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दो अभियुक्तों को दस-दस साल की सजा
Updated Fri, 11 May 2018 01:04 AM IST
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बागपत। बिनौली थाना क्षेत्र के रंछाड़ गांव में सात साल पहले दलित युवक जानलेवा हमले के मामले में दो अभियुक्तों को दस-दस साल की सजा सुनाई गई है। स्पेशल जज रमेश चंद दिवाकर ने फैसला सुनाया।
एडीजीसी चश्मवीर सिंह ने बताया कि रंछाड़ गांव निवासी दलित युवक मितेश पुत्र बीरा का गांव के ही अनुज पुत्र जगत के साथ 14 फरवरी 2011 को झगड़ा हो गया था। 15 फरवरी की सुबह मितेश खेत में शौच करने जा रहा था तो अनुज समेत तीन युवकों ने उस पर जानलेवा हमला किया । गोली लगने से मितेश घायल हो गया। बचाव में आए रामबीर के साथ भी मारपीट की । इससे उसका हाथ टूट गया था। 12 फरवरी 2011 को मितेश के भाई सतीश ने बिनौली थाने में अनुज पुत्र जगत, बिट्टू पुत्र सहदेव निवासी रंछाड़ और विकास पुत्र इंद्रपाल निवासी माजरा जनपद मुजफ्फरनगर के खिलाफ धारा 307 आईपीसी व एससी/एसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज कराया । इस मामले में पुलिस ने अनुज और विकास के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। पुलिस ने बिट्टू को पहले ही क्लीन चिट दे दी । यह मामला स्पेशल कोर्ट एससी/एसटी एक्ट में विचाराधीन था। अभियोजन पक्ष की तरफ से अदालत में छह गवाह पेश किए। बृहस्पतिवार को मामले में सुनवाई हुई। स्पेशल जज रमेश चंद दिवाकर ने अनुज और विकास को दोषी मानकर धारा 307 में दोनों को 10-10 साल की सुजा एवं पांच-पांच हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया । अर्थदंड की राशि जमा न करने पर एक-एक साल की अधिक सजा काटनी पड़ेगी।
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एडीजीसी चश्मवीर सिंह ने बताया कि रंछाड़ गांव निवासी दलित युवक मितेश पुत्र बीरा का गांव के ही अनुज पुत्र जगत के साथ 14 फरवरी 2011 को झगड़ा हो गया था। 15 फरवरी की सुबह मितेश खेत में शौच करने जा रहा था तो अनुज समेत तीन युवकों ने उस पर जानलेवा हमला किया । गोली लगने से मितेश घायल हो गया। बचाव में आए रामबीर के साथ भी मारपीट की । इससे उसका हाथ टूट गया था। 12 फरवरी 2011 को मितेश के भाई सतीश ने बिनौली थाने में अनुज पुत्र जगत, बिट्टू पुत्र सहदेव निवासी रंछाड़ और विकास पुत्र इंद्रपाल निवासी माजरा जनपद मुजफ्फरनगर के खिलाफ धारा 307 आईपीसी व एससी/एसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज कराया । इस मामले में पुलिस ने अनुज और विकास के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। पुलिस ने बिट्टू को पहले ही क्लीन चिट दे दी । यह मामला स्पेशल कोर्ट एससी/एसटी एक्ट में विचाराधीन था। अभियोजन पक्ष की तरफ से अदालत में छह गवाह पेश किए। बृहस्पतिवार को मामले में सुनवाई हुई। स्पेशल जज रमेश चंद दिवाकर ने अनुज और विकास को दोषी मानकर धारा 307 में दोनों को 10-10 साल की सुजा एवं पांच-पांच हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया । अर्थदंड की राशि जमा न करने पर एक-एक साल की अधिक सजा काटनी पड़ेगी।
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