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कहीं बंजर तो कहीं उबड़ खाबड़ स्कूलों की जमीन
Updated Mon, 25 Dec 2017 01:05 AM IST
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बागपत। जनपद के अधिकांश परिषदीय स्कूलों की जमीन कहीं बंजर तो कहीं उबड़ खाबड़ है। अधिकतर जमीन के ठेके जिला पंचायत की ओर से छोड़े जा रहे हैं, लेकिन इस जमीन से होने वाले आमदनी को स्कूलों पर खर्च नहीं किया जा रहा है। कई स्कूल ऐसे भी हैं, जिनकी जमीन खाली पड़ी हुई है। इससे क्षेत्रीय लोगों में शिक्षा विभाग और जिला पंचायत अधिकारियों के खिलाफ गुस्सा पनप रहा है।
बागपत के बिनौली, बड़ौत, छपरौली, पिलाना और बागपत ब्लॉक के 29 स्कूलों के पास करीब डेढ़ सौ बीघा जमीन में अधिकतर के ठेके जिला पंचायत छोड़ रहा है। प्राथमिक विद्यालय दाहा, गैडबरा, तवेला गढ़ी, झूंडपुर, मौजिजाबाद नांगल के अलावा ऐसे कई स्कूल हैं, जिनकी जमीन का प्रयोग जिला पंचायत कर रहा है। खेती के लिए ठेके छोड़े जाते हैं। इस जमीन से होने वाली आमदनी को शिक्षा पर खर्च नहीं किया जाता है। बिनौली ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय दादरी के पास डेढ़ बीघा जमीन है, लेकिन यह उबड़-खाबड़ और अनुपयोगी है। प्राथमिक विद्यालय सिरसली के पास पांच सौ मीटर जमीन है, लेकिन यह बंजर पड़ी हुई है। प्राथमिक विद्यालय गढ़ी कांगरान की करीब पांच बीघा जमीन खाली पड़ी है।
दूसरी तरफ भूमि से होने वाली आमदनी से स्कूल के विकास के लिए कार्य नहीं होने से ग्रामीणों में जिला पंचायत और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के प्रति गुस्सा पनप रहा है। ग्रामीणों ने कहा दोनों विभाग के अधिकारी मिलकर बड़े स्तर पर आर्थिक गोलमाल कर रहे हैं। यदि जांच कराई जाए तो बड़े स्तर पर आर्थिक घोटाला खुल सकता है। वहीं जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी योगराज सिंह का कहना है कि मंडलायुक्त को स्कूलों की जमीन और उनके प्रयोग के विषय में जानकारी उपलब्ध करा दी गई है। शासन के आदेश पर ही जिला पंचायत स्कूलों की जमीन का उपयोग कर रहा है। जहां जमीन पर कब्जा किया गया, उसके लिए कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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14 बीघा जमीन घटकर रह गई आठ बीघे
बागपत। प्राथमिक विद्यालय मवी कलां संख्या एक के पास करीब 14 बीघा जमीन थी। मौके पर इस वक्त सिर्फ आठ बीघा जमीन है। छह बीघा जमीन कहां गई, इसकी कानूनी लड़ाई चल रही है।
भड़ल की जमीन पर स्टे
बागपत। प्राथमिक विद्यालय भड़ल के पास करीब 20 बीघा जमीन थी, लेकिन इसका प्रकरण हाईकोर्ट में चल रहा है। स्टे होने के कारण जमीन पर अभी तक फैसला नहीं हो सका। इसी तरह गौरीपुर की जमीन क प्रकरण भी न्यायालय में विचाराधीन है।
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बागपत के बिनौली, बड़ौत, छपरौली, पिलाना और बागपत ब्लॉक के 29 स्कूलों के पास करीब डेढ़ सौ बीघा जमीन में अधिकतर के ठेके जिला पंचायत छोड़ रहा है। प्राथमिक विद्यालय दाहा, गैडबरा, तवेला गढ़ी, झूंडपुर, मौजिजाबाद नांगल के अलावा ऐसे कई स्कूल हैं, जिनकी जमीन का प्रयोग जिला पंचायत कर रहा है। खेती के लिए ठेके छोड़े जाते हैं। इस जमीन से होने वाली आमदनी को शिक्षा पर खर्च नहीं किया जाता है। बिनौली ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय दादरी के पास डेढ़ बीघा जमीन है, लेकिन यह उबड़-खाबड़ और अनुपयोगी है। प्राथमिक विद्यालय सिरसली के पास पांच सौ मीटर जमीन है, लेकिन यह बंजर पड़ी हुई है। प्राथमिक विद्यालय गढ़ी कांगरान की करीब पांच बीघा जमीन खाली पड़ी है।
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दूसरी तरफ भूमि से होने वाली आमदनी से स्कूल के विकास के लिए कार्य नहीं होने से ग्रामीणों में जिला पंचायत और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के प्रति गुस्सा पनप रहा है। ग्रामीणों ने कहा दोनों विभाग के अधिकारी मिलकर बड़े स्तर पर आर्थिक गोलमाल कर रहे हैं। यदि जांच कराई जाए तो बड़े स्तर पर आर्थिक घोटाला खुल सकता है। वहीं जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी योगराज सिंह का कहना है कि मंडलायुक्त को स्कूलों की जमीन और उनके प्रयोग के विषय में जानकारी उपलब्ध करा दी गई है। शासन के आदेश पर ही जिला पंचायत स्कूलों की जमीन का उपयोग कर रहा है। जहां जमीन पर कब्जा किया गया, उसके लिए कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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14 बीघा जमीन घटकर रह गई आठ बीघे
बागपत। प्राथमिक विद्यालय मवी कलां संख्या एक के पास करीब 14 बीघा जमीन थी। मौके पर इस वक्त सिर्फ आठ बीघा जमीन है। छह बीघा जमीन कहां गई, इसकी कानूनी लड़ाई चल रही है।
भड़ल की जमीन पर स्टे
बागपत। प्राथमिक विद्यालय भड़ल के पास करीब 20 बीघा जमीन थी, लेकिन इसका प्रकरण हाईकोर्ट में चल रहा है। स्टे होने के कारण जमीन पर अभी तक फैसला नहीं हो सका। इसी तरह गौरीपुर की जमीन क प्रकरण भी न्यायालय में विचाराधीन है।