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कर्मो को नष्ट करने वाला होता है अंतगढ दसांगसूत्र- अरूण मुनि
Updated Fri, 25 Aug 2017 01:43 AM IST
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बड़ौत (बागपत)।
जैन संत अरुण मुनि ने कहा कि जिनवाणी सुनने से भव-भव के बंधन कट जाते है। वे बृहस्पतिवार को पर्युषण पर्व के छठे दिन जैन स्थानक नया बाजार में धर्मसभा में बोल रहे थे।
उन्होंने बताया कि आपने पूर्व संस्कारों के कारण ऐसे बच्चे जब नया जन्म लेते है तो शुरू में ही उनके मन में संयम की भावना उभर जाती है और वे संयम पथ पर अग्रसर हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे ही होनहार बच्चे अतिमुक्त कुमार जो पोलासपुर नगरी के राजा विजया राजा के यहां जन्म लेकर नौ वर्ष की अवस्था में संयम पथ की ओर अग्रसर हो गये थे। उन्होंने कहा कि जिनके अंदर उपदान है, उन्हें निमित्त मिल ही जाता है। जो अपना कल्याण करना चाहते हैं, वे दुनियां के भोग विलास में नहीं पड़ते। वैराग्य उत्पन्न होने की कोई उम्र नहीं होती। जीवन के किसी भी क्षण वैराग्य उमड़ सकता है। जिस प्रकार अग्नि में घी डालते ही वह धू-धू करके जल उठती है उसी प्रकार अतिमुक्त कुमार के जीवन में पूर्व जीवन के संस्कारों में जब भगवान महावीर के रूप में निमित्त मिले तो संयम की ज्योति उनके मन में जल उठी। धर्मसभा में विनोद जैन, मनीष जैन, खचेडूमल जैन, अतुल जैन, हंस कुमार, दीपक जैन, शैलबाला, इंद्राणी आदि उपस्थित रहे।
कोई तन से कोई मन से दुखी : सुंदर सागर महाराज
बड़ौत। आचार्य सुंदर सागर महाराज ने विहर्ष सभागार में धर्मसभा में कहा कि कोई तन से तो कोई मन से दुखी है। कोई धन से दुखी है। कम धन हो तो सोचता है दान करूंगा। ज्यादा होता है तो दान देने के परिणाम नहीं बनते। जैसे-जैसे धन बढ़ता है। परिणाम नीचे गिर जाते हैं। धर्मसभा में प्रमोद जैन, मदन लाल जैन, वरदान जैन, अशोक, संदीप, अतुल आदि उपस्थित थे।
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जैन संत अरुण मुनि ने कहा कि जिनवाणी सुनने से भव-भव के बंधन कट जाते है। वे बृहस्पतिवार को पर्युषण पर्व के छठे दिन जैन स्थानक नया बाजार में धर्मसभा में बोल रहे थे।
उन्होंने बताया कि आपने पूर्व संस्कारों के कारण ऐसे बच्चे जब नया जन्म लेते है तो शुरू में ही उनके मन में संयम की भावना उभर जाती है और वे संयम पथ पर अग्रसर हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे ही होनहार बच्चे अतिमुक्त कुमार जो पोलासपुर नगरी के राजा विजया राजा के यहां जन्म लेकर नौ वर्ष की अवस्था में संयम पथ की ओर अग्रसर हो गये थे। उन्होंने कहा कि जिनके अंदर उपदान है, उन्हें निमित्त मिल ही जाता है। जो अपना कल्याण करना चाहते हैं, वे दुनियां के भोग विलास में नहीं पड़ते। वैराग्य उत्पन्न होने की कोई उम्र नहीं होती। जीवन के किसी भी क्षण वैराग्य उमड़ सकता है। जिस प्रकार अग्नि में घी डालते ही वह धू-धू करके जल उठती है उसी प्रकार अतिमुक्त कुमार के जीवन में पूर्व जीवन के संस्कारों में जब भगवान महावीर के रूप में निमित्त मिले तो संयम की ज्योति उनके मन में जल उठी। धर्मसभा में विनोद जैन, मनीष जैन, खचेडूमल जैन, अतुल जैन, हंस कुमार, दीपक जैन, शैलबाला, इंद्राणी आदि उपस्थित रहे।
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कोई तन से कोई मन से दुखी : सुंदर सागर महाराज
बड़ौत। आचार्य सुंदर सागर महाराज ने विहर्ष सभागार में धर्मसभा में कहा कि कोई तन से तो कोई मन से दुखी है। कोई धन से दुखी है। कम धन हो तो सोचता है दान करूंगा। ज्यादा होता है तो दान देने के परिणाम नहीं बनते। जैसे-जैसे धन बढ़ता है। परिणाम नीचे गिर जाते हैं। धर्मसभा में प्रमोद जैन, मदन लाल जैन, वरदान जैन, अशोक, संदीप, अतुल आदि उपस्थित थे।
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