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सरूरपुर कलां गांव में 29 मवेशियों की मौत, दहशत में पशु पालक
Updated Sun, 16 Sep 2018 01:20 AM IST
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बागपत। सरूरपुर कलां गांव में बीमारी से छोटे और बड़े करीब 29 पशुओं की मौत हो चुकी है। इससे पशु पालकों में दहशत का माहौल है। पशु चिकित्सा विभाग इसे फुट रोट रोग और टीक फिवर से मौत होना मान रहा। गांव में दहशत के चलते लोगों ने घरों के आगे और पशुओं के नीचे चूना डाल रहे हैं।
बारिश के मौसम ने पशुओं को भी प्रभावित किया है। बुखार और अन्य रोगों की जकड़ में आ गए है। सरूरपुर कलां गांव में अभी तक 29 मौत हो चुकी है। सैकड़ों मवेशी अभी बीमारी से ग्रस्त है। इससे गांव में पशु पालकों में दहशत का माहौल है। प्राइवेट से लेकर सरकारी चिकित्सकों से उपचार करा रहे हैं, लेकिन आराम बहुत कम मिल रहा है। अब दहशत के चलते लोग अपने घरों के बाहर और पशुओं के नीचे बीमारी से बचाव के लिए चूना डाल रहे हैं। पशु पालकों ने पशु चिकित्सा विभाग पर आरोप लगा रहे है कि सूचना देने के बाद भी खुरपका-मुंहपका टीकाकरण नहीं किया। इसी रोग से मवेशियों की मौत हो रही है। सैकड़ों अभी बीमारी से ग्रस्त हैं। पशु पालक और किसान सुभाष नैन ने कहा कि पशुओं की मौत से ग्रामीण चिंता में है। अभी तक छोटे बड़े 29 पशुओं की मौत हो चुकी है। उनके मवेशी बीमार है। गांव के सुधीर, विनोद, कोमिल, विकास, सत्यवीर, रामे, सचिन ने पशु पालन विभाग से गांव में पशु जांच अभियान चलाकर बीमार पशुओं का इलाज करने की मांग।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (सीवीओ) डॉ, राजपाल सिंह ने कहा ग्रामीणों का आरोप गलत है। टीम निरंतर गांव में पहुंचकर पशुओं का उपचार कर रही है। अभी तक 500-600 का उपचार किया जा चुका है। खुरपका-मुंहपका रोग नहीं है। फुट रोट रोग और टीक फीवर से मवेशियों की मौत हो रही है। टीकाकरण के दौरान टीम का कोई सहयोग नहीं करते हैं। टीके लगाने से साफ इंकार कर देते है। इसी कारण बीमारी बढ़ रही है। लोगों को डरने की जरूरत नही है। जल्द अभियान चलाकर उपचार होगा।
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इन लोगों के मवेशियों की हुई मौत
नंदू, धर्मपाल की गाय, अनिल की दो पशु, अशोक, रणधीर की भैंस, सत्यवीर का भैंसा, बिल्लू के दो मवेशी की मौत हो चुकी है। वहीं चिकित्सक ने अनिल के पशु को मौत हो जाएगी की पुष्टी कर दी है। इसके अलावा दर्जनों पशु पालकों के सैकड़ों पशु बीमार हैं।
पशुओं को टीक फीवर (चिचड़ी के काटने) से भी मौत के प्रकरण सामने आ रहे है। पशुओं के शरीर पर टीक (चिचड़ी) हो होती है। जो शरीर का खून चुसती है। शरीर में अपना जहर छोड़ देती है। जिससे तेज बुखार आ जाता है। इससे मवेशियों की मौत हो रही है।
होम्योपैथिक दवा ‘वीरूनीलम’ की दो-दो बूंद
बागपत। पशु रोग विशेषज्ञ एवं टटीरी नगर पंचायत चेयरमैन डॉ. विनोद कुमार ने बताया कि इस मौसम में पशु रोगों की चपेट में आ जाते है। सरूरपुर कलां गांव में पशुओं की फुट रोट रोग से मौत हो रही है, वह होम्योपैथिक दवा ‘वीरूनीलम’ की दो-दो बूंद मवेशियों को पिलाए। स्वस्थ पशुओं को भी दवा दें। इससे वायरस की चपेट में नहीं जाएंगे। जो पशु बीमार है उन्हें स्वस्थ पशुओं से अलग बांधने की सलाह दी है।
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बारिश के मौसम ने पशुओं को भी प्रभावित किया है। बुखार और अन्य रोगों की जकड़ में आ गए है। सरूरपुर कलां गांव में अभी तक 29 मौत हो चुकी है। सैकड़ों मवेशी अभी बीमारी से ग्रस्त है। इससे गांव में पशु पालकों में दहशत का माहौल है। प्राइवेट से लेकर सरकारी चिकित्सकों से उपचार करा रहे हैं, लेकिन आराम बहुत कम मिल रहा है। अब दहशत के चलते लोग अपने घरों के बाहर और पशुओं के नीचे बीमारी से बचाव के लिए चूना डाल रहे हैं। पशु पालकों ने पशु चिकित्सा विभाग पर आरोप लगा रहे है कि सूचना देने के बाद भी खुरपका-मुंहपका टीकाकरण नहीं किया। इसी रोग से मवेशियों की मौत हो रही है। सैकड़ों अभी बीमारी से ग्रस्त हैं। पशु पालक और किसान सुभाष नैन ने कहा कि पशुओं की मौत से ग्रामीण चिंता में है। अभी तक छोटे बड़े 29 पशुओं की मौत हो चुकी है। उनके मवेशी बीमार है। गांव के सुधीर, विनोद, कोमिल, विकास, सत्यवीर, रामे, सचिन ने पशु पालन विभाग से गांव में पशु जांच अभियान चलाकर बीमार पशुओं का इलाज करने की मांग।
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मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (सीवीओ) डॉ, राजपाल सिंह ने कहा ग्रामीणों का आरोप गलत है। टीम निरंतर गांव में पहुंचकर पशुओं का उपचार कर रही है। अभी तक 500-600 का उपचार किया जा चुका है। खुरपका-मुंहपका रोग नहीं है। फुट रोट रोग और टीक फीवर से मवेशियों की मौत हो रही है। टीकाकरण के दौरान टीम का कोई सहयोग नहीं करते हैं। टीके लगाने से साफ इंकार कर देते है। इसी कारण बीमारी बढ़ रही है। लोगों को डरने की जरूरत नही है। जल्द अभियान चलाकर उपचार होगा।
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इन लोगों के मवेशियों की हुई मौत
नंदू, धर्मपाल की गाय, अनिल की दो पशु, अशोक, रणधीर की भैंस, सत्यवीर का भैंसा, बिल्लू के दो मवेशी की मौत हो चुकी है। वहीं चिकित्सक ने अनिल के पशु को मौत हो जाएगी की पुष्टी कर दी है। इसके अलावा दर्जनों पशु पालकों के सैकड़ों पशु बीमार हैं।
पशुओं को टीक फीवर (चिचड़ी के काटने) से भी मौत के प्रकरण सामने आ रहे है। पशुओं के शरीर पर टीक (चिचड़ी) हो होती है। जो शरीर का खून चुसती है। शरीर में अपना जहर छोड़ देती है। जिससे तेज बुखार आ जाता है। इससे मवेशियों की मौत हो रही है।
होम्योपैथिक दवा ‘वीरूनीलम’ की दो-दो बूंद
बागपत। पशु रोग विशेषज्ञ एवं टटीरी नगर पंचायत चेयरमैन डॉ. विनोद कुमार ने बताया कि इस मौसम में पशु रोगों की चपेट में आ जाते है। सरूरपुर कलां गांव में पशुओं की फुट रोट रोग से मौत हो रही है, वह होम्योपैथिक दवा ‘वीरूनीलम’ की दो-दो बूंद मवेशियों को पिलाए। स्वस्थ पशुओं को भी दवा दें। इससे वायरस की चपेट में नहीं जाएंगे। जो पशु बीमार है उन्हें स्वस्थ पशुओं से अलग बांधने की सलाह दी है।