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कर्मचारियों की नियुक्त में फर्जीवाड़े की होगी जांच
Updated Sat, 05 Aug 2017 12:48 AM IST
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कर्मचारियों की नियुक्त में फर्जीवाड़े की होगी जांच
बागपत। समेकित बाल संरक्षण योजना (आईसीपीएस) के तहत हुई कर्मचारियों की नियुक्त के फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। किशोर न्याय बोर्ड के प्रधान मजिस्ट्रेट लक्की सिंह ने इस पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उनकी गैर मौजूदगी में नियुक्ति की गई है। उन्होंने डीएम को मामले की जांच करने के आदेश दिए हैं। बाल अधिकार संरक्षण कार्यकर्ता एडवोकेट पवन तिवारी ने बताया कि इस योजना के सेवाप्रदाता का चयन वर्ष 2016 में हुआ था। डीएम की अध्यक्षता में नामित सदस्यों ने सेवा प्रदाता नव चेतना सर्विस प्रोवाइडिंग बागपत के माध्यम से 14 लोगों की नियुक्त की थी। तिवारी का कहना है कि नियुक्ति में अनियमितता का आरोप लगाते हुए डीएम से लेकर राष्ट्रपति तक लिखित शिकायत की थी। इस पर चयन समिति के सदस्य प्रधान मजिस्ट्रेट किशोर न्याय बोर्ड लक्की सिंह ने संज्ञान लिया। उन्होंने कहा कि नियुक्त के समय वे उपस्थित नहीं थे, न ही किसी साक्षात्कार में उपस्थित थे। चयन सूची में भी उनके हस्ताक्षर नहीं है, और न ही उनके द्वारा किसी सदस्य को नामित किया गया था। तिवारी का कहना है कि प्रधान मजिस्ट्रेट ने नियुक्त कर्मचारियों के मूल्यांकन के लिए होने वाली समीक्षा मीटिंग को भी स्थगित कर दिया है।
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बागपत। समेकित बाल संरक्षण योजना (आईसीपीएस) के तहत हुई कर्मचारियों की नियुक्त के फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। किशोर न्याय बोर्ड के प्रधान मजिस्ट्रेट लक्की सिंह ने इस पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उनकी गैर मौजूदगी में नियुक्ति की गई है। उन्होंने डीएम को मामले की जांच करने के आदेश दिए हैं। बाल अधिकार संरक्षण कार्यकर्ता एडवोकेट पवन तिवारी ने बताया कि इस योजना के सेवाप्रदाता का चयन वर्ष 2016 में हुआ था। डीएम की अध्यक्षता में नामित सदस्यों ने सेवा प्रदाता नव चेतना सर्विस प्रोवाइडिंग बागपत के माध्यम से 14 लोगों की नियुक्त की थी। तिवारी का कहना है कि नियुक्ति में अनियमितता का आरोप लगाते हुए डीएम से लेकर राष्ट्रपति तक लिखित शिकायत की थी। इस पर चयन समिति के सदस्य प्रधान मजिस्ट्रेट किशोर न्याय बोर्ड लक्की सिंह ने संज्ञान लिया। उन्होंने कहा कि नियुक्त के समय वे उपस्थित नहीं थे, न ही किसी साक्षात्कार में उपस्थित थे। चयन सूची में भी उनके हस्ताक्षर नहीं है, और न ही उनके द्वारा किसी सदस्य को नामित किया गया था। तिवारी का कहना है कि प्रधान मजिस्ट्रेट ने नियुक्त कर्मचारियों के मूल्यांकन के लिए होने वाली समीक्षा मीटिंग को भी स्थगित कर दिया है।