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चित्रित धूसर मृदभांड मिले, खुलेंगी इतिहास की परतें
Updated Wed, 31 Jan 2018 01:56 AM IST
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बिनौली (बागपत)। बरनावा मेें हिंडन नदी के किनारे उत्खनन का कार्य जारी है। खुदाई के दौरान यहां चित्रित धूसर मृदभांड मिले हैं। कुषाण कालीन संस्कृति मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है। उधर, बरनावा टीले के निकट भी खुदाई की तैयारियां तेज कर दी गई है।
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने बरनावा में उत्खनन की मंजूरी दी है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग उत्खनन शाखा द्वितीय और भारतीय पुरातत्व संस्थान लाल किला की संयुक्त टीम उत्खनन कर रही है। पुरातत्व संस्थान के निदेशक डॉ. एसके मंजुल को यहां उत्खनन के लिए लाइसेंस दिया है। उनके नेतृत्व में पुरातत्व विभाग की टीम उत्खनन कार्य में लगी है। मंगलवार को यहां पर दिनभर खुदाई का कार्य चलता रहा। मिट्टी के बर्तनों के पुरावशेष मिले हैं, जिनके काल क्रम का पता लगाने के लिए इन्हें पॉटरी यार्ड में रखवा दिया गया है।
खुदाई में पहले भी मिल चुके हैं प्रमाण
बिनौली (बागपत)। वर्ष 2005 के सितंबर माह में सिनौली में हड़प्पा कालीन शवादान गृह मिला था। इससे इस क्षेत्र में हड़प्पा कालीन सभ्यता की पुष्टि हो गई थी। इस पर अभी भी रिसर्च चल रहा है। इसके बाद वर्ष 2015 में चंदायन गांव में उत्खनन का कार्य केंद्र सरकार करा चुकी है। चित्रित धूसर मृदभांड संस्कृति, कुषाण काल, गुप्त और राजपूत राजाओं के समय की सभ्यताओं के प्रमाण भी जिले में चुके हैं।
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केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने बरनावा में उत्खनन की मंजूरी दी है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग उत्खनन शाखा द्वितीय और भारतीय पुरातत्व संस्थान लाल किला की संयुक्त टीम उत्खनन कर रही है। पुरातत्व संस्थान के निदेशक डॉ. एसके मंजुल को यहां उत्खनन के लिए लाइसेंस दिया है। उनके नेतृत्व में पुरातत्व विभाग की टीम उत्खनन कार्य में लगी है। मंगलवार को यहां पर दिनभर खुदाई का कार्य चलता रहा। मिट्टी के बर्तनों के पुरावशेष मिले हैं, जिनके काल क्रम का पता लगाने के लिए इन्हें पॉटरी यार्ड में रखवा दिया गया है।
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खुदाई में पहले भी मिल चुके हैं प्रमाण
बिनौली (बागपत)। वर्ष 2005 के सितंबर माह में सिनौली में हड़प्पा कालीन शवादान गृह मिला था। इससे इस क्षेत्र में हड़प्पा कालीन सभ्यता की पुष्टि हो गई थी। इस पर अभी भी रिसर्च चल रहा है। इसके बाद वर्ष 2015 में चंदायन गांव में उत्खनन का कार्य केंद्र सरकार करा चुकी है। चित्रित धूसर मृदभांड संस्कृति, कुषाण काल, गुप्त और राजपूत राजाओं के समय की सभ्यताओं के प्रमाण भी जिले में चुके हैं।
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