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बिना कनेक्शन बिल भेजने पर डीएम समेत नौ को नोटिस
Updated Sun, 04 Feb 2018 01:33 AM IST
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बागपत। बाम गांव के एक ग्रामीण को बगैर बिजली कनेक्शन के बिजली बिल भेजने के मामले में जनपद न्यायालय में रिवीजन दाखिल किया गया। जनपद न्यायाधीश ने डीएम, एक्सईन और एसडीओ समेत नौ अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। सुनवाई के लिए 27 फरवरी की तिथि तय की गई है।
विद्युत निगम की ओर से रमाला क्षेत्र के बाम गांव निवासी अश्वनी कुमार पुत्र सलेक चंद के घर हजारों रुपये का बिजली बिल कई माह पहले भेज दिया गया था। ग्रामीण का कहना था कि उसने कनेक्शन ही नहीं लिया। पीड़ित ने विद्युत निगम के अधिकारियों के चक्कर काटे लेकिन समाधान नहीं हुआ। अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता पवन तिवारी ने बताया कि प्रार्थना पत्र मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में दाखिल किया गया, जिसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद रिवीजन जनपद न्यायाधीश की कोर्ट में दाखिल किया गया। जनपद न्यायालय ने रिवीजन को स्वीकार करते हुए अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। डीएम, एक्सईन, एसडीओ, जेई, क्लर्क समेत नौ अधिकारियों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं।
आरटीआई लगाने पर कनेक्शन का खुलासा
वादी अश्वनी कुमार का कहना है कि बिल मिलने के बाद ही उसके नाम कनेक्शन होने की जानकारी हुई। जांच के बाद अधिकारियों ने उसे लिखित में दिया कि उसके नाम कोई कनेक्शन नहीं है। लेकिन अधिवक्ता के माध्यम से आरटीआई लगाई गई तो उसमें जानकारी दी गई कि उसके नाम कनेक्शन है। वह पैरवी करने लगा तो उसके नाम बिल भेजे जाने लगे। न्यायालय में उसने न्याय की गुहार लगाई है।
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विद्युत निगम की ओर से रमाला क्षेत्र के बाम गांव निवासी अश्वनी कुमार पुत्र सलेक चंद के घर हजारों रुपये का बिजली बिल कई माह पहले भेज दिया गया था। ग्रामीण का कहना था कि उसने कनेक्शन ही नहीं लिया। पीड़ित ने विद्युत निगम के अधिकारियों के चक्कर काटे लेकिन समाधान नहीं हुआ। अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता पवन तिवारी ने बताया कि प्रार्थना पत्र मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में दाखिल किया गया, जिसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद रिवीजन जनपद न्यायाधीश की कोर्ट में दाखिल किया गया। जनपद न्यायालय ने रिवीजन को स्वीकार करते हुए अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। डीएम, एक्सईन, एसडीओ, जेई, क्लर्क समेत नौ अधिकारियों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं।
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आरटीआई लगाने पर कनेक्शन का खुलासा
वादी अश्वनी कुमार का कहना है कि बिल मिलने के बाद ही उसके नाम कनेक्शन होने की जानकारी हुई। जांच के बाद अधिकारियों ने उसे लिखित में दिया कि उसके नाम कोई कनेक्शन नहीं है। लेकिन अधिवक्ता के माध्यम से आरटीआई लगाई गई तो उसमें जानकारी दी गई कि उसके नाम कनेक्शन है। वह पैरवी करने लगा तो उसके नाम बिल भेजे जाने लगे। न्यायालय में उसने न्याय की गुहार लगाई है।
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