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यमुना के धार के साथ बदलते हैं खेत
Updated Fri, 15 Sep 2017 02:04 AM IST
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बागपत। यमुना की धार के साथ किसानों के खेत और रकबा बदलता है। यूपी के चार जिलों के किसानों को खेती करने के लिए यमुना पार जाना पड़ता है। इनमें शामली और बागपत के किसानों की संख्या सबसे अधिक है। रकबे का फैसला करने के लिए दीक्षित अवार्ड बनाया , लेकिन अभी तक भी फैसला नहीं हो सका।
उफनती यमुना धार बदलती है तो बागपत, सहारनपुर, शामली और गाजियाबाद के किसानों के खेत भी बदल जाते हैं। यूपी के किसानों का बड़ा रकबा हरियाणा में है। यही कारण है कि रोजाना इन्हें खेती करने के लिए नदी पार करनी पड़ती है। यमुना नदी का पुल गौरीपुर में है, इस कारण अधिकतर गांव के लोग खेती के लिए अपने गांव के सामने के रास्ते अपनाते हैं। यही कारण है कि नाव का सहारा लिया जाता है। रकबे की पैमाइश के लिए दीक्षित अवार्ड का गठन किया जा चुका है, लेकिन फैसला नहीं हुआ। यूपी और हरियाणा के किसानों के बीच विवाद रहता है। बागपत के कई गांव के किसानों का मुकदमा पंचकुला में चल रहा है, लेकिन जमीन का फैसला नहीं हो सका है।
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उफनती यमुना धार बदलती है तो बागपत, सहारनपुर, शामली और गाजियाबाद के किसानों के खेत भी बदल जाते हैं। यूपी के किसानों का बड़ा रकबा हरियाणा में है। यही कारण है कि रोजाना इन्हें खेती करने के लिए नदी पार करनी पड़ती है। यमुना नदी का पुल गौरीपुर में है, इस कारण अधिकतर गांव के लोग खेती के लिए अपने गांव के सामने के रास्ते अपनाते हैं। यही कारण है कि नाव का सहारा लिया जाता है। रकबे की पैमाइश के लिए दीक्षित अवार्ड का गठन किया जा चुका है, लेकिन फैसला नहीं हुआ। यूपी और हरियाणा के किसानों के बीच विवाद रहता है। बागपत के कई गांव के किसानों का मुकदमा पंचकुला में चल रहा है, लेकिन जमीन का फैसला नहीं हो सका है।
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