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होली को प्राचीन काल की तरह मनाएं
Updated Tue, 27 Feb 2018 12:44 AM IST
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बड़ौत (बागपत)। रेलवे रोड स्थित आर्य समाज मंदिर में यज्ञ हुआ। इस मौके पर प्रीतम सिंह वर्मा ने कहा प्राचीन काल में होली पर राजा और प्रजा मिलकर यज्ञ करते थे। इस दिवस को होलिका कहते हैं। इसका अभिप्राय प्रवृति की पूजा होती थी। प्रजा एकत्र होकर होली के दिवस पर प्रभु की प्रार्थना करते थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान में हरे पेड़ काटकर होली का दहन किया जा रहा है, जो वातावरण को लगातार प्रदूषित कर रहा है। दुल्हैडी के दिन प्रदूषित रंगों को प्रयुक्त जीवन के साथ खिलवाड किया जा रहा है। मिठाई में जहर होता है, हमें होली को प्राचीन की तरह मनाना चाहिए । यज्ञ के ब्रह्मा समर भानु रहे और यज्ञमान मित्रमुनि रहे। यज्ञ में डॉ. ओमवीर सिंह, सत्यपाल पथौलिया, राधेश्याम, डॉ. हरपाल सिंह, अर्पित, विनोद भारद्वाज, राज कुमार, जसवीर मलिक, रामबीर आदि रहे।