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सत्य मार्ग पर चलकर ही मानव कल्याण
Updated Tue, 18 Sep 2018 01:34 AM IST
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बिनौली (बागपत)।
धनौरा सिल्वरनगर के शिव मंदिर में भक्ति जागृति सेवा संस्थान चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में चल रही श्रीमद भागवत कथा के दूसरे दिन सोमवार को महामंडलेश्वर भैया दास जी की धर्म बेटी बाल साध्वी राधा देवी ने भागवत कथा की महत्ता सुनाते हुए कहा कि भगवान की कथा में पापी से पापी भी अपने पापों से मुक्त होकर सद्गति को प्राप्त हो जाता है।
उन्होंने कहा कि भगवान की कथा में अनेक पापों की मुक्ति हुई है। धुंधकारी की कथा सुनाते हुए साध्वी जी ने कहा कि धुंधकारी एक बहुत बड़ा पापी था। जिसने अपने कुकर्मों को दिन रात बढ़ावा देते हुए वेश्यावृत्ति करने लगा, उसके गणनात्मक कर्मों को देखकर उसके माता-पिता भी शरीर त्याग कर गए। दिन-रात अत्याचार भूमिका बढ़ाता रहा। एक दिन गणिका ने उसकी हत्या कर दी और वह प्रेत योनि को प्राप्त हुआ। उसी का भाई गोकर्ण बड़ा ही तपस्वी था, वह दिन रात तपस्या में लीन रहता था। तपस्या करने के बाद वह जब अपने गांव आया तो उसने देखा कि तेरा भाई धुंधकारी अधोगति को प्राप्त है। तो श्रीमद भागवत कथा सुना कर गोकर्ण ने अपने भाई धुंधकारी को मुक्ति प्रदान कराई। साध्वी जी ने कहा कथा जीवन की व्यथा मिटाने वाली है, परंतु यह जीवन के व्यथा कब मिटाती है, जब प्राणी सत्य मार्ग का अनुसरण करें और सत्य मार्ग पर चलता हुआ अपने माता पिता की सेवा करें साधु संतों की सेवा करें और देश की सेवा भी करें सदैव दया भाव रख अपना जीवन निर्वाह करता रहे। कथा में जितेंद्र, पप्पू, राजा, सुशील वत्स, मोनू राणा, सोनू, ब्रह्म पाल, कंवर पाल, धर्मपाल, गीता, सावित्री, कमला, विमला आदि रहे।
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धनौरा सिल्वरनगर के शिव मंदिर में भक्ति जागृति सेवा संस्थान चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में चल रही श्रीमद भागवत कथा के दूसरे दिन सोमवार को महामंडलेश्वर भैया दास जी की धर्म बेटी बाल साध्वी राधा देवी ने भागवत कथा की महत्ता सुनाते हुए कहा कि भगवान की कथा में पापी से पापी भी अपने पापों से मुक्त होकर सद्गति को प्राप्त हो जाता है।
उन्होंने कहा कि भगवान की कथा में अनेक पापों की मुक्ति हुई है। धुंधकारी की कथा सुनाते हुए साध्वी जी ने कहा कि धुंधकारी एक बहुत बड़ा पापी था। जिसने अपने कुकर्मों को दिन रात बढ़ावा देते हुए वेश्यावृत्ति करने लगा, उसके गणनात्मक कर्मों को देखकर उसके माता-पिता भी शरीर त्याग कर गए। दिन-रात अत्याचार भूमिका बढ़ाता रहा। एक दिन गणिका ने उसकी हत्या कर दी और वह प्रेत योनि को प्राप्त हुआ। उसी का भाई गोकर्ण बड़ा ही तपस्वी था, वह दिन रात तपस्या में लीन रहता था। तपस्या करने के बाद वह जब अपने गांव आया तो उसने देखा कि तेरा भाई धुंधकारी अधोगति को प्राप्त है। तो श्रीमद भागवत कथा सुना कर गोकर्ण ने अपने भाई धुंधकारी को मुक्ति प्रदान कराई। साध्वी जी ने कहा कथा जीवन की व्यथा मिटाने वाली है, परंतु यह जीवन के व्यथा कब मिटाती है, जब प्राणी सत्य मार्ग का अनुसरण करें और सत्य मार्ग पर चलता हुआ अपने माता पिता की सेवा करें साधु संतों की सेवा करें और देश की सेवा भी करें सदैव दया भाव रख अपना जीवन निर्वाह करता रहे। कथा में जितेंद्र, पप्पू, राजा, सुशील वत्स, मोनू राणा, सोनू, ब्रह्म पाल, कंवर पाल, धर्मपाल, गीता, सावित्री, कमला, विमला आदि रहे।
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