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कामयाबी के आसमान पर जुगाड़ चालक की बेटी तनिशा
Updated Mon, 30 Apr 2018 01:44 AM IST
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बागपत। होनहारों के दम पर कंडेरा गांव ने दुनिया में अपनी पहचान बनाई है। देश को आईएएस और आईपीएस देने वाले गांव के जुगाड़ चालक की बेटी तनिशा ने जिले की मेरिट में प्रथम स्थान हासिल किया। बेटी को इंजीनियरिंग का इम्तिहान दिलाने गए पिता बेहद खुश हैं, कहते हैं कि बच्चे ही उनका भविष्य हैं। बच्चों की चाह है कि वह भी गांव का नाम देश में रोशन करें।
असल में कंडेरा ऐसा गांव हैं, जहां शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासनिक, सेना और पुलिस सेवा में बड़ी संख्या में लोग हैं। इसी गांव की एक बेटी ने फिर से कामयाबी का परचम लहरा दिया। जुगाड़ चालक यशवीर तोमर की बेटी तनिशा ने इंटर की मेरिट में संयुक्त रूप से अंजलि के साथ मिलकर पहला स्थान हासिल किया। जिस वक्त रिजल्ट आया, तब तनिशा मेरठ में यूपीटीयू की परीक्षा दे रही थी। बाहर निकलकर नतीजे देखें तो पिता-पुत्री की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वह कहती हैं कि नियमित रूप से पढ़ाई के कारण उसे कामयाबी मिली। उसके पास पर्सनल फोन नहीं है। सोशल मीडिया से दूर रही। मनोरंजन के लिए टीवी और बैडमिंटन खेलती थी। इंजीनियर बनने की चाह रखने वाली तनिशा कहती है कि पिता और परिवार का सपना पूरा करना चाहती हैं। कामयाबी में मां मीनू तोमर भी प्रेरणा बनकर खड़ी रही।
पिता ने कहा, बेटियां ही सब कुछ
बागपत। जुगाड़ चालक यशवीर तोमर का कहना है कि उसके लिए बेटियां ही सब कुछ हैं। उसके हिस्से में करीब दो बीघा जमीन थी, करीब चार साल पहले आर्थिक तंगी के कारण जमीन बेचनी पड़ी थी। पहले वह बसों पर प्राइवेट चालक था, लेकिन वर्तमान समय में बिराल से गांव तक जुगाड़ चलाकर परिवार का पालन पोषण करता हूं।
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असल में कंडेरा ऐसा गांव हैं, जहां शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासनिक, सेना और पुलिस सेवा में बड़ी संख्या में लोग हैं। इसी गांव की एक बेटी ने फिर से कामयाबी का परचम लहरा दिया। जुगाड़ चालक यशवीर तोमर की बेटी तनिशा ने इंटर की मेरिट में संयुक्त रूप से अंजलि के साथ मिलकर पहला स्थान हासिल किया। जिस वक्त रिजल्ट आया, तब तनिशा मेरठ में यूपीटीयू की परीक्षा दे रही थी। बाहर निकलकर नतीजे देखें तो पिता-पुत्री की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वह कहती हैं कि नियमित रूप से पढ़ाई के कारण उसे कामयाबी मिली। उसके पास पर्सनल फोन नहीं है। सोशल मीडिया से दूर रही। मनोरंजन के लिए टीवी और बैडमिंटन खेलती थी। इंजीनियर बनने की चाह रखने वाली तनिशा कहती है कि पिता और परिवार का सपना पूरा करना चाहती हैं। कामयाबी में मां मीनू तोमर भी प्रेरणा बनकर खड़ी रही।
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पिता ने कहा, बेटियां ही सब कुछ
बागपत। जुगाड़ चालक यशवीर तोमर का कहना है कि उसके लिए बेटियां ही सब कुछ हैं। उसके हिस्से में करीब दो बीघा जमीन थी, करीब चार साल पहले आर्थिक तंगी के कारण जमीन बेचनी पड़ी थी। पहले वह बसों पर प्राइवेट चालक था, लेकिन वर्तमान समय में बिराल से गांव तक जुगाड़ चलाकर परिवार का पालन पोषण करता हूं।
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