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लाखों कांविड़ए, इनका नाम सिर्फ भोला
Updated Thu, 20 Jul 2017 01:07 AM IST
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लाखों कांविड़ए, इनका नाम सिर्फ भोला
बड़ौत। श्रद्धा के पथ पर बढ़े चले जा रहे कांवड़ियों की संख्या लाखों में है, लेकिन नाम सिर्फ एक। एक दूसरे को यात्रा के दौरान कांवड़िए सिर्फ भोले के संबोधन से ही पुकार रहे हैं।
सावन में कांवड़ मेले से पहले और बाद में भले ही इन कांवड़ियों को अंकित, सुरेश, दीपक और सुनील के नाम से पुकारा जाता है, लेकिन यात्रा के दौरान भोला ही नाम ही इन लाखों शिवभक्तों की पहचान है। हर तरफ बोल बम बम-बम के जयघोष लग रहे हैं। भोले के नाम पर उमड़े शिवभक्तों की पहचान भी सिर्फ भोला है। अलग-अलग जनपदों व राज्यों से एक साथ आने वाले कांवड़िये एक-दूसरे का सिर्फ भोले के नाम से जानते और पहचानते हैं। कांवड़ मार्ग पर दुकानदार, ड्राइवर, पुलिसकर्मी भी कांवड़ियों को भोला कहकर बुलाते हैं।
कांधे पर कांवड़, पैरों में घुंघरू
बड़ौत। शिव के भक्त शिवालयों की ओर बढ़े चले जा रहे हैं। पैरों में बंधे घुंघरू से संगीतमयी धुन भी निकल रही है। बोल बम के जयकारों के साथ कांवड़ियों का काफिला बढ़ रहा है। शिव के जयघोष और घुंघरू की झंकार से मनभावन संगीत निकल रहा है। इससे माहौल शिवमय है।
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कांवड़ियों के घर में मांगी जा रही मन्नतें
बड़ौत। श्रद्धालुओं के कांधे पर कांवड़ है। शिव की राह पर निकले इन कांवड़ियों के घर में भी यात्रा पूरी होने तक परहेज किए जाते हैं। इनके घर पर दाल, सब्जी में छौंक तक नहीं लगता। बताते हैं कि तवे पर रोटी को फूलने तक नहीं दिया जाता। कांवड़ियों के लिए भी शेविंग, चमड़े की वस्तुएं, साबुन, तेल, कंघे के साथ कुर्सी, चरपाई, पलंग पर बैठना निषेध माना जाता है।
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बड़ौत। श्रद्धा के पथ पर बढ़े चले जा रहे कांवड़ियों की संख्या लाखों में है, लेकिन नाम सिर्फ एक। एक दूसरे को यात्रा के दौरान कांवड़िए सिर्फ भोले के संबोधन से ही पुकार रहे हैं।
सावन में कांवड़ मेले से पहले और बाद में भले ही इन कांवड़ियों को अंकित, सुरेश, दीपक और सुनील के नाम से पुकारा जाता है, लेकिन यात्रा के दौरान भोला ही नाम ही इन लाखों शिवभक्तों की पहचान है। हर तरफ बोल बम बम-बम के जयघोष लग रहे हैं। भोले के नाम पर उमड़े शिवभक्तों की पहचान भी सिर्फ भोला है। अलग-अलग जनपदों व राज्यों से एक साथ आने वाले कांवड़िये एक-दूसरे का सिर्फ भोले के नाम से जानते और पहचानते हैं। कांवड़ मार्ग पर दुकानदार, ड्राइवर, पुलिसकर्मी भी कांवड़ियों को भोला कहकर बुलाते हैं।
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कांधे पर कांवड़, पैरों में घुंघरू
बड़ौत। शिव के भक्त शिवालयों की ओर बढ़े चले जा रहे हैं। पैरों में बंधे घुंघरू से संगीतमयी धुन भी निकल रही है। बोल बम के जयकारों के साथ कांवड़ियों का काफिला बढ़ रहा है। शिव के जयघोष और घुंघरू की झंकार से मनभावन संगीत निकल रहा है। इससे माहौल शिवमय है।
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कांवड़ियों के घर में मांगी जा रही मन्नतें
बड़ौत। श्रद्धालुओं के कांधे पर कांवड़ है। शिव की राह पर निकले इन कांवड़ियों के घर में भी यात्रा पूरी होने तक परहेज किए जाते हैं। इनके घर पर दाल, सब्जी में छौंक तक नहीं लगता। बताते हैं कि तवे पर रोटी को फूलने तक नहीं दिया जाता। कांवड़ियों के लिए भी शेविंग, चमड़े की वस्तुएं, साबुन, तेल, कंघे के साथ कुर्सी, चरपाई, पलंग पर बैठना निषेध माना जाता है।