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नए साल में खुलेंगे बरनावा टीले के राज
Updated Wed, 13 Dec 2017 12:53 AM IST
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बिनौली (बागपत) । केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के अधीन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग उत्खनन शाखा द्वितीय और भारतीय पुरातत्व संस्थान लाल किला की संयुक्त टीम बरनावा के लाक्षागृह टीले की विधिवत विस्तृत उत्खनन करेगी। दिसंबर के आखिरी सप्ताह से उत्खनन शुरू होने की संभावना है। विभाग इसकी तैयारी में जुटा है।
बरनावा का टीला असल में सदियों से लोगों के लिए उत्सुकता है। महाभारतकालीन इस टीले को लाक्षागृह बताते हैं। पुरातत्व विभाग ने इसे संरक्षित किया है। सदियों बाद भी सिर्फ सरकारी उदासीनता के कारण रहस्य बना है। पांडव यहां ठहरे, यहीं पर उन्हें लाक्षागृह में जलाने का प्रयास किया । बरनावा का पूरा क्षेत्र ही नहीं बल्कि मुजफ्फरनगर, शामली में भी महाभारत काल के अवशेष हैं। खुदाई की मंजूरी से महाभारतकालीन हकीकत सामने आने की उम्मीद बन गई है। बरनावा का यह पर्यटक स्थल हिंडन और कृष्णा नदी से घिरा है। इसके पास ही शेखपुरा में दोनों नदियां एक हो जाती है। टीले पर गुबंद है और यहीं से एक गुफा निकलती है। वर्ष 2005 में सिनौली और वर्ष 2015 में चंदायन गांव में उत्खनन का कार्य केंद्र सरकार करा चुकी है। बरनावा टीले पर करीब 22 बार शोध संस्थान के शोधार्थियों और इतिहासकारों की टीम सर्वेक्षण पूर्व में कर चुकी है। दिसंबर के आखिरी सप्ताह या नए साल की शुरूआत में ही यहां उत्खनन शुरू होने की उम्मीद है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के निदेशक पुरावशेष डॉ. डीएन डिमरी का कहना है कि इसकी तैयारी चल रही है।
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बरनावा का टीला असल में सदियों से लोगों के लिए उत्सुकता है। महाभारतकालीन इस टीले को लाक्षागृह बताते हैं। पुरातत्व विभाग ने इसे संरक्षित किया है। सदियों बाद भी सिर्फ सरकारी उदासीनता के कारण रहस्य बना है। पांडव यहां ठहरे, यहीं पर उन्हें लाक्षागृह में जलाने का प्रयास किया । बरनावा का पूरा क्षेत्र ही नहीं बल्कि मुजफ्फरनगर, शामली में भी महाभारत काल के अवशेष हैं। खुदाई की मंजूरी से महाभारतकालीन हकीकत सामने आने की उम्मीद बन गई है। बरनावा का यह पर्यटक स्थल हिंडन और कृष्णा नदी से घिरा है। इसके पास ही शेखपुरा में दोनों नदियां एक हो जाती है। टीले पर गुबंद है और यहीं से एक गुफा निकलती है। वर्ष 2005 में सिनौली और वर्ष 2015 में चंदायन गांव में उत्खनन का कार्य केंद्र सरकार करा चुकी है। बरनावा टीले पर करीब 22 बार शोध संस्थान के शोधार्थियों और इतिहासकारों की टीम सर्वेक्षण पूर्व में कर चुकी है। दिसंबर के आखिरी सप्ताह या नए साल की शुरूआत में ही यहां उत्खनन शुरू होने की उम्मीद है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के निदेशक पुरावशेष डॉ. डीएन डिमरी का कहना है कि इसकी तैयारी चल रही है।
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