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11 नियुक्तियों को निरस्त कराने को हाईकोर्ट में की जनहित याचिका दायर
Updated Sun, 04 Feb 2018 01:28 AM IST
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बागपत। जिले में समेकित बाल विकास योजना के तहत 2016 में हुई 11 नियुक्तियों में धांधली की शिकायत की गई थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने पर बाल अधिकार संरक्षण कार्यरत एडवोकेट पवन तिवारी नियुक्तियां निरस्त कराने को हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की। साथ ही नियुक्तियों की फाइल न दिखाने पर जिला बाल संरक्षण अधिकारी को सूचना आयोग ने तलब किया है।
2016 में समेकित बाल विकास योजना (आईसीपीएस) के तहत जिले में बाल संरक्षण अधिकारी, विधि सह परिवीक्षा अधिकारी, कंप्यूटर ऑपरेटर और सामाजिक कार्यकर्ताओं के विभिन्न पदों के लिए 11 नियुक्तियां हुई थी। बाल अधिकार संरक्षण कार्यकर्ता एडवोकेट पवन तिवारी ने बताया कि नियुक्तिों में धांधली की शिकायत आयोग और शासन से की गई थी। ज्यूडीशियल मजिस्ट्रेट को भी इससे अवगत कराया था। उन्होंने तत्कालीन डीएम को सभी नियुक्तियां निरस्त करने के लिए तीन बार पत्र लिखे थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और शासन में शिकायत की।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश संयुक्त सचिव अजय कुमार सिंह ने महिला कल्याण निदेशक को सभी नियुक्तियों की जांच पड़ताल करने के निर्देश दिए है। यह भी आदेश दिए हैं कि जांच करने पर शासन के साथ-साथ शिकायतकर्ता को भी इससे अवगत कराया जाए। पवन तिवारी ने बताया कि इसके बावजूद उन्हें इस बाबात कोई भी जानकारी नहीं दी गई। अब उन्होंने महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव, डीएम, सीडीओ, डीपीओ के खिलाफ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर दी है।
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उन्होंने बताया कि आरटीआई के तहत नियुक्तियों की फाइल जांच की मांग की गई थी, लेकिन विभागीय अधिकारी ने ऐसा नहीं किया। इसकी अपील की गई। इस पर सूचना आयोग ने जिला बाल संरक्षण अधिकारी को 16 फरवरी को तलब किया है।
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2016 में समेकित बाल विकास योजना (आईसीपीएस) के तहत जिले में बाल संरक्षण अधिकारी, विधि सह परिवीक्षा अधिकारी, कंप्यूटर ऑपरेटर और सामाजिक कार्यकर्ताओं के विभिन्न पदों के लिए 11 नियुक्तियां हुई थी। बाल अधिकार संरक्षण कार्यकर्ता एडवोकेट पवन तिवारी ने बताया कि नियुक्तिों में धांधली की शिकायत आयोग और शासन से की गई थी। ज्यूडीशियल मजिस्ट्रेट को भी इससे अवगत कराया था। उन्होंने तत्कालीन डीएम को सभी नियुक्तियां निरस्त करने के लिए तीन बार पत्र लिखे थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और शासन में शिकायत की।
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उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश संयुक्त सचिव अजय कुमार सिंह ने महिला कल्याण निदेशक को सभी नियुक्तियों की जांच पड़ताल करने के निर्देश दिए है। यह भी आदेश दिए हैं कि जांच करने पर शासन के साथ-साथ शिकायतकर्ता को भी इससे अवगत कराया जाए। पवन तिवारी ने बताया कि इसके बावजूद उन्हें इस बाबात कोई भी जानकारी नहीं दी गई। अब उन्होंने महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव, डीएम, सीडीओ, डीपीओ के खिलाफ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर दी है।
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उन्होंने बताया कि आरटीआई के तहत नियुक्तियों की फाइल जांच की मांग की गई थी, लेकिन विभागीय अधिकारी ने ऐसा नहीं किया। इसकी अपील की गई। इस पर सूचना आयोग ने जिला बाल संरक्षण अधिकारी को 16 फरवरी को तलब किया है।