{"_id":"59c6bad94f1c1b2f688b5f4c","slug":"61506196185-baghpat-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मां दुर्गा में भक्तों की अटूट आस्था","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मां दुर्गा में भक्तों की अटूट आस्था
Updated Sun, 24 Sep 2017 01:19 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अग्रवाल मंडी टटीरी (बागपत)। नवरात्र में भगवती देवी मंदिर पर मांगी गई मन्नत पूरी होती हैं। वर्तमान समय में मंदिर आस्था और श्रद्धा का केंद्र बना है। महिला श्रद्धालु यहां पहुंचकर पूजा अर्चना कर रही हैं।
मेरठ-बागपत मार्ग स्थित अग्रवाल मंडी टटीरी में वर्ष 1960 में मां भगवती देवी मंदिर की स्थापना हुई । खट्टा प्रह्लादपुर गांव के बलवंत सिंह की मां दुर्गा में अटूट आस्था थी। उनके घर में बेटी जन्मीं तो उन्होंने उसका नाम रखा भगवती। करीब दस साल की उम्र में उसने पहले अपने गांव और बाद में सूरजपुर महनवा में 40-40 दिन की खड़ी तपस्या की । भगवती देवी के भतीजे ऋषिपाल ने बताया भगवती की तपस्या देखने के लिए दूर-दराज से लोग ट्रेन में सवार होकर आते हैं। इसके बाद में भगवती ने अपना मंदिर टटीरी में बनवाने की इच्छा जताई । यहां मंदिर बनवाया और मां दुर्गा की मूर्ति की स्थापना की । बताते हैं वर्ष 1964 में भगवती ने इसी मंदिर में समाधि ले ली थी। इस कारण श्रद्धालुओं में देवी के प्रति अटूट आस्था है। नवरात्रों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। भजन, कीर्तन होते है, जिसमें नृत्य होता है। मंदिर से जो मन्नत मांगी जाती है वो पूरी होती है।
विज्ञापन
मेरठ-बागपत मार्ग स्थित अग्रवाल मंडी टटीरी में वर्ष 1960 में मां भगवती देवी मंदिर की स्थापना हुई । खट्टा प्रह्लादपुर गांव के बलवंत सिंह की मां दुर्गा में अटूट आस्था थी। उनके घर में बेटी जन्मीं तो उन्होंने उसका नाम रखा भगवती। करीब दस साल की उम्र में उसने पहले अपने गांव और बाद में सूरजपुर महनवा में 40-40 दिन की खड़ी तपस्या की । भगवती देवी के भतीजे ऋषिपाल ने बताया भगवती की तपस्या देखने के लिए दूर-दराज से लोग ट्रेन में सवार होकर आते हैं। इसके बाद में भगवती ने अपना मंदिर टटीरी में बनवाने की इच्छा जताई । यहां मंदिर बनवाया और मां दुर्गा की मूर्ति की स्थापना की । बताते हैं वर्ष 1964 में भगवती ने इसी मंदिर में समाधि ले ली थी। इस कारण श्रद्धालुओं में देवी के प्रति अटूट आस्था है। नवरात्रों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। भजन, कीर्तन होते है, जिसमें नृत्य होता है। मंदिर से जो मन्नत मांगी जाती है वो पूरी होती है।
विज्ञापन