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ां कालरात्रि की पूजा करने से दूर हो जाता शत्रु का भय
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मां कालरात्रि की पूजा करने से दूर हो जाता शत्रु का भय
बागपत। मां दुर्गा के सातवे स्वरूप कालरात्रि की जिलेभर में पूजा अर्चना की गई। मंदिरों में हवन और कीर्तन का आयोजन किया गया। शुक्रवार को नवरात्र के सातवे दिन दुर्गा मां के सातवें स्वरूप कालरात्रि की अराधना की गई। मंदिरों में पूजा अर्चना की गई। पंडित राजकुमार शास्त्री ने बताया कि दुर्गा के सातवे स्वरूप कालरात्रि की पूजा की जाएगी। दस महाविद्यायों में उनका प्रथम स्थान है। इनकी पूजा गुलाब के लाल फूल, अनार के फल से प्रसंत होती है। इनकी पूजा करने से शत्रु का भय दूर हो जाता है। मुकदमे में विजय प्राप्त होती है। मां कालरात्रि का रूप भयानक है, लेकिन भक्तों को किसी प्रकार से भयभीत अथवा आतंकित होनी की आवश्यकता नहीं पड़ती है। मां दुष्टों का विनाश करने वाली है। दानव, देत्य, राक्षस, भूत प्रेस इनके स्मरण मात्र से ही भयभीत होकर भाग जाते है। ज्योतिषाचार्य पंडित राजकुमार शास्त्री ने बताया कि अष्टमी और नवमी एक ही दिन मनाई जाएगी। अष्टमी में व्रत खुलेंगे। शास्त्रों के अनुसार नवमी और अष्टमी एक ही दिन पड़ रही है। घरों में कन्याओं को भोजन कराने के बाद श्रद्धालुओं द्वारा अपने व्रत खोले जाएंगे। घरों में व्रतों का उदयापन विधि विधान से कराया जाएगा। बाबा जानकीदास मंदिर में हवन का आयोजन होगा।
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बागपत। मां दुर्गा के सातवे स्वरूप कालरात्रि की जिलेभर में पूजा अर्चना की गई। मंदिरों में हवन और कीर्तन का आयोजन किया गया। शुक्रवार को नवरात्र के सातवे दिन दुर्गा मां के सातवें स्वरूप कालरात्रि की अराधना की गई। मंदिरों में पूजा अर्चना की गई। पंडित राजकुमार शास्त्री ने बताया कि दुर्गा के सातवे स्वरूप कालरात्रि की पूजा की जाएगी। दस महाविद्यायों में उनका प्रथम स्थान है। इनकी पूजा गुलाब के लाल फूल, अनार के फल से प्रसंत होती है। इनकी पूजा करने से शत्रु का भय दूर हो जाता है। मुकदमे में विजय प्राप्त होती है। मां कालरात्रि का रूप भयानक है, लेकिन भक्तों को किसी प्रकार से भयभीत अथवा आतंकित होनी की आवश्यकता नहीं पड़ती है। मां दुष्टों का विनाश करने वाली है। दानव, देत्य, राक्षस, भूत प्रेस इनके स्मरण मात्र से ही भयभीत होकर भाग जाते है। ज्योतिषाचार्य पंडित राजकुमार शास्त्री ने बताया कि अष्टमी और नवमी एक ही दिन मनाई जाएगी। अष्टमी में व्रत खुलेंगे। शास्त्रों के अनुसार नवमी और अष्टमी एक ही दिन पड़ रही है। घरों में कन्याओं को भोजन कराने के बाद श्रद्धालुओं द्वारा अपने व्रत खोले जाएंगे। घरों में व्रतों का उदयापन विधि विधान से कराया जाएगा। बाबा जानकीदास मंदिर में हवन का आयोजन होगा।
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