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बूंदाबांदी से सिनौली में हुआ उत्खनन कार्य बंद

Sun, 03 Mar 2019 01:11 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 03 Mar 2019 01:11 AM IST
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बूंदाबांदी से सिनौली में हुआ उत्खनन कार्य बंद
बड़ौत (बागपत)।
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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण उत्खनन शाखा द्वितीय एवं भारतीय पुरातत्व संस्थान लाल किला दिल्ली द्वारा संयुक्त रूप से सिनौली में प्रथम और द्वितीय चरण के बाद तृतीय चरण में उत्खनन कार्य शनिवार को बूंदाबांदी के चलते बंद रहा।
उल्लेखनीय है कि 15 जनवरी से सिनौली मेें तृतीय चरण का उत्खनन कार्य शुरू हुआ। एक माह से अधिक का समय हो चुका है। इस अवधि में यहां से मानव बस्ती के प्रमाण मिल चुकी है। इसके अलावा ईंटों की विशाल दीवार, दुर्लभ पॉटरी के साथ-साथ एक ट्रेंच से मानव कंकाल प्राप्त हुआ, यह महिला का कंकाल है और इसके कानों से स्वर्ण आभूषण भी प्राप्त हुए हैं। इस महिला को बाहर निकालकर टीम को एक शाही ताबूत भी मिला। संभावना जताई जा रही है कि यह महिला का कंकाल 4500 वर्ष पुराना है और किसी रायल परिवार से है। पिछलें 25 दिन में अब यहां पर राजेंद्र व श्रीराम के खेत में एक-एक विशाल दीवारें निकल चुकी है, जबकि श्रीराम के खेत में एक कंकाल शोधार्थियों को पिछले कई दिन से दिखाई दे रहा है, अब फिलहाल एक ट्रेंच पर शोधार्थियों को मिट्टी की भट्ठी दिखाई दे रही है, इसके पास सावधानी से उत्खनन कार्य किया जा रहा है। उधर उत्खनन के दौरान एक धनुष निकलने की बात कहीं जा रही है, हालांकि अभी तक किसी ने इसकी पुष्टि नहीं की है। वहीं शनिवार को बूंदाबांदी के चलते उत्खनन कार्य बंद रहा। इस संबंध में एएसआई लालकिला संस्थान के निदेशक डॉ. संजय मंजुल ने कहा बूंदाबांदी के चलते उत्खनन कार्य बंद रहा। बताया कि शोधार्थियों को उत्खनन कार्य के बारे में बताया।
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वर्ष 2005 मेें प्रथम चरण की हुई थी खुदाई
बड़ौत। वर्ष 2005 में सिनौली में वरिष्ठ पुरातत्वविद डॉ. डीवी शर्मा के निर्देशन में एएसआई द्वारा प्रथम चरण की खुदाई कराई। यहां पर 177 मानव कंकाल, सोने के कंगन, मनके, तलवार के साथ-साथ एक विशाल शवाधान केंद्र की पुष्टि हुई । इसके बाद 15 फरवरी 2018 को सिनौली साइट पर एएसआई लालकिला संस्थान के निदेशक डॉ. संजय मंजुल के निर्देशन में लगभग साढ़े तीन माह तक उत्खनन हुआ। आठ मानव कंकाल, तीन एंटीना सोर्ड यानी तलवारें, काफी संख्या में मृदभांड, विभिन्न दुर्लभ पत्थरों के मनके, सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्राप्ति के रूप मेें पांच हजार साल प्राचीन मानव योद्धाओं के तीन ताबूत तांबे से सुसज्जित, भारतीय योद्धाओं के तीन रथ प्राप्त हुए, जो इतिहास की दुर्लभ घटना साबित हुई।
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