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177 रुपये की दिहाड़ी पर नहीं मिलते मजदूर
Updated Wed, 31 Jan 2018 01:29 AM IST
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बागपत। सीडीओ चांदनी सिंह ने मनरेगा के लिए बजट न बढ़ाने के लिए आयुक्त ग्राम्य विकास को पत्र लिखा है। तर्क दिया गया है कि यहां तय मजदूरी पर मजदूर नहीं मिल रहे हैं। दिल्ली-हरियाणा में यहां से अधिक मजदूरी मिलती है और मजदूर वहीं चले जाते हैं। इसे देखते हुए बजट बढ़ाना सही नहीं है।
मनरेगा के तहत तालाबों की खुदाई कराने के लिए आयुक्त ग्राम्य विकास ने सीडीओ को पत्र जारी कर 2018-19 के लिए मुख्य बजट 272.397 लाख से बढ़ाकर 1.5 गुणा करने के निर्देश दिए थे। सीडीओ चांदनी सिंह ने आयुक्त को अवगत कराया कि मजदूर न मिलने के कारण बजट नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। तालाब की खुदाई मजदूरों से नहीं कराई जा सकती है क्योंकि गंदगी और कीचड़ के कारण मजदूरों से यह संभव नहीं है।
उन्होंने भ्रमण के दौरान फीडबैक लिया है कि श्रमिक योजना के अंतर्गत निर्धारित दर 175 रुपये पर कार्य नहीं करना चाहते। पंजीकरण अभियान में भी कोई उत्साह नहीं मिला। उन्होंने बताया कि हरियाणा और दिल्ली में 350 से 500 रुपये तक की मजदूरी मिलती है। भट्ठों पर भी ज्यादा मजदूरी पड़ जाती है। अकुशल श्रमिकों के लिए कृषि क्षेत्र में पर्याप्त रोजगार के अवसर है। अधिकतर मजदूर अपने गांव में ही कार्य करते हैं। पशुओं के चारा और दोपहर तक का भोजन भी कृषक श्रमिकों को उपलब्ध कराते हैं। इस स्थिति को देखते हुए 1.5 गुणा बजट को नहीं बढ़ाया जाए। अनुरोध किया मनरेगा के केवल 272.397 लाख रुपये का ही लेबर बजट प्रस्तुत कराया जाए।
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मनरेगा के तहत तालाबों की खुदाई कराने के लिए आयुक्त ग्राम्य विकास ने सीडीओ को पत्र जारी कर 2018-19 के लिए मुख्य बजट 272.397 लाख से बढ़ाकर 1.5 गुणा करने के निर्देश दिए थे। सीडीओ चांदनी सिंह ने आयुक्त को अवगत कराया कि मजदूर न मिलने के कारण बजट नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। तालाब की खुदाई मजदूरों से नहीं कराई जा सकती है क्योंकि गंदगी और कीचड़ के कारण मजदूरों से यह संभव नहीं है।
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उन्होंने भ्रमण के दौरान फीडबैक लिया है कि श्रमिक योजना के अंतर्गत निर्धारित दर 175 रुपये पर कार्य नहीं करना चाहते। पंजीकरण अभियान में भी कोई उत्साह नहीं मिला। उन्होंने बताया कि हरियाणा और दिल्ली में 350 से 500 रुपये तक की मजदूरी मिलती है। भट्ठों पर भी ज्यादा मजदूरी पड़ जाती है। अकुशल श्रमिकों के लिए कृषि क्षेत्र में पर्याप्त रोजगार के अवसर है। अधिकतर मजदूर अपने गांव में ही कार्य करते हैं। पशुओं के चारा और दोपहर तक का भोजन भी कृषक श्रमिकों को उपलब्ध कराते हैं। इस स्थिति को देखते हुए 1.5 गुणा बजट को नहीं बढ़ाया जाए। अनुरोध किया मनरेगा के केवल 272.397 लाख रुपये का ही लेबर बजट प्रस्तुत कराया जाए।
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