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गाजर के भाव गिरे, किसानों को लगा झटका
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बागपत। सब्जी उत्पादन करने वाले किसानों को भी जोर का झटका लगा है। गाजर के किसान भाव नहीं मिलने के कारण नुकसान झेल रहे हैं। इस बार गाजर का भाव सिर्फ दो से तीन रुपये प्रति किलो ही किसानों को मिल रहा है। बेहतर पैदावार को भाव गिरने की वजह माना जा रहा है।
वर्तमान समय में गाजर की खुदाई का कार्य चल रहा है, लेकिन बाजार के भाव ने किसानों को मुसीबत में डाल दिया है। फसल पककर तैयार है, लेकिन बेहतर भाव मंडियों और आढ़त पर नहीं है। वर्तमान में किसान को दो से तीन रुपये प्रति किलो का ही भाव मिल रहा है, इस कारण किसान को लागत भी वसूल नहीं हो पा रही हैं। किसानों का कहना है कि इस बार जोर का झटका लगा है। किसान रणपाल सिंह का कहना है कि भाव नहीं मिलने से गाजर उगाने वाले किसान इस बार नुकसान में हैं। किसानों को लागत भी वसूल नहीं हो सकी है। किसान ओमपाल सिंह का कहना है कि आढ़त पर दाम नहीं है और मंडियों में गाजर के खरीददार नहंीं मिल रहे हैं, इस कारण इस बार दाम के लाले पड़ गए हैं।
दो सौ एकड़ में उगाई गई गाजर
बागपत। जिले में इस बार दो सौ एकड़ में गाजर की खेती हुई है। जबकि पिछले वर्ष करीब 180 एकड़ में गाजर का उत्पादन हुआ था। पिछले वर्ष किसानों को दस रुपये प्रति किलो तक भाव मिल गया था, लेकिन इस बार भाव धड़ाम हो गया है।
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कोताना और सिसाना में अधिक पैदावार
बागपत। जिले में गाजर की फसल कोताना और सिसाना गांव में सबसे अधिक होती है। अन्य क्षेत्र में कम उत्पादन होता है। यमुना किनारे के गांव के लोग भी गाजर उगाते हैं।
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वर्तमान समय में गाजर की खुदाई का कार्य चल रहा है, लेकिन बाजार के भाव ने किसानों को मुसीबत में डाल दिया है। फसल पककर तैयार है, लेकिन बेहतर भाव मंडियों और आढ़त पर नहीं है। वर्तमान में किसान को दो से तीन रुपये प्रति किलो का ही भाव मिल रहा है, इस कारण किसान को लागत भी वसूल नहीं हो पा रही हैं। किसानों का कहना है कि इस बार जोर का झटका लगा है। किसान रणपाल सिंह का कहना है कि भाव नहीं मिलने से गाजर उगाने वाले किसान इस बार नुकसान में हैं। किसानों को लागत भी वसूल नहीं हो सकी है। किसान ओमपाल सिंह का कहना है कि आढ़त पर दाम नहीं है और मंडियों में गाजर के खरीददार नहंीं मिल रहे हैं, इस कारण इस बार दाम के लाले पड़ गए हैं।
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दो सौ एकड़ में उगाई गई गाजर
बागपत। जिले में इस बार दो सौ एकड़ में गाजर की खेती हुई है। जबकि पिछले वर्ष करीब 180 एकड़ में गाजर का उत्पादन हुआ था। पिछले वर्ष किसानों को दस रुपये प्रति किलो तक भाव मिल गया था, लेकिन इस बार भाव धड़ाम हो गया है।
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कोताना और सिसाना में अधिक पैदावार
बागपत। जिले में गाजर की फसल कोताना और सिसाना गांव में सबसे अधिक होती है। अन्य क्षेत्र में कम उत्पादन होता है। यमुना किनारे के गांव के लोग भी गाजर उगाते हैं।