{"_id":"5b6b3dcb4f1c1ba03e8b5d73","slug":"181533754827-baghpat-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"शिव को प्रसन्न करने के लिए जलाभिषेक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शिव को प्रसन्न करने के लिए जलाभिषेक
Updated Thu, 09 Aug 2018 12:37 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शिव को प्रसन्न करने के लिए करें जलाभिषेक
बड़ौत। जलाभिषेक करने से सुख, शांति और समृद्वि आती है, भगवान शिव को प्रसन्न करने और उनके विष को शांत करने के लिए जलाभिषेक किया जाता है।
पंडित कुंदन और पंडित आकाश भारद्वाज ने बताया कि ब्रह्मज्योति जब प्रकृति से साक्षात्कार करती है तो यह सारी प्रकृति जीवंत हो उठती है। अत: यह निराकार ब्रहा का भी अभिषेक है एवं साकार रूप में हमें इन्हें शिव मानकर अभिषेक एवं पूजन करते है। अभिषेक शब्द का शाब्दिक अर्थ है स्नान करना अथवा कराना। रूद्राभिषेक का अर्थ है कि भगवान रूद्र का अभिषेक अर्थात शिवलिंग पर रूद्र के मंत्रों के द्वारा अभिषेक। यह पवित्र स्नान रूद्ररूप शिव को कराया जाता है। उन्होंने बताया कि शिव को प्रसन्न करने का सबसे श्रेष्ठ तरीका है रूद्राभिषेक करना। वैसे भी अपनी जटा मेें गंगा को धारण करने से भगवान शिव को जलधारप्रिय माना गया है। बताया कि भगवान भोलेनाथ को सोमनाथ कहा गया है। सोम यानी चंद्रमा का नाथ, चंद्रमा मन का कारक होता है। मन के कारण ही हमारा जन्म एवं मुक्ति होती है। अत: मन को शंात करने के लिए भी शिवलिंग पर जलाभिषेक किया जाता है।
विज्ञापन
बड़ौत। जलाभिषेक करने से सुख, शांति और समृद्वि आती है, भगवान शिव को प्रसन्न करने और उनके विष को शांत करने के लिए जलाभिषेक किया जाता है।
पंडित कुंदन और पंडित आकाश भारद्वाज ने बताया कि ब्रह्मज्योति जब प्रकृति से साक्षात्कार करती है तो यह सारी प्रकृति जीवंत हो उठती है। अत: यह निराकार ब्रहा का भी अभिषेक है एवं साकार रूप में हमें इन्हें शिव मानकर अभिषेक एवं पूजन करते है। अभिषेक शब्द का शाब्दिक अर्थ है स्नान करना अथवा कराना। रूद्राभिषेक का अर्थ है कि भगवान रूद्र का अभिषेक अर्थात शिवलिंग पर रूद्र के मंत्रों के द्वारा अभिषेक। यह पवित्र स्नान रूद्ररूप शिव को कराया जाता है। उन्होंने बताया कि शिव को प्रसन्न करने का सबसे श्रेष्ठ तरीका है रूद्राभिषेक करना। वैसे भी अपनी जटा मेें गंगा को धारण करने से भगवान शिव को जलधारप्रिय माना गया है। बताया कि भगवान भोलेनाथ को सोमनाथ कहा गया है। सोम यानी चंद्रमा का नाथ, चंद्रमा मन का कारक होता है। मन के कारण ही हमारा जन्म एवं मुक्ति होती है। अत: मन को शंात करने के लिए भी शिवलिंग पर जलाभिषेक किया जाता है।