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सिनौली में 13 साल बाद फिर शुरू हुआ उत्खनन कार्य
Updated Wed, 21 Feb 2018 01:09 AM IST
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बड़ौत/बिनौली (बागपत)।
भारतीय पुरातत्व संस्थान और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा बरनावा लाक्षागृह पर उत्खनन मंगलवार को भी जारी रहा। वहीं सिनौली गांव में 13 साल बाद उत्खनन शुरू किया गया है। उधर चंदायन में भी उत्खनन का कार्य शीघ्र शुरू होने की संभावना है।
उल्लेखनीय है कि एएसआई के अधिकारियों के निर्देशन में कई दर्जन कर्मचारी बरनावा मेें उत्खनन कर रहे हैं। यहां मिट्टी से बनी कुछ महत्वपूर्ण पोटरियां व मृदभांड के अवशेष मिल चुके हैं, जिन्हें सुरक्षित जगहों पर रखा गया है। कई दिनों से दिल्ली से आया छात्रों का एक दल यहां उत्खनन की जानकारी जुटा रहा है और उत्खनन मेें लगे कर्मचारियों व मजदूरों का सहयोग कर रहा है।
उधर 13 साल बाद सिनौली गांव मेें एक बार फिर उत्खनन शुरू कर दिया गया है। 2005 में सिनौली में उत्खनन किया गया था, जो पांच माह बाद रोक दिया गया था। उस समय वहां विश्व का सबसे बड़ा हडप्पाकालीन शवाधान केंद्र मिला था, यहां पर डेढ सौ कंकाल मिले थे। शहजाद राय शोध संस्थान के अमित राय जैन ने बताया कि सिनौली मेें उत्खनन के दौरान हड़प्पाकालीन मृदभांड ताम्र युग के कई शस्त्र मिले थे। अब उत्खनन का कार्य पुन: शुरू हो जाने से यहां और जानकारी मिल सकेगी। उन्होंने बताया कि चंदायन गांव में भी उत्खनन दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। वहां पर प्राचीन कालीन सभ्यताओं की जानकारी मिल सकेगी और शीघ्र वहां पर भी उत्खनन का कार्य शुरू होगा।
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भारतीय पुरातत्व संस्थान और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा बरनावा लाक्षागृह पर उत्खनन मंगलवार को भी जारी रहा। वहीं सिनौली गांव में 13 साल बाद उत्खनन शुरू किया गया है। उधर चंदायन में भी उत्खनन का कार्य शीघ्र शुरू होने की संभावना है।
उल्लेखनीय है कि एएसआई के अधिकारियों के निर्देशन में कई दर्जन कर्मचारी बरनावा मेें उत्खनन कर रहे हैं। यहां मिट्टी से बनी कुछ महत्वपूर्ण पोटरियां व मृदभांड के अवशेष मिल चुके हैं, जिन्हें सुरक्षित जगहों पर रखा गया है। कई दिनों से दिल्ली से आया छात्रों का एक दल यहां उत्खनन की जानकारी जुटा रहा है और उत्खनन मेें लगे कर्मचारियों व मजदूरों का सहयोग कर रहा है।
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उधर 13 साल बाद सिनौली गांव मेें एक बार फिर उत्खनन शुरू कर दिया गया है। 2005 में सिनौली में उत्खनन किया गया था, जो पांच माह बाद रोक दिया गया था। उस समय वहां विश्व का सबसे बड़ा हडप्पाकालीन शवाधान केंद्र मिला था, यहां पर डेढ सौ कंकाल मिले थे। शहजाद राय शोध संस्थान के अमित राय जैन ने बताया कि सिनौली मेें उत्खनन के दौरान हड़प्पाकालीन मृदभांड ताम्र युग के कई शस्त्र मिले थे। अब उत्खनन का कार्य पुन: शुरू हो जाने से यहां और जानकारी मिल सकेगी। उन्होंने बताया कि चंदायन गांव में भी उत्खनन दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। वहां पर प्राचीन कालीन सभ्यताओं की जानकारी मिल सकेगी और शीघ्र वहां पर भी उत्खनन का कार्य शुरू होगा।
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