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अंधेरी दुनिया में अंकुर धामा की कामयाबी का उजाला
Updated Mon, 02 Apr 2018 01:24 AM IST
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बागपत। दिव्यांग एथलीट अंकुर धामा ने एक बार फिर कामयाबी हासिल की है। इस बार खेल के मैदान पर नहीं, बल्कि पढ़ाई के दम पर अपना लोहा मनवाया। आईबीपीएस की ओर से आयोजित होने वाली पीओ की परीक्षा में अंकुर धामा ने सफलता हासिल की। यूनियन बैंक में स्कैल वन की श्रेणी के अधिकारी के लिए उसका चयन हुआ है।
इच्छाशक्ति से बड़ी कोई ताकत नहीं होती। एक बार फिर इस बात को साबित कर दिखाया है पैरा एथलीट अंकुर धामा ने। खेल के मैदान पर ओलंपिक तक का सफर तय कर चुके अंकुर ने इस बार शिक्षा और परीक्षा के क्षेत्र में बाजी मारी। अंकुर के भाई गौरव धामा ने बताया कि 26 नवंबर को बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (आईबीपीएस) की ओर से परीक्षा का आयोजन किया गया था। परीक्षा में उत्तीर्ण होने के बाद 30 जनवरी को इंटरव्यू हुए। रविवार को नतीजे घोषित किए । पैरा एथलीट अंकुर धामा का चयन दिल्ली स्थित यूनियन बैंक में स्कैन वन अधिकारी के पद पर हो गया है। धामा का चयन उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो संसाधनों का रोना रोते हैं। मुश्किलों में अपनी नाकामी छिपाने का प्रयास करते हैं। दोनों आंखें गंवा चुके अंकुर ने कामयाबी की नई इबारत लिखी है।
शून्य से शिखर पर यूं बढ़ा दिलेर
बागपत। भाई गौरव धामा ने बताया कि बचपन में ही अंकुर की आंखों की रोशनी चली गई थी। उसका दाखिला दिल्ली के लोदी रोड स्थित जेपीएम सीनियर सेकेंडरी स्कूल फॉर ब्लाइंड में करवा गया। इसी समय से अंकुर को स्पोर्ट्स से लगाव हो गया और जल्द ही वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमक उठा।
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धामा बन गया पहला ब्लाइंड एथलीट
बागपत। वर्ष 2016 के पैरालंपिक में भाग लेने वाले अंकुर पहले ब्लाइंड एथलीट बने, लेकिन 1500 मीटर की स्पर्धा में दूसरे स्थान पर रहने के बावजूद वे फाइनल क्वालीफाई करने में नाकाम रहे। 2009 में अंकुर ने वर्ल्ड यूथ ऐंड स्टूडेंट चैंपियनशिप में दो गोल्ड मेडल जीते थे।
गड़बड़ी हुई, लेकिन हिम्मत नहीं हारी
बागपत। ब्राजील के रियो डि जेनेरियो में 15 सौ मीटर हीट्स से अंकुर धामा बाहर हो गया था। असल में भारतीय एथलीट अंकुर धामा के गाइड विपिन को धक्का दे दिया गया था। वीडियो से सच खुला तो पैरा ओलंपिक कमेटी ने तीन घंटे बाद इस पर आपत्ति दाखिल भी कर दी थी, लेकिन आयोजक कमेटी का कहना था कि आपत्ति केवल 30 मिनट बाद ही दर्ज कराई जानी चाहिए थी।
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इच्छाशक्ति से बड़ी कोई ताकत नहीं होती। एक बार फिर इस बात को साबित कर दिखाया है पैरा एथलीट अंकुर धामा ने। खेल के मैदान पर ओलंपिक तक का सफर तय कर चुके अंकुर ने इस बार शिक्षा और परीक्षा के क्षेत्र में बाजी मारी। अंकुर के भाई गौरव धामा ने बताया कि 26 नवंबर को बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (आईबीपीएस) की ओर से परीक्षा का आयोजन किया गया था। परीक्षा में उत्तीर्ण होने के बाद 30 जनवरी को इंटरव्यू हुए। रविवार को नतीजे घोषित किए । पैरा एथलीट अंकुर धामा का चयन दिल्ली स्थित यूनियन बैंक में स्कैन वन अधिकारी के पद पर हो गया है। धामा का चयन उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो संसाधनों का रोना रोते हैं। मुश्किलों में अपनी नाकामी छिपाने का प्रयास करते हैं। दोनों आंखें गंवा चुके अंकुर ने कामयाबी की नई इबारत लिखी है।
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शून्य से शिखर पर यूं बढ़ा दिलेर
बागपत। भाई गौरव धामा ने बताया कि बचपन में ही अंकुर की आंखों की रोशनी चली गई थी। उसका दाखिला दिल्ली के लोदी रोड स्थित जेपीएम सीनियर सेकेंडरी स्कूल फॉर ब्लाइंड में करवा गया। इसी समय से अंकुर को स्पोर्ट्स से लगाव हो गया और जल्द ही वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमक उठा।
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धामा बन गया पहला ब्लाइंड एथलीट
बागपत। वर्ष 2016 के पैरालंपिक में भाग लेने वाले अंकुर पहले ब्लाइंड एथलीट बने, लेकिन 1500 मीटर की स्पर्धा में दूसरे स्थान पर रहने के बावजूद वे फाइनल क्वालीफाई करने में नाकाम रहे। 2009 में अंकुर ने वर्ल्ड यूथ ऐंड स्टूडेंट चैंपियनशिप में दो गोल्ड मेडल जीते थे।
गड़बड़ी हुई, लेकिन हिम्मत नहीं हारी
बागपत। ब्राजील के रियो डि जेनेरियो में 15 सौ मीटर हीट्स से अंकुर धामा बाहर हो गया था। असल में भारतीय एथलीट अंकुर धामा के गाइड विपिन को धक्का दे दिया गया था। वीडियो से सच खुला तो पैरा ओलंपिक कमेटी ने तीन घंटे बाद इस पर आपत्ति दाखिल भी कर दी थी, लेकिन आयोजक कमेटी का कहना था कि आपत्ति केवल 30 मिनट बाद ही दर्ज कराई जानी चाहिए थी।