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गल्हैता के ग्रामीण पेयजल के लिए परेशान
Updated Thu, 15 Feb 2018 01:28 AM IST
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बागपत। हिंडन और कृष्णा नदी के पास बसे गल्हैता गांव के ग्रामीण शुद्ध पेयजल के लिए परेशान हैं। एनजीटी के आदेश पर हैंडपंप गांव से उखाड़े जा चुके हैं, लेकिन यहां पर पेयजल की आपूर्ति का कोई इंतजाम नहीं किया। प्रधान और ग्रामीण केंद्रीय मंत्री से शिकायत कर चुके हैं। ओवर हेड टैंक के निर्माण के आदेश हो चुके हैं, लेकिन बजट नहीं होने के कारण निर्माण कार्य अभी धरातल पर शुरू नहीं हो सका है।
कृष्णा और हिंडन नदी के क्षेत्र में भूगर्भ जल अब विषैला हो गया है। लोग कैंसर जैसे जानलेवा बीमारी की चपेट में हैं। गल्हैता समेत अन्य गांवों में बीमारियों से लोगों की जान जा चुकी है। पिछले वर्ष यहां हैंडपंपों के पानी की जांच हुई तो नमूने फेल हो गए। इसके बाद एनजीटी के आदेश के बाद प्रशासन ने गांव के अधिकतर हैंडपंपों को उखड़वा दिया। गल्हैता के प्रधान विपिन त्यागी ने बताया कि गांव में पिछले साल तक 150-170 हैंडपंप थे, इनमें अधिकतर को एनजीटी ने उखड़वा दिया है। अब केवल 10 से 20 हैंडपंप से ही पानी का आपूर्ति हो रही है। यही नहीं प्रशासन की ओर से इन पर भी लाल निशान लगाए हुए हैं। ग्राम प्रधान ने बताया कई बार प्रशासन के लोगों को गांव की इस ज्वलंत समस्या से अवगत करा चुके हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। केंद्रीय मानव विकास संसाधन राज्यमंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह की पहल पर गांव में जल निगम ने पाइप पेयजल योजना से ओवरहेड टैंक के निर्माण की कार्ययोजना तैयार की, सभी स्टीमेट तो बनाकर इसे स्वीकृति भी मिल गई। लेकिन आज तक यहां काम शुरू नहीं हुआ है। ग्रामीण पेयजल की समस्या से जूझ रहे हैं।
15-20 लोगों की कैंसर से हो चुकी है मौत
बागपत। पिछले कुछ सालों में दूषित पानी के कारण गांव में 15-20 लोगों की कैंसर से हो चुकी है मौत हो चुकी है। काफी संख्या में लोग इससे पीड़ित है। अन्य बीमारियां भी पैर पसारती जा रही है।
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योजना स्वीकृत हुई, लेकिन धनराशि नहीं मिली
बागपत। निर्माण खंड जल निगम के अधिशासी अभियंता ने प्रधान को पत्र के माध्यम से अवगत कराया कि टंकी के लिए योजना गांव में स्वीकृत हो गई है, लेकिन धनराशि आवंटित नहीं हुई है। यही वजह है कि गांव में ओवर हेड टैंक का निर्माण कार्य लटका है।
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कृष्णा और हिंडन नदी के क्षेत्र में भूगर्भ जल अब विषैला हो गया है। लोग कैंसर जैसे जानलेवा बीमारी की चपेट में हैं। गल्हैता समेत अन्य गांवों में बीमारियों से लोगों की जान जा चुकी है। पिछले वर्ष यहां हैंडपंपों के पानी की जांच हुई तो नमूने फेल हो गए। इसके बाद एनजीटी के आदेश के बाद प्रशासन ने गांव के अधिकतर हैंडपंपों को उखड़वा दिया। गल्हैता के प्रधान विपिन त्यागी ने बताया कि गांव में पिछले साल तक 150-170 हैंडपंप थे, इनमें अधिकतर को एनजीटी ने उखड़वा दिया है। अब केवल 10 से 20 हैंडपंप से ही पानी का आपूर्ति हो रही है। यही नहीं प्रशासन की ओर से इन पर भी लाल निशान लगाए हुए हैं। ग्राम प्रधान ने बताया कई बार प्रशासन के लोगों को गांव की इस ज्वलंत समस्या से अवगत करा चुके हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। केंद्रीय मानव विकास संसाधन राज्यमंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह की पहल पर गांव में जल निगम ने पाइप पेयजल योजना से ओवरहेड टैंक के निर्माण की कार्ययोजना तैयार की, सभी स्टीमेट तो बनाकर इसे स्वीकृति भी मिल गई। लेकिन आज तक यहां काम शुरू नहीं हुआ है। ग्रामीण पेयजल की समस्या से जूझ रहे हैं।
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15-20 लोगों की कैंसर से हो चुकी है मौत
बागपत। पिछले कुछ सालों में दूषित पानी के कारण गांव में 15-20 लोगों की कैंसर से हो चुकी है मौत हो चुकी है। काफी संख्या में लोग इससे पीड़ित है। अन्य बीमारियां भी पैर पसारती जा रही है।
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योजना स्वीकृत हुई, लेकिन धनराशि नहीं मिली
बागपत। निर्माण खंड जल निगम के अधिशासी अभियंता ने प्रधान को पत्र के माध्यम से अवगत कराया कि टंकी के लिए योजना गांव में स्वीकृत हो गई है, लेकिन धनराशि आवंटित नहीं हुई है। यही वजह है कि गांव में ओवर हेड टैंक का निर्माण कार्य लटका है।