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आधुनिकता के इस दौर में गुरुकुलों में संस्कारयुक्त शिक्षा दी जा रही है
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बिनौली (बागपत)। बरनावा के ज्ञान सागर गुरुकुल के नवीन भूमि स्थल पर मंगलवार को भूमि शुद्धि के अवसर पर आयोजित समारोह में जैन संत आचार्य वसुनंदी महाराज ने कहा कि आधुनिकता के इस दौर में गुरुकुलों में संस्कारयुक्त शिक्षा दी जा रही है।
आचार्य वसुंनंदी महाराज ने ज्ञान सागर गुरुकुल के नवीन भूमि स्थल पर मंत्रोच्चारण के साथ भूमि शुद्धि की क्रियाएं सम्पन्न कराई। इसके उपरांत गुरुकुल परिसर में समारोह आयोजित हुआ। जिसमें गुरुकुल के बच्चों ने मंगलाचरण, स्वागत गीत, गुरुभक्ति गीत, मातृ, पितृ भक्ति से ओतप्रोत सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इस अवसर पर हुईं धर्मसभा में जैन संत आचार्य वसुनंदी महाराज ने कहा कि शिक्षा धनार्जन के लिए नहीं मानव कल्याण के लिए होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बरनावा के ज्ञान सागर गुरुकुल में ब्रह्मचारी अतुल भैया के निर्देशन में देश के विभिन्न प्रांतों के बेसहारा, निर्धन बच्चों को संस्कारयुक्त शिक्षा दी जा रही है। यहां शिक्षा धनार्जन के लिए नहीं मानव कल्याण के लिए दी जा रही है। पुण्य कार्यों में अपनी आय से दान करना सबसे महान कार्य है। उन्होंने कहा कि गुरुकुलों से शिक्षा ग्रहण करने वाली प्रतिभाए समाज व राष्ट्र निर्माण में सहायक सिद्ध हो रही हैं। समारोह में आए अतिथियों का ब्रह्मचारी अतुल भैया ने स्मृति चिह्न व शाल भेंटकर सम्मानित कर किया। समारोह का संचालन नवनीत जैन ने किया। इस अवसर पर रविंद्र जैन, मामचंद जैन, राकेश जैन, गौतमचंद जैन, श्रवण जैन, चंद्रकांत कुलश्रेष्ठ, नीरज जैन, अमित जैन, साहिल जैन, विकास जैन, संकल्प जैन, मुकेश जैन, धनपाल बैसला, मनोज जैन, क्षितिज आदि मौजूद रहे।
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आचार्य वसुंनंदी महाराज ने ज्ञान सागर गुरुकुल के नवीन भूमि स्थल पर मंत्रोच्चारण के साथ भूमि शुद्धि की क्रियाएं सम्पन्न कराई। इसके उपरांत गुरुकुल परिसर में समारोह आयोजित हुआ। जिसमें गुरुकुल के बच्चों ने मंगलाचरण, स्वागत गीत, गुरुभक्ति गीत, मातृ, पितृ भक्ति से ओतप्रोत सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इस अवसर पर हुईं धर्मसभा में जैन संत आचार्य वसुनंदी महाराज ने कहा कि शिक्षा धनार्जन के लिए नहीं मानव कल्याण के लिए होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बरनावा के ज्ञान सागर गुरुकुल में ब्रह्मचारी अतुल भैया के निर्देशन में देश के विभिन्न प्रांतों के बेसहारा, निर्धन बच्चों को संस्कारयुक्त शिक्षा दी जा रही है। यहां शिक्षा धनार्जन के लिए नहीं मानव कल्याण के लिए दी जा रही है। पुण्य कार्यों में अपनी आय से दान करना सबसे महान कार्य है। उन्होंने कहा कि गुरुकुलों से शिक्षा ग्रहण करने वाली प्रतिभाए समाज व राष्ट्र निर्माण में सहायक सिद्ध हो रही हैं। समारोह में आए अतिथियों का ब्रह्मचारी अतुल भैया ने स्मृति चिह्न व शाल भेंटकर सम्मानित कर किया। समारोह का संचालन नवनीत जैन ने किया। इस अवसर पर रविंद्र जैन, मामचंद जैन, राकेश जैन, गौतमचंद जैन, श्रवण जैन, चंद्रकांत कुलश्रेष्ठ, नीरज जैन, अमित जैन, साहिल जैन, विकास जैन, संकल्प जैन, मुकेश जैन, धनपाल बैसला, मनोज जैन, क्षितिज आदि मौजूद रहे।
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