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राजीव हत्याकांड में एक अभियुक्त को आजीवन करावास
Updated Sat, 28 Apr 2018 01:32 AM IST
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बागपत। जिला एवं सत्र न्यायाधीश उपेंद्र कुमार ने सिलाना के राजीव की अपहरण के बाद हत्या करने के मामले में एक अभियुक्त को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। एक अभियुक्त को दोष मुक्त कर दिया है। इस मामले में एक अभियुक्त फरार है।
शासकीय अधिवक्ता सुनील पंवार एवं वादी के अधिवक्ता कंवर पाल सिंह ने बताया कि छपरौली थाना क्षेत्र के सिलाना गांव निवासी राजीव पुत्र श्याम सिंह की नौ साल पहले अपहरण के बाद हत्या की। इस मामले में राजू उर्फ राजीव पुत्र रामपाल, लोकेश पुत्र धर्मपाल निवासी गांव मोहम्मद राज सिंह थाना बुढ़ाना जनपद मुजफ्फरनगर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई । बाद में रमाला थाना क्षेत्र के फतेहपुर गांव निवासी सुनील पुत्र सुखवीर का नाम प्रकाश में आया । पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। दो माह बाद रमाला पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ अपहरण, हत्या और साक्ष्य छिपाने का आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया । यह मामला जिला न्यायालय बागपत में चल रहा था। अभियोजन पक्ष की तरफ से 10 गवाह पेश किए । अभियुक्त लोकेश मुकदमे के दौरान पहले ही फरार हो गया। शुक्रवार को मामले में सुनवाई हुई। राजू उर्फ राजीव पर अपहरण, हत्या व साक्ष्य छिपाने का दोष सिद्ध हो गया, जबकि सुनील को दोषमुक्त कर दिया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश उपेंद्र कुमार ने अभियुक्त राजू उर्फ राजीव को धारा 302 आईपीसी में आजीवन कारावास की सजा सुनाई और 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। अपहरण की धारा 364 में सात साल और 10 हजार रुपये एवं साक्ष्य छिपाने की धारा 201 में तीन साल की सजा व पांच हजार रुपये के अर्थदंड दंडित किया। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
यह था मामला
बागपत। छपरौली थाना क्षेत्र के सिलाना गांव निवासी राजीव पुत्र श्याम सिंह को राजू उर्फ राजीव पुत्र रामपाल, लोकेश पुत्र धर्मपाल निवासी गांव मोहम्मद राज सिंह थाना बुढ़ाना जनपद मुजफ्फरनगर 17 जुलाई 2007 को घर से सहारनपुर के बिहारीगढ़ में प्लाट खरीदने के लिए ले गए थे। राजीव घर से एक लाख रुपये लेकर गया । जब राजीव घर नहीं लौटा तो परिजनों ने दोनों से पूछा तो वे कोई सही जवाब नहीं दे पाए। परिजनों ने दोनों पर हत्या करने का शक जाहिर की। इस संबंध में राजीव की बहन कविता ने 26 अगस्त 2007 को छपरौली थाने पर राजू उर्फ राजीव और लोकेश के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई । 27 अगस्त 2007 को पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उन्होंने राजीव की हत्या करना कबूल करते हुए पुलिस को बताया था कि उन्होंने रमाला थाना क्षेत्र के फतेहपुर गांव निवासी सुनील पुत्र सुखवीर को भी बिहारीगढ़ बुला लिया था। 22 जुलाई 2007 की रात में एक लाख रुपये के लिए तीनों ने मिलकर फतेहपुर गांव के जंगल में राजीव की हत्या कर दी थी। पुलिस ने राजू व लोकेश की निशानदेही पर रमाला थाने के फतेहपुर गांव से राजीव का कंकाल, पेंट और चप्पल बरामद की थी।
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शासकीय अधिवक्ता सुनील पंवार एवं वादी के अधिवक्ता कंवर पाल सिंह ने बताया कि छपरौली थाना क्षेत्र के सिलाना गांव निवासी राजीव पुत्र श्याम सिंह की नौ साल पहले अपहरण के बाद हत्या की। इस मामले में राजू उर्फ राजीव पुत्र रामपाल, लोकेश पुत्र धर्मपाल निवासी गांव मोहम्मद राज सिंह थाना बुढ़ाना जनपद मुजफ्फरनगर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई । बाद में रमाला थाना क्षेत्र के फतेहपुर गांव निवासी सुनील पुत्र सुखवीर का नाम प्रकाश में आया । पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। दो माह बाद रमाला पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ अपहरण, हत्या और साक्ष्य छिपाने का आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया । यह मामला जिला न्यायालय बागपत में चल रहा था। अभियोजन पक्ष की तरफ से 10 गवाह पेश किए । अभियुक्त लोकेश मुकदमे के दौरान पहले ही फरार हो गया। शुक्रवार को मामले में सुनवाई हुई। राजू उर्फ राजीव पर अपहरण, हत्या व साक्ष्य छिपाने का दोष सिद्ध हो गया, जबकि सुनील को दोषमुक्त कर दिया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश उपेंद्र कुमार ने अभियुक्त राजू उर्फ राजीव को धारा 302 आईपीसी में आजीवन कारावास की सजा सुनाई और 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। अपहरण की धारा 364 में सात साल और 10 हजार रुपये एवं साक्ष्य छिपाने की धारा 201 में तीन साल की सजा व पांच हजार रुपये के अर्थदंड दंडित किया। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
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यह था मामला
बागपत। छपरौली थाना क्षेत्र के सिलाना गांव निवासी राजीव पुत्र श्याम सिंह को राजू उर्फ राजीव पुत्र रामपाल, लोकेश पुत्र धर्मपाल निवासी गांव मोहम्मद राज सिंह थाना बुढ़ाना जनपद मुजफ्फरनगर 17 जुलाई 2007 को घर से सहारनपुर के बिहारीगढ़ में प्लाट खरीदने के लिए ले गए थे। राजीव घर से एक लाख रुपये लेकर गया । जब राजीव घर नहीं लौटा तो परिजनों ने दोनों से पूछा तो वे कोई सही जवाब नहीं दे पाए। परिजनों ने दोनों पर हत्या करने का शक जाहिर की। इस संबंध में राजीव की बहन कविता ने 26 अगस्त 2007 को छपरौली थाने पर राजू उर्फ राजीव और लोकेश के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई । 27 अगस्त 2007 को पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उन्होंने राजीव की हत्या करना कबूल करते हुए पुलिस को बताया था कि उन्होंने रमाला थाना क्षेत्र के फतेहपुर गांव निवासी सुनील पुत्र सुखवीर को भी बिहारीगढ़ बुला लिया था। 22 जुलाई 2007 की रात में एक लाख रुपये के लिए तीनों ने मिलकर फतेहपुर गांव के जंगल में राजीव की हत्या कर दी थी। पुलिस ने राजू व लोकेश की निशानदेही पर रमाला थाने के फतेहपुर गांव से राजीव का कंकाल, पेंट और चप्पल बरामद की थी।
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