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जुड़वां बहनों के जुनून से कामयाबी की गाथा लिखी
Updated Mon, 30 Apr 2018 01:44 AM IST
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बागपत। फखरपुर गांव के शिक्षक अशोक तेवतिया के घर में खुशियां है। जुड़वां बेटियों के जुनून ने कामयाबी की गाथा लिख दी। मानसी चौधरी ने 91.67 प्रतिशत अंक हासिल कर दसवीं में दूसरा स्थान हासिल किया, जबकि उसकी बहन मानवी ने 88.67 प्रतिशत अंक हासिल किए। दोनों ही जी कुनेड़ो और बैडमिंटन की नेशनल स्तर की प्रतियोगिता में प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। जुड़वा बेटियों की मां शामली में शिक्षक है, इसलिए दोनों बहनें पिता और दादी के साथ गांव में रह कर पढ़ाई करती हैं।
फखरपुर निवासी अशोक तेवतिया सेंट मेरी स्कूल, रटौल में फिजिकल एजूकेशन के शिक्षक हैं। उनकी पत्नी पूनम देवी शामली के मोहम्मदपुर राई स्थित स्कूल में शिक्षक है। पूनम शामली में रहती है और अशोक फखरपुर में। शिक्षक दंपति की जुड़वां बेटी मानसी और मानवी चौधरी ने दसवीं के नतीजों में कामयाबी की गाथा लिख दी। मानसी जिले की मेरिट में दूसरे स्थान पर है, सिर्फ दो अंक से वह जिला टॉप करने से चूक गई। मानवी ने भी अच्छे अंक हासिल किए हैं। दोनों बहनों मां से दूर अपने पिता और दादी जसबीरी देवी के साथ रहती है। कामयाबी इसलिए बड़ी है, क्योंकि दोनों रोजाना घर का सारा कामकाज निपटाकर पिता के साथ सेंट मैरी स्कूल में पढ़ने जाती थी। स्कूल से लौटकर घर का कामकाज करने के बाद पढ़ाई करती थी। दोनों बहनें आईएएस बनना चाहती है। विज्ञान वर्ग से पढ़ाई के लिए एडमीशन ले लिया है। कहती हैं कि टीवी और सोशल मीडिया बुरी चीज नहीं है, लेकिन इनका इस्तेमाल जरूरत के हिसाब से ही करना चाहिए। करीब आठ घंटे की नियमित पढ़ाई से दोनों जुड़वा बहनों ने कामयाबी हासिल की। दोनों बहने बैडमिंटन और जी कुनेडो की नेशनल स्तर की प्रतियोगिता में प्रदेश का प्रतिनिधित्व भी कर चुकी है।
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फखरपुर निवासी अशोक तेवतिया सेंट मेरी स्कूल, रटौल में फिजिकल एजूकेशन के शिक्षक हैं। उनकी पत्नी पूनम देवी शामली के मोहम्मदपुर राई स्थित स्कूल में शिक्षक है। पूनम शामली में रहती है और अशोक फखरपुर में। शिक्षक दंपति की जुड़वां बेटी मानसी और मानवी चौधरी ने दसवीं के नतीजों में कामयाबी की गाथा लिख दी। मानसी जिले की मेरिट में दूसरे स्थान पर है, सिर्फ दो अंक से वह जिला टॉप करने से चूक गई। मानवी ने भी अच्छे अंक हासिल किए हैं। दोनों बहनों मां से दूर अपने पिता और दादी जसबीरी देवी के साथ रहती है। कामयाबी इसलिए बड़ी है, क्योंकि दोनों रोजाना घर का सारा कामकाज निपटाकर पिता के साथ सेंट मैरी स्कूल में पढ़ने जाती थी। स्कूल से लौटकर घर का कामकाज करने के बाद पढ़ाई करती थी। दोनों बहनें आईएएस बनना चाहती है। विज्ञान वर्ग से पढ़ाई के लिए एडमीशन ले लिया है। कहती हैं कि टीवी और सोशल मीडिया बुरी चीज नहीं है, लेकिन इनका इस्तेमाल जरूरत के हिसाब से ही करना चाहिए। करीब आठ घंटे की नियमित पढ़ाई से दोनों जुड़वा बहनों ने कामयाबी हासिल की। दोनों बहने बैडमिंटन और जी कुनेडो की नेशनल स्तर की प्रतियोगिता में प्रदेश का प्रतिनिधित्व भी कर चुकी है।
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