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दोघट के बामनौली में भी फैली खुरपका-मूंहपका बीमारी
Updated Fri, 30 Mar 2018 12:31 AM IST
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दोघट (बागपत)। कस्बा दोघट के बाद बामनौली गांव में पशुओं में खुरपका-मुंहपका बीमारी फैल गई है। पशु चिकित्सकों की टीम दोघट और बामनौली में डेरा डाले हैं, लेकिन अभी तक बीमारी पर अंकुश नहीं लग सका है। विभागीय अफसरों ने आशंका जताई है कि आवारा पशुओं से खुरपका-मुंहपका बीमारी फैली है।
दोघट कस्बे में अब तक खुरपका-मुंहपका बीमारी से 16 पशुओं की मौत हो चुकी है। अब यह बीमारी बामनौली गांव में भी फैल गई है, जहां सैकड़ों पशु बीमारी से ग्रसित हैं। दोनों ही गांवों में पशु चिकित्सकों की टीम गांव में डेरा डाले हैं और पशुओं का इलाज कर रही है, लेकिन अभी तक बीमारी पर कंट्रोल नहीं हो सका है। पशु पालक ओमवीर, पदम, सतेंद्र,, सतपाल, कुलजीत आदि ने कहा दोघट पशु चिकित्सालय पर पशु चिकित्सक नहीं आते, जिस कारण ग्रामीणों को झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज कराना पड़ता है। इनके द्वारा पशुओं का सही इलाज नहीं किया जाता है। इन झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजपाल सिंह ने बताया कि दोनों गांवों में पशु चिकित्सकों की टीम लगाई हुई है। बीमारी पर पूर्ण रूप से कंट्रोल कर लिया गया है। उन्होंने आशंका जताई कि खुरपका-मुंहपका बीमारी आवारा पशुओं के माध्यम से फैली है क्योंकि पहले यह बीमारी आवारा पशुओं में फैली थी। आवारा पशुओं में इस बीमारी का टीकाकरण नहीं किया जाता।
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दोघट कस्बे में अब तक खुरपका-मुंहपका बीमारी से 16 पशुओं की मौत हो चुकी है। अब यह बीमारी बामनौली गांव में भी फैल गई है, जहां सैकड़ों पशु बीमारी से ग्रसित हैं। दोनों ही गांवों में पशु चिकित्सकों की टीम गांव में डेरा डाले हैं और पशुओं का इलाज कर रही है, लेकिन अभी तक बीमारी पर कंट्रोल नहीं हो सका है। पशु पालक ओमवीर, पदम, सतेंद्र,, सतपाल, कुलजीत आदि ने कहा दोघट पशु चिकित्सालय पर पशु चिकित्सक नहीं आते, जिस कारण ग्रामीणों को झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज कराना पड़ता है। इनके द्वारा पशुओं का सही इलाज नहीं किया जाता है। इन झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
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मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजपाल सिंह ने बताया कि दोनों गांवों में पशु चिकित्सकों की टीम लगाई हुई है। बीमारी पर पूर्ण रूप से कंट्रोल कर लिया गया है। उन्होंने आशंका जताई कि खुरपका-मुंहपका बीमारी आवारा पशुओं के माध्यम से फैली है क्योंकि पहले यह बीमारी आवारा पशुओं में फैली थी। आवारा पशुओं में इस बीमारी का टीकाकरण नहीं किया जाता।
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