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भोले की भक्ति में गौरा की शक्ति
Updated Wed, 08 Aug 2018 12:58 AM IST
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भोले की भक्ति मेें गौरा की शक्ति
बड़ौत। भोले की भक्ति मेें महिलाएं भी इस बार बड़ी संख्या में कांवड़ लेने हरिद्वार जा रही है। भोले के साथ भोलियों को कांवड़ यात्रा में देखना अलौकिक अहसास करा रहा है। कहते है कि शिव की भक्ति और गौरा की शक्ति ने पुुरुषों के साथ ही महिला कांवड़ यात्रियों को भी शक्ति प्रदान कर रही है। यहीं वजह है कि कांवड़ पटरी मार्ग पर कांवड़ लिए महिला कांवड़ यात्री भी पुरूषों के साथ कदमताल कर रही है।
कांवड़ यात्रा मेें आमतौर पर पुरुषों के ही गंगाजल लेने हरिद्वार पहुंचने की परंपरा रही है, पर समय के साथ इसमें महिलाओं की बढ़ती भागीदारी सुखद अहसास करा रही है। कुछ वर्ष पहले तक महिलाएं, पुरूष कांवड यात्रियों के साथ उनकी सहायक के रूप मेें चला करती थीं। महिलाएं अपने पति, भाई समेत रिश्तेदारों व साथी की जरूरतों का ध्यान रखने के साथ ही कांवड़ मार्ग मेें खाने-पीने व अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति मेें सहयोग करने केे निर्मित यात्रा मेें आया करती थी। अब बदलाव आया है। उधर, भोले की भक्ति मेें करूणा के साथ-साथ शक्ति भी है, जो गौरा का रूप है। महिलाओं का आना शक्ति का प्रतीक है, यह अनायास नहीं है, इसमें भी भोले की मर्जी और शक्ति छिपी हुई है, जो उन्हें कांवड़ लेने हरिद्वार आने को प्रेरित कर रही है। कांवड मेले में सबसे ज्यादा हरियाणा, राजस्थान, सोनीपत, पानीपत आदि की महिलाओं देखी जा रही है, जो नगर के मुख्य मार्गों से बोल बम-बम-बम के नारे लगाते हुए गुजर रही हैं।
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बड़ौत। भोले की भक्ति मेें महिलाएं भी इस बार बड़ी संख्या में कांवड़ लेने हरिद्वार जा रही है। भोले के साथ भोलियों को कांवड़ यात्रा में देखना अलौकिक अहसास करा रहा है। कहते है कि शिव की भक्ति और गौरा की शक्ति ने पुुरुषों के साथ ही महिला कांवड़ यात्रियों को भी शक्ति प्रदान कर रही है। यहीं वजह है कि कांवड़ पटरी मार्ग पर कांवड़ लिए महिला कांवड़ यात्री भी पुरूषों के साथ कदमताल कर रही है।
कांवड़ यात्रा मेें आमतौर पर पुरुषों के ही गंगाजल लेने हरिद्वार पहुंचने की परंपरा रही है, पर समय के साथ इसमें महिलाओं की बढ़ती भागीदारी सुखद अहसास करा रही है। कुछ वर्ष पहले तक महिलाएं, पुरूष कांवड यात्रियों के साथ उनकी सहायक के रूप मेें चला करती थीं। महिलाएं अपने पति, भाई समेत रिश्तेदारों व साथी की जरूरतों का ध्यान रखने के साथ ही कांवड़ मार्ग मेें खाने-पीने व अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति मेें सहयोग करने केे निर्मित यात्रा मेें आया करती थी। अब बदलाव आया है। उधर, भोले की भक्ति मेें करूणा के साथ-साथ शक्ति भी है, जो गौरा का रूप है। महिलाओं का आना शक्ति का प्रतीक है, यह अनायास नहीं है, इसमें भी भोले की मर्जी और शक्ति छिपी हुई है, जो उन्हें कांवड़ लेने हरिद्वार आने को प्रेरित कर रही है। कांवड मेले में सबसे ज्यादा हरियाणा, राजस्थान, सोनीपत, पानीपत आदि की महिलाओं देखी जा रही है, जो नगर के मुख्य मार्गों से बोल बम-बम-बम के नारे लगाते हुए गुजर रही हैं।
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