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ब्रहमचर्य का पालन करना कठिन होता है-अरूण मुनि
Updated Thu, 03 Aug 2017 12:50 AM IST
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ब्रह्मचर्य का पालन करना कठिन - अरुण मुनि
बड़ौत (बागपत)।
जैन संत अरुण मुनि ने कहा ब्रह्मचर्य का पालन करना कठिन होता है। जैन स्थानक शहर में आयोजित धर्मसभा में उन्होंने कहा मनुष्य जब वृद्धावस्था में आता है तो शरीर में बहुत कमजोरी आ जाती है। विषय भोग की स्थिति में नहीं रहता। तब उसकी अब्रहम की प्यास और भी अधिक बढ़ जाती है। उन्होंने कहा जिस मनुष्य के मुंह में दांत नहीं रहते, पेट में आंत भी नहीं रहती कहता है अरे बूढ़ा हो गया, तो क्या हुआ, अभी मन तो जवान है और वह नवयुवक से भी अधिक ध्यान अब्रहम में डूबा देता है। उन्होंने कहा जो व्यक्ति जितना एकांत और अंधेरे में रहता है और अश्लील साहित्य पढ़ता और मोबाइल पर अश्लील दृश्य देखता है, उतनी ही उसकी भावना मैथुन संज्ञा की तरफ जाती है। उन्होंने कहा पाप की वृत्ति से जब तक दूर नहीं हटोगे, तब तक पापों में उलझे रहोंगें । उन्होंने पाप तो एक ही होता है, उसके करने के अनेक तरीके होते हैं। इससे पहले अमन मुनि ने भी विचार रखे। धर्मसभा में प्रवीण जैन, अतुल जैन, हंस कुमार जैन, कालू जैन, दीपक जैन, अजय जैन, त्रिलोक चंद, अमित जैन, शैलबाला, इंद्राणी, अनीता, मूर्ति देवी, मेघा, भावना आदि रहे।
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बड़ौत (बागपत)।
जैन संत अरुण मुनि ने कहा ब्रह्मचर्य का पालन करना कठिन होता है। जैन स्थानक शहर में आयोजित धर्मसभा में उन्होंने कहा मनुष्य जब वृद्धावस्था में आता है तो शरीर में बहुत कमजोरी आ जाती है। विषय भोग की स्थिति में नहीं रहता। तब उसकी अब्रहम की प्यास और भी अधिक बढ़ जाती है। उन्होंने कहा जिस मनुष्य के मुंह में दांत नहीं रहते, पेट में आंत भी नहीं रहती कहता है अरे बूढ़ा हो गया, तो क्या हुआ, अभी मन तो जवान है और वह नवयुवक से भी अधिक ध्यान अब्रहम में डूबा देता है। उन्होंने कहा जो व्यक्ति जितना एकांत और अंधेरे में रहता है और अश्लील साहित्य पढ़ता और मोबाइल पर अश्लील दृश्य देखता है, उतनी ही उसकी भावना मैथुन संज्ञा की तरफ जाती है। उन्होंने कहा पाप की वृत्ति से जब तक दूर नहीं हटोगे, तब तक पापों में उलझे रहोंगें । उन्होंने पाप तो एक ही होता है, उसके करने के अनेक तरीके होते हैं। इससे पहले अमन मुनि ने भी विचार रखे। धर्मसभा में प्रवीण जैन, अतुल जैन, हंस कुमार जैन, कालू जैन, दीपक जैन, अजय जैन, त्रिलोक चंद, अमित जैन, शैलबाला, इंद्राणी, अनीता, मूर्ति देवी, मेघा, भावना आदि रहे।