं। पीड़ित किसानों की कोई समस्या नहीं सुनी जा रही है। इसे बर्दास्त नहीं किया जाएगा। पंचायत में निर्णय लिया कि सभी किसान एकजुट होकर भ्रष्ट चकबंदी अधिकारियों के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे। किसान सही चकबंदी कराकर ही दम लेंगे। संचालन पूर्व प्रधान महीपाल सिंह ने किया। इसमें सुखवीर सिंह, राजवीर सिंह, राममेहर, सोनू, महक सिंह, राजपाल, ज्ञानेंद्र, सतपाल, राम कुमार, जयवीर, ईश्वर, विजयपाल आदि रहे।
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पंचायत की अध्यक्षता करते महेंद्र सिंह ने कहा कि चकबंदी ने गांव के किसानों को बर्बाद कर दिया है। चकबंदी में किसानों की अच्छी जमीन छीन ली गई और उन्हें खराब व कम कीमत की जमीन दी । कुछ किसानों को आज तक यह भी पता नहीं चला कि उनके चक कहां काटे गए हैं। सैकड़ों के किसानों के हवाई चक काट दिए। चकबंदी अधिकारियों ने किसानों से खूब धन की उगाही की, लेकिन उनके मनमाफिक चक नहीं बनाए। इससे किसान भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। चकबंदी में आधे किसानों को कब्जे दिलाए और आधे किसानों को आज तक भी कब्जे नहीं दिलाए और उन्हें आपस में लड़ने के लिए मजबूर कर दिया। किसानों ने जब-जब भी गलत चकबंदी का विरोध किया तो तब-तब प्रशासन ने उनकी आवाज दबाने का प्रयास किया। चकबंदी के कारण किसान कृष्णपाल की जान चली गई। आज तक भी उसके परिवार को कुछ नहीं मिला और मृतक की पत्नी को दर-दर की ठोकरे खाने को मजबूर कर दिया। चकबंदी अधिकारी गांव में आकर खानापूर्ति कर चले जाते हैं। पीड़ित किसानों की कोई समस्या नहीं सुनी जा रही है। इसे बर्दास्त नहीं किया जाएगा। पंचायत में निर्णय लिया कि सभी किसान एकजुट होकर भ्रष्ट चकबंदी अधिकारियों के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे। किसान सही चकबंदी कराकर ही दम लेंगे। संचालन पूर्व प्रधान महीपाल सिंह ने किया। इसमें सुखवीर सिंह, राजवीर सिंह, राममेहर, सोनू, महक सिंह, राजपाल, ज्ञानेंद्र, सतपाल, राम कुमार, जयवीर, ईश्वर, विजयपाल आदि रहे।
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