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बागपत की तीरंदाज रितिका को मिलेगा रानी लक्ष्मीबाई अवार्ड
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बागपत। धनौरा गांव के किसान अनिल वेदवान की बेटी रितिका वेदवान ने एक बार फिर जिले को खेल के मैदान पर खुशी बख्शी है। उत्तर प्रदेश सरकार ने रितिका को इस बार का प्रतिष्ठित रानी लक्ष्मीबाई अवार्ड देने की घोषणा की है। तीरंदाज का कहना है कि इस बार अवार्ड मिल जाने की पूरी उम्मीद थी। पिछले कई सालों से वह अवार्ड की दावेदार थी।
प्रदेश सरकार की ओर से 24 जनवरी को लखनऊ में खेल पुरस्कार दिए जाएंगे। धनौरा गांव के किसान की बेटी तीरंदाजी की खिलाड़ी और बड़ौत में बतौर प्रशिक्षक कार्य करने वाली रितिका वेदवान को इस बार के रानी लक्ष्मीबाई अवार्ड के लिए चयनित किया । बागपत के हिस्से में तीरंदाजी में यह पहला लक्ष्मीबाई अवार्ड है। इससे पहले कुश्ती में मलकपुर की पहलवान को यह अवार्ड मिल चुका है। अवार्ड के लिए चयन की सूचना पर धनौरा टीकरी, बड़ौत और बागपत में खुशी का माहौल है। 24 जनवरी को सीएम योगी आदित्यनाथ यह अवार्ड रितिका को देंगे। जिला तीरंदाजी संघ के सचिव डीजीसी सुनील पंवार ने कहा कि कामयाबी से अन्य खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलेगी। रितिका ने जिले का नाम रोशन किया है। युवा के लिए खेलों में भी कॅरियर के बेहतर विकल्प हैं। मेहनत कभी बेकार नहीं जाती। रितिका ने बागपत का नाम रोशन किया है।
ऐसी है रितिका वेदवान
बागपत। सीनियर नेशनल तीरंदाजी में साल 2016 में स्वर्ण पदक जीतकर रितिका ने पहली बड़ी कामयाबी हासिल की। इसके बाद लगातार दो बार नेशनल खेलों में रजत और कांस्य पदक जीता। रितिका छह बार की इंटर यूनिवर्सिटी तीरंदाजी की चैंपियन रह चुकी है। तीन बार वह चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी और तीन बार चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की ओर से खेलते हुए चैंपियन रही हैं। पहले इंडियन राउंड में खेलती थी, लेकिन इन दिनों वह कंपाउंड वर्ग में प्रतिभाग कर रही हैं।
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भाई था पहला कोच, इसके बाद छा गई रितिका
बागपत। रितिका बताती है कि वह साल 2013 से तीरंदाजी के मैदान पर है। पहले भाई निखिल वेदवान ने खेल सीखा। उसने पहले घर पर ही भाई से खेल की बारीकियां सीखीं और इसके बाद एकेडमी में जाकर अभ्यास किया। पिता अनिल वेदवान किसान है और माता अनीता देवी गृहणी हैं।
बेहतर कोच और खिलाड़ी बनने की ख्वाहिश
बागपत। रितिका बताती है कि उन्होंने बीपीएड की पढ़ाई पूरी कर ली है। अब वह तीरंदाजी में कोचिंग के लिए पढ़ाई करेंगी और भविष्य में भी अपने खेल को जारी रखेंगी।
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प्रदेश सरकार की ओर से 24 जनवरी को लखनऊ में खेल पुरस्कार दिए जाएंगे। धनौरा गांव के किसान की बेटी तीरंदाजी की खिलाड़ी और बड़ौत में बतौर प्रशिक्षक कार्य करने वाली रितिका वेदवान को इस बार के रानी लक्ष्मीबाई अवार्ड के लिए चयनित किया । बागपत के हिस्से में तीरंदाजी में यह पहला लक्ष्मीबाई अवार्ड है। इससे पहले कुश्ती में मलकपुर की पहलवान को यह अवार्ड मिल चुका है। अवार्ड के लिए चयन की सूचना पर धनौरा टीकरी, बड़ौत और बागपत में खुशी का माहौल है। 24 जनवरी को सीएम योगी आदित्यनाथ यह अवार्ड रितिका को देंगे। जिला तीरंदाजी संघ के सचिव डीजीसी सुनील पंवार ने कहा कि कामयाबी से अन्य खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलेगी। रितिका ने जिले का नाम रोशन किया है। युवा के लिए खेलों में भी कॅरियर के बेहतर विकल्प हैं। मेहनत कभी बेकार नहीं जाती। रितिका ने बागपत का नाम रोशन किया है।
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ऐसी है रितिका वेदवान
बागपत। सीनियर नेशनल तीरंदाजी में साल 2016 में स्वर्ण पदक जीतकर रितिका ने पहली बड़ी कामयाबी हासिल की। इसके बाद लगातार दो बार नेशनल खेलों में रजत और कांस्य पदक जीता। रितिका छह बार की इंटर यूनिवर्सिटी तीरंदाजी की चैंपियन रह चुकी है। तीन बार वह चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी और तीन बार चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की ओर से खेलते हुए चैंपियन रही हैं। पहले इंडियन राउंड में खेलती थी, लेकिन इन दिनों वह कंपाउंड वर्ग में प्रतिभाग कर रही हैं।
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भाई था पहला कोच, इसके बाद छा गई रितिका
बागपत। रितिका बताती है कि वह साल 2013 से तीरंदाजी के मैदान पर है। पहले भाई निखिल वेदवान ने खेल सीखा। उसने पहले घर पर ही भाई से खेल की बारीकियां सीखीं और इसके बाद एकेडमी में जाकर अभ्यास किया। पिता अनिल वेदवान किसान है और माता अनीता देवी गृहणी हैं।
बेहतर कोच और खिलाड़ी बनने की ख्वाहिश
बागपत। रितिका बताती है कि उन्होंने बीपीएड की पढ़ाई पूरी कर ली है। अब वह तीरंदाजी में कोचिंग के लिए पढ़ाई करेंगी और भविष्य में भी अपने खेल को जारी रखेंगी।