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रेहड़ी पर मरीज को अस्पताल लेकर पहुंचे बहन व पत्नी
Updated Sun, 18 Mar 2018 02:24 AM IST
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बागपत।
सरकार की ओर से आम लोगों को राहत देने के लिए चलाई 108 एंबुलेंस सेवा होने के बाद भी आम लोगों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। ऐसा ही एक मामला जिला अस्पताल में उस समय सामने आया जब एंबुलेंस के अभाव कारण टीबी के मरीज को पत्नी और बहन रेहड़ी पर अस्पताल लाने को मजबूर हो गए।
नई बस्ती मुगलपुरा बागपत निवासी गुलफाम पुत्र नूर हसन टीबी का मरीज है और उसका जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है। शनिवार को उसकी हालत खराब हो गई। पत्नी रुखसार ने 108 एंबुलेंस को कई बार कॉल की, लेकिन एंबुलेंस नहीं पहुंची। एंबुलेंस न आने पर पत्नी रुखसार और बहन शहजादी मरीज को रेहड़ी पर डालकर जिला अस्पताल ले गए। रेहड़ी को बहन ने चलाया और पत्नी ने पीछे से धक्का लगाया। उन्हें देखकर हर कोई एंबुलेंस सेवा को दोषी ठहरा रहे है। पत्नी ने बताया कि गुलफान को काफी दिनों से टीबी है। एक माह से उसकी हालत ज्यादा खराब होने के कारण जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है। अस्पताल में उसे भर्ती भी नहीं किया जा रहा है। उसके दो बच्चे हैं। वह रिक्शा चलाकर अपने परिवार का पालन पोषण करता है, लेकिन अब काम भी बंद पड़ा है। परिवार आर्थिक तंगी झेल रहा है। उन्होंने एंबुलेंस को कई बार फोन किए, लेकिन कोई नहीं आया। इसके बाद उन्हें रेहड़ी पर उसे अस्पताल लाना पड़ा।
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सरकार की ओर से आम लोगों को राहत देने के लिए चलाई 108 एंबुलेंस सेवा होने के बाद भी आम लोगों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। ऐसा ही एक मामला जिला अस्पताल में उस समय सामने आया जब एंबुलेंस के अभाव कारण टीबी के मरीज को पत्नी और बहन रेहड़ी पर अस्पताल लाने को मजबूर हो गए।
नई बस्ती मुगलपुरा बागपत निवासी गुलफाम पुत्र नूर हसन टीबी का मरीज है और उसका जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है। शनिवार को उसकी हालत खराब हो गई। पत्नी रुखसार ने 108 एंबुलेंस को कई बार कॉल की, लेकिन एंबुलेंस नहीं पहुंची। एंबुलेंस न आने पर पत्नी रुखसार और बहन शहजादी मरीज को रेहड़ी पर डालकर जिला अस्पताल ले गए। रेहड़ी को बहन ने चलाया और पत्नी ने पीछे से धक्का लगाया। उन्हें देखकर हर कोई एंबुलेंस सेवा को दोषी ठहरा रहे है। पत्नी ने बताया कि गुलफान को काफी दिनों से टीबी है। एक माह से उसकी हालत ज्यादा खराब होने के कारण जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है। अस्पताल में उसे भर्ती भी नहीं किया जा रहा है। उसके दो बच्चे हैं। वह रिक्शा चलाकर अपने परिवार का पालन पोषण करता है, लेकिन अब काम भी बंद पड़ा है। परिवार आर्थिक तंगी झेल रहा है। उन्होंने एंबुलेंस को कई बार फोन किए, लेकिन कोई नहीं आया। इसके बाद उन्हें रेहड़ी पर उसे अस्पताल लाना पड़ा।
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