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हठीले हनुमान की पूजा से होती मनोकामना पूरी
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हठीले हनुमान की पूजा से होती मनोकामना पूरी
बड़ौत। हनुमान जयंती पर पंचवटी मंदिर में हटीले हनुमान की प्रतिमा का केंद्र बनी हुई है। ऐसी मान्यता है कि यहां जो भी श्रद्धालु अपनी कामना लेकर आते हैं, वह अवश्य पूरी होती है। सबसे रोचक बात यह है कि यहां बजरंग बली को हठीले हनुमान जी कहा जाता है। मंगलवार को हटीले हनुमान की पूजा करने वाले दूरदराज से लोग आते हैं।
बताते हैं कि हठीले हनुमान की स्थापना करीब सवा सौ साल पहले बाबा उत्तम दास और संतोष पूरी की प्रेरणा से स्थापित की गई थी। यह ढाई फूट सिंदूर वाली प्रतिमा है। जिन बाबाओं ने इन्हें स्थापित किया था, उनकी मंदिर में समाधि भी बनी है। सात साल पहले मंदिर मेें इस प्रतिमा को हटाकर खड़ी प्रतिमा लगाने का निर्णय लिया गया था। लेकिन जब इस प्रतिमा को हटाने का प्रयास किया गया तो वह वहां से हटी तो नहीं इससे लोगों की अकाल मृत्यु हुई और अन्य परेशानियों होने लगीं तो लोगों ने इसे हटाने की तैयारी टाल दी थी। तभी से उनका नाम हठीले हनुमान रखा गया।
मंदिर के पुजारी पंडित कुुंदन भारद्वाज कहते हैं कि इस घटना के बाद से हठीले हनुमान के प्रति आस्था बढ़ गई है। मंगलवार को दूरदराज से श्रद्धालु सिंदूर, देशी घी, प्रसाद आदि चढ़ाकर अपनी मन्नतें मांगते है और हनुमान उनकी मनोकामना पूरी करते हैं। शनिवार को सुंदर काड का पाठ भी किया जाता है। पुजारी बताते हैं कि आज भी यदि हटीले हनुमान को इधर-उधर करने की बात करते है तो वे अपने उग्र रूप दिखा देते हैं। हनुमान जयंती पर हर वर्ष यहां विशेष कार्यक्रम किए जाते हैं।
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बड़ौत। हनुमान जयंती पर पंचवटी मंदिर में हटीले हनुमान की प्रतिमा का केंद्र बनी हुई है। ऐसी मान्यता है कि यहां जो भी श्रद्धालु अपनी कामना लेकर आते हैं, वह अवश्य पूरी होती है। सबसे रोचक बात यह है कि यहां बजरंग बली को हठीले हनुमान जी कहा जाता है। मंगलवार को हटीले हनुमान की पूजा करने वाले दूरदराज से लोग आते हैं।
बताते हैं कि हठीले हनुमान की स्थापना करीब सवा सौ साल पहले बाबा उत्तम दास और संतोष पूरी की प्रेरणा से स्थापित की गई थी। यह ढाई फूट सिंदूर वाली प्रतिमा है। जिन बाबाओं ने इन्हें स्थापित किया था, उनकी मंदिर में समाधि भी बनी है। सात साल पहले मंदिर मेें इस प्रतिमा को हटाकर खड़ी प्रतिमा लगाने का निर्णय लिया गया था। लेकिन जब इस प्रतिमा को हटाने का प्रयास किया गया तो वह वहां से हटी तो नहीं इससे लोगों की अकाल मृत्यु हुई और अन्य परेशानियों होने लगीं तो लोगों ने इसे हटाने की तैयारी टाल दी थी। तभी से उनका नाम हठीले हनुमान रखा गया।
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मंदिर के पुजारी पंडित कुुंदन भारद्वाज कहते हैं कि इस घटना के बाद से हठीले हनुमान के प्रति आस्था बढ़ गई है। मंगलवार को दूरदराज से श्रद्धालु सिंदूर, देशी घी, प्रसाद आदि चढ़ाकर अपनी मन्नतें मांगते है और हनुमान उनकी मनोकामना पूरी करते हैं। शनिवार को सुंदर काड का पाठ भी किया जाता है। पुजारी बताते हैं कि आज भी यदि हटीले हनुमान को इधर-उधर करने की बात करते है तो वे अपने उग्र रूप दिखा देते हैं। हनुमान जयंती पर हर वर्ष यहां विशेष कार्यक्रम किए जाते हैं।
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