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जनपद में एक साल में बढ़ गए 3000 मनोरोगी

Sat, 09 Oct 2021 11:27 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 09 Oct 2021 11:27 PM IST
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3000 psychopaths increased in one year in the district
बड़ौत। कोविड महामारी के कारण मानसिक परेशानी से संबंधित रोगियों की संख्या बढ़ रही है। हैरानी की बात यह है कि जनपद में गत एक साल में ही 3000 मानसिक रोगी बढ़ गए है। सबसे ज्यादा मानसिक रोगी पिलाना ब्लाक, फिर बड़ौत शहर सहित उसे जुडे़ क्षेत्र। इसके बाद बागपत कस्बे से मरीज मनोरोग चिकित्सकों के पास पहुंच रहे है।
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जिला अस्पताल के मनोरोग चिकित्सक डॉ. अजय कुमार के अनुसार गत दो वर्षों से कोरोना काल के प्रभाव के चलते इस वर्ष तकरीबन 3000 मानसिक रोगी बढ़े है। गत वर्ष जनपद में 6000 मानसिक रोगी थेे, जबकि इस वर्ष अब तक 9000 से अधिक मानसिक रोगी सामने आ चुके है। बताया कि सबसे ज्यादा मानसिक रोगी पिलाना ब्लाक से आ रहे है। यहां से गुजरने वाली नदी के प्रदूषित पानी से भी लोग बीमार पड़ रहे है। कई माह से डौचला, मवीकलां खुर्द, पूरा महादेव, बालैनी क्षेत्र में भी मरोरोगी बढे़ है। बताया कि दूसरे नंबर पर बड़ौत शहर व उससे जुड़े कंडेरा, रमाला, जिवाना, कासिमपुर खेडी, बावली, सहित अन्य गांव शामिल है। तीसरे नंबर पर बागपत शहर है। उन्होंने बताया कि यदि किसी को मानसिक बीमारी है तो उसे तनाव को नियंत्रित करना होगा। नियमित चिकित्सा पर ध्यान देना होगा, पर्याप्त नींद लेनी होगी। समस्या से ग्रसित व्यक्ति पौष्टिक आहार लें व नियमित व्यायाम करें।
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कई प्रकार के मनोरोग
मानसिक रोग कई प्रकार के होते है। इनमें डिमेंशिया, डिस्लेक्सिया, डिप्रेशन, तनाव, चिंता, कमजोर याददाश्त, बाइपोलर डिसआर्डर, अल्जाइमर रोग, भूलने की बीमारी आदि शामिल हैं। मानसिक बीमारी के लक्षण अत्यधिक भय व चिंता होना, थकान और सोने में समस्या होना, वास्तविकता से अलग हटना, दैनिक समस्याओं से निपटने में असमर्थ होना, समस्याओं और लोगों के बारे में समझने में समस्या होना, शराब व नशीली दवाओं का सेवन, हद से ज्यादा क्रोधित होना आदि है।
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मानसिक रोगी को अकेला न छोड़े
नोडल अधिकारी मानसिक रोग कार्यक्रम डॉ. अजेंद्र मलिक के अनुसार जो लोग डिप्रेशन या अवसाद में जी रहे हैं। उन्हें अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। अकेले में रहने के दौरान डिप्रेशन और अवसाद के चलते आत्महत्या तक का विचार मन में आ सकता है।
कोरोना कॉल में यह रहे मनोरोग बढ़ने के कारण
- कोरोना काल में जॉब छूट जाना।
- कोरोना काल में कई महीनों तक मकान में रहकर समय गुजारना।
- परिचित व परिवार के सदस्य का निधन होना।
- कोरोना काल में जॉब के दौरान समय सीमा में अत्यधिक काम देना।
- व्यापार बंद व नुकसान का आकलन बढ़ जाना।
ये है डिप्रेशन के लक्षण
- घबराहट होना, भूख न लगना
- नींद न आना, अकेले रहने का मन करना
- मन में बुरे ख्याल आना, काम न मन न लगना
- मन में खुदकशी के विचार आना
ऐसे पाएं नियंत्रण
- घर में अकेले न रहें और खुद व्यस्त रखें
- आठ से दस घंटे की नींद लें
- किसी भी नशीले पदार्थ का सेवन न करे।
- ज्यादा समय परिवार के साथ बिताएं।
- यदि कोई बात मन को परेशान कर रही है तो परिवार के लोगों से बातचीत करें।
- चिकित्सक को बीमारी बताने में संकोच न करें।
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