फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Baghpat News ›   ग्लैंडर्स की दहशत में आए घोड़ा पालने वाले लोग

ग्लैंडर्स की दहशत में आए घोड़ा पालने वाले लोग

Sun, 13 May 2018 12:44 AM IST
Updated Sun, 13 May 2018 12:44 AM IST
विज्ञापन
ग्लैंडर्स की दहशत में आए घोड़ा पालने वाले लोग
बागपत। ग्लैंडर्स बीमारी से घोड़ों का पालन करने वाले लोगों में भय का माहौल है। बीमारी होने पर तुरंत चिकित्सकों से उपचार करवा रहे हैं। जबकि पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारी 12 घोड़ों के नमूने लेकर जांच के लिए भेज चुके हैं। बाहर से आने वाले घोड़े और खच्चरों का जिले में पूरी तरह प्रवेश वर्जित कर दिया गया है।
विज्ञापन

घोड़ों में ग्लैंडर्स बीमारी का प्रकोप एकाएक बढ़ गया है। जिले में 12 घोड़ों के नमूनों को जांच के लिए पशु चिकित्सा टीम भेज चुकी है। इसमें दो-चार में इस रोग की पुष्टि होनी की संभावना है। मंगलवार और बुधवार तक इसकी रिपोर्ट आ जाएगी, इसके बाद विभाग इन रोग मिलने वाले घोड़ों को मौत के लिए इंजेक्शन लाएगा। इस रोग की आमद से घोड़ा, खच्चर और इस प्रजाति के पशुओं को पालने वाले लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है। जरा भी रोग दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकों से उपचार करवा रहे हैं। बीमार होने के डर के कारण अलग-अलग घोड़ों को बंध रहे है, ताकि यह चपेट में न आ जाए। डॉक्टरों से संपर्क बनाएं हुए हैं। डीएम ऋषिरेंद्र कुमार ने कंट्रोल एरिया घोषित कर दिया है। बाहर से घोड़ा या इसकी प्रजाति का कोई भी पशु प्रवेश नहीं करेगा। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजपाल सिंह ने कहा घोड़े और इसकी प्रजाति के लिए लैंडर्स बीमारी खतरनाक है। पशु पालकों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। ग्लैंडर्स होने से संबंधित घोड़े की मौत निश्चित है।
विज्ञापन


तीन श्रेणी की होती है ग्लैंडर्स बीमारी
सीवीओ ने बताया कि घोड़े और उसकी प्रजाति में तीन श्रेणी में ग्लैंडर्स बीमारी होती है। पहला निजल ग्लैंडर्स जो इन पशुओं के नाक में होता है। इससे पशु की नाक में जख्म हो जाता है। उसे लगातार पीले-हरे रंग का पदार्थ निकालता है। दूसरा पलमोनरी ग्लैंडर्स इससे पीड़ित घोड़े में सांस की नली में गांठ बन जाती है। इससे पशु को सांस लेने में परेशानी होती है। धसका हो जाता और बुखार की शिकायत बन जाती है। तीसरा कुरेनियस ग्लैंडर्स होता है। इससे पीड़ित घोड़ों के शरीर पर गांठ बन जाती है। इससे फुट कर हरे-पीले रंग का पदार्थ निकालता है। इस रोग में घोड़े की मौत हो जाती है। पशु चिकित्सक विभाग संबंधित घोड़े को मृत्यु का इंजेक्शन लगाकर मारता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


मुआवजे का है प्रावधान
ग्लैंडर्स रोग से पशु चिकित्सा विभाग उन्हें इंजेक्शन लगाकर मारता है। इसके लिए मुआवजा निर्धारित किया गया है। खच्चर होगा तो उसके मालिक को 16 हजार और घोड़ा होगा तो 25 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।


मानव जीवन के लिए खतरा है ग्लैंडर्स
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजपाल सिंह ने बताया कि ग्लैंडर्स मानव जीवन के लिए भी खतरा है। इस रोग से पीड़ित घोड़े के संक्रमण की चपेट में आने से मनुष्य भी संक्रमित हो जाते है। घोड़ों में त्वचा, सांस नली और नाक में जिस प्रकार से रोग होता उसी प्रकार से मनुष्य भी पीड़ित होते हैं। मौत तक हो जाएगी। इस लिए जहां भी रोग का संक्रमण होगा, वहां पर लोगों को पूरी व्यवस्था के साथ जाना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed