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180 किमी के गड्ढ़ों के लिए 12 करोड़
Updated Thu, 31 Aug 2017 01:20 AM IST
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बागपत। दिल्ली-सहारनपुर हाईवे के गड्ढों से तुरंत राहत दिलाने के नाम पर 12 करोड़ रुपये का बजट तैयार किया गया है। सवाल हैं कि 180 किमी के इस हाईवे के गड्ढे इतनी कम धनराशि में कैसे भरे जा सकेंगे। निर्माण कब शुरू होगा, इस पर भी अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
गाजियाबाद से लेकर सहारनपुर में उत्तराखंड बार्डर तक करीब 206 किमी की दूरी है। उपशा के प्रबंधक अतुल कुमार बताते हैं कि दो बाईपास हटाकर यह दूरी करीब 180 किमी बैठती है। गाजियाबाद के मंडोला गांव और बागपत के गौरीपुर मोड़ समेत पूरे हाईवे को गड्ढा मुक्त कराने के लिए शासन ने सिर्फ 12.66 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी। उपशा इस धनराशि से यहां काम कराएगा। सवाल है कि आखिर इतनी कम धनराशि में गड्ढे कैसे भरे जा सकेंगे। उधर, यूपी सरकार हाईवे को लेकर एनओसी दे चुकी है, जबकि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने अभी इसकी फाइल को स्वीकृति नहीं दी । हाईवे का निर्माण कब होगा, यह सवाल बाकी है। अभी केवल गड्ढे भरने की ही प्रक्रिया चल रही है। उपशा प्रबंधक कहते हैं कि प्रक्रिया चल रही है, इसमें अभी समय लगेगा।
आंदोलन का खाका तैयार
बागपत। समाजसेवी एवं पूर्व सैनिक सुभाष चंद कश्यप ने कहा दिल्ली-सहारनपुर हाईवे निर्माण के लिए गौरीपुर मोड़ पर धरना दिया जाएगा। प्रशासन जब तक निर्माण नहीं कराएगा, वह धरने से नहीं उठेंगे। जल्द ही वह गौरीपुर मोड़ के टी-प्वाइंट पर बैठकर हाईवे निर्माण की मांग करेंगे। हाईवे पर गड्ढे होने के कारण क्षेत्रीय लोगों का जीना मुश्किल हो चुका है, आए दिन हादसे हो रहे हैं। हाईवे निर्माण को लेकर जिला प्रशासन का रवैया बेहद खराब है।
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बागपत से बड़ौत तक गड्ढे ही गड्ढे
बागपत। दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर गड्ढे ही गड्ढे हैं। मंडोला से बागपत तक लाखो लोग दुखी हैं। इसी तरह बागपत से बड़ौत तक हाईवे की स्थिति बेहद खराब है। इस दौरान वाहन चलाना मुश्किल है। इस कारण आए दिन दो पहिया वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। इसी हिस्से में सिसाना, गौरीपुर मोड़, सरूरपुर कलां और ट्यौढी के लोग मुसीबत झेल रहे हैं। लोगों का कहना है कि आखिर सरकार कब जागेगी, वह बड़ी परेशानी में है।
किसने क्या कहा
सिसाना के अजय कुमार का कहना है कि हाईवे से सटे गांव के लोगों की जिंदगी अस्त-व्यस्त हो गई है। हाईवे का निर्माण होना चाहिए।
निवाड़ा के डॉ. वकील अहमद के अनुसार हाईवे पर गंदगी होने से क्षेत्र में बीमारी फैल रही है। प्रशासन से कई मांग कर चुके हैं, समस्या हल नहीं हुई।
गौरीपुर जवाहर नगर के रोहित चौहान ने कहा हाईवे पर बने गड्ढे क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या है, लेकिन कोई जनप्रतिनिधि ध्यान नहीं दे रहा है।
सरूरपुर कलां के तेजपाल सिंह ने कहा क्षेत्र के लोग हाईवे निर्माण के लिए आंदोलन तक कर चुके हैं, लेकिन समस्या का हल नहीं हुआ।
बड़ौत के नफीस ने कहा हाईवे के खराब होने के लिए सरकार की जवाब देही है। सरकार को प्राथमिकता से हाईवे निर्माण का निर्णय लेना चाहिए
सरूरपुर कलां में तोड़ दिए थे घर
बागपत। जिला प्र्रशासन ने गांव सरूरपुर कलां में हाईवे निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण करने के दौरान करीब 20 घर तोड़ दिए थे। इस कारण गांव के 20 से अधिक परिवार बेघर हो गए, लेकिन अभी तक हाईवे का निर्माण नहीं हुआ। ग्रामीणों ने कहा प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर ग्रामीणों के घर तोड़े, लोगों ने जनहित को ध्यान में रखकर बड़ा विरोध नहीं किया, लेकिन इसके बाद भी हाईवे का निर्माण नहीं हुआ।
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गाजियाबाद से लेकर सहारनपुर में उत्तराखंड बार्डर तक करीब 206 किमी की दूरी है। उपशा के प्रबंधक अतुल कुमार बताते हैं कि दो बाईपास हटाकर यह दूरी करीब 180 किमी बैठती है। गाजियाबाद के मंडोला गांव और बागपत के गौरीपुर मोड़ समेत पूरे हाईवे को गड्ढा मुक्त कराने के लिए शासन ने सिर्फ 12.66 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी। उपशा इस धनराशि से यहां काम कराएगा। सवाल है कि आखिर इतनी कम धनराशि में गड्ढे कैसे भरे जा सकेंगे। उधर, यूपी सरकार हाईवे को लेकर एनओसी दे चुकी है, जबकि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने अभी इसकी फाइल को स्वीकृति नहीं दी । हाईवे का निर्माण कब होगा, यह सवाल बाकी है। अभी केवल गड्ढे भरने की ही प्रक्रिया चल रही है। उपशा प्रबंधक कहते हैं कि प्रक्रिया चल रही है, इसमें अभी समय लगेगा।
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आंदोलन का खाका तैयार
बागपत। समाजसेवी एवं पूर्व सैनिक सुभाष चंद कश्यप ने कहा दिल्ली-सहारनपुर हाईवे निर्माण के लिए गौरीपुर मोड़ पर धरना दिया जाएगा। प्रशासन जब तक निर्माण नहीं कराएगा, वह धरने से नहीं उठेंगे। जल्द ही वह गौरीपुर मोड़ के टी-प्वाइंट पर बैठकर हाईवे निर्माण की मांग करेंगे। हाईवे पर गड्ढे होने के कारण क्षेत्रीय लोगों का जीना मुश्किल हो चुका है, आए दिन हादसे हो रहे हैं। हाईवे निर्माण को लेकर जिला प्रशासन का रवैया बेहद खराब है।
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बागपत से बड़ौत तक गड्ढे ही गड्ढे
बागपत। दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर गड्ढे ही गड्ढे हैं। मंडोला से बागपत तक लाखो लोग दुखी हैं। इसी तरह बागपत से बड़ौत तक हाईवे की स्थिति बेहद खराब है। इस दौरान वाहन चलाना मुश्किल है। इस कारण आए दिन दो पहिया वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। इसी हिस्से में सिसाना, गौरीपुर मोड़, सरूरपुर कलां और ट्यौढी के लोग मुसीबत झेल रहे हैं। लोगों का कहना है कि आखिर सरकार कब जागेगी, वह बड़ी परेशानी में है।
किसने क्या कहा
सिसाना के अजय कुमार का कहना है कि हाईवे से सटे गांव के लोगों की जिंदगी अस्त-व्यस्त हो गई है। हाईवे का निर्माण होना चाहिए।
निवाड़ा के डॉ. वकील अहमद के अनुसार हाईवे पर गंदगी होने से क्षेत्र में बीमारी फैल रही है। प्रशासन से कई मांग कर चुके हैं, समस्या हल नहीं हुई।
गौरीपुर जवाहर नगर के रोहित चौहान ने कहा हाईवे पर बने गड्ढे क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या है, लेकिन कोई जनप्रतिनिधि ध्यान नहीं दे रहा है।
सरूरपुर कलां के तेजपाल सिंह ने कहा क्षेत्र के लोग हाईवे निर्माण के लिए आंदोलन तक कर चुके हैं, लेकिन समस्या का हल नहीं हुआ।
बड़ौत के नफीस ने कहा हाईवे के खराब होने के लिए सरकार की जवाब देही है। सरकार को प्राथमिकता से हाईवे निर्माण का निर्णय लेना चाहिए
सरूरपुर कलां में तोड़ दिए थे घर
बागपत। जिला प्र्रशासन ने गांव सरूरपुर कलां में हाईवे निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण करने के दौरान करीब 20 घर तोड़ दिए थे। इस कारण गांव के 20 से अधिक परिवार बेघर हो गए, लेकिन अभी तक हाईवे का निर्माण नहीं हुआ। ग्रामीणों ने कहा प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर ग्रामीणों के घर तोड़े, लोगों ने जनहित को ध्यान में रखकर बड़ा विरोध नहीं किया, लेकिन इसके बाद भी हाईवे का निर्माण नहीं हुआ।