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वाल्मीकि मंदिर की सरकार कर रही उपेक्षा
Updated Mon, 30 Oct 2017 12:58 AM IST
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बालैनी (बागपत)। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन पर प्राचीन वाल्मीकि मंदिर की उपेक्षा का आरोप लगाया। मंदिर का इतिहास रामायण कालीन बताया जा रहा है। कथा है कि यहीं लव-कुश का जन्म हुआ और माता सीता सती हुई।
बालैनी के प्राचीन वाल्मीकि मंदिर में रविवार को समिति के पदाधिकारियों की बैठक हुई। इसमें मुख्य पुजारी स्वामी लक्ष्यदेवानंद ने बताया कि मंदिर का इतिहास रामायण काल से जुड़ा हुआ है। जिला प्रशासन ने क्षेत्र मंदिर को उपेक्षित रखा है। जबकि दूर दराज से यहां श्रद्धालु आकर पूजा अर्चना करते हैं। हर सरकार से समिति के पदाधिकारी मांग कर चुके हैं, पर कोई कार्रवाई करने को तैयार नहीं है। मंदिर को पर्यटन सर्किट से जोड़ने के लिए समिति का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलेगा। समिति के अध्यक्ष जयभगवान यादव ने बताया कि 20-21 नवंबर को मेले का आयोजन होगा। इसमें डॉ. एसपी यादव, सुधीर कुमार, मोनू, राम कुमार, विमल, राज कुमार, शंकर स्वरूप, शादीराम यादव, सचिन, हरिकेश आदि रहे।
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बालैनी के प्राचीन वाल्मीकि मंदिर में रविवार को समिति के पदाधिकारियों की बैठक हुई। इसमें मुख्य पुजारी स्वामी लक्ष्यदेवानंद ने बताया कि मंदिर का इतिहास रामायण काल से जुड़ा हुआ है। जिला प्रशासन ने क्षेत्र मंदिर को उपेक्षित रखा है। जबकि दूर दराज से यहां श्रद्धालु आकर पूजा अर्चना करते हैं। हर सरकार से समिति के पदाधिकारी मांग कर चुके हैं, पर कोई कार्रवाई करने को तैयार नहीं है। मंदिर को पर्यटन सर्किट से जोड़ने के लिए समिति का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलेगा। समिति के अध्यक्ष जयभगवान यादव ने बताया कि 20-21 नवंबर को मेले का आयोजन होगा। इसमें डॉ. एसपी यादव, सुधीर कुमार, मोनू, राम कुमार, विमल, राज कुमार, शंकर स्वरूप, शादीराम यादव, सचिन, हरिकेश आदि रहे।
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