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रामा विवाह के बाद विदाई का प्रसंग सुनाया
Updated Mon, 30 Oct 2017 01:06 AM IST
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बड़ौत (बागपत)।
कथा व्यास स्तुति बहन ने राम विवाह के बाद विदाई का प्रसंग सुनाकर भक्तों को भाव विभोर कर दिया।
रविवार को श्रीराम चरित्र मानस के तत्वावधान में ग्रौवेल पब्लिक स्कूल में चल रही श्रीराम कथा के अंतिम दिन कथा व्यास ने बताया कि अयोध्या में सीता का आगमन हुआ। हर्षोल्लास से सारी अयोध्या प्रफुल्लित हो गई। राजा दशरथ की सारी कामनाएं पूर्ण हो गई, किंतु जीवन का यहीं से दूसरा मोड़ प्रारंभ होता है। राजा दशरथ के मन में एक अभिलाषा ने पुन: अंकुरण दिया कि अब सारा राज्य राम को देकर प्रभु का स्मरण कर अपना परलोक सुधारूंगा। इसमें एक पक्ष तो सहजता का है, किंतु दूसरा पक्ष दशरथ के मन का। एक भय भी है, विवाह के समय उन्होंने कैकेयी को दिया । कैकेयी के भी संतान होगी। उसी को राज्य का उत्तराधिकारी नियुक्त किया जाएगा। राजा दशरथ ने विचार किया कि राम को कैकेयी बहुत स्नेह करती है, यदि इस समय में ऐसा निर्णय लूंगा तो सहज भाव से कैकेयी तैयार हो जाएगी और हमारी मन की अभिलाषा भी पूरी हो जाएगी और विरोध भी नहीं होगा। ऐसा विचार कर सर्व प्रथम गुरू वशिष्ठ को अपने विचारों से अवगत कराया, किंतु गुरू वशिष्ठ ने स्वीकृति को पूर्णतया अलग ढंग से प्रस्तुत किया।
दूसरी तरफ कैकेयी को जानकारी हुई तो वह भी बहुत खुश हुई, किंतु दासी मंथरा ने पूर्व समय की याद दिलाकर कैकेयी का मन बदलकर दो वरदानों के माध्यम से पूरा खेल बदल दिया और राम को 14 वर्ष का वनवास और भारत को राज्याभिषेक का निर्णय किया । राम वनवास को चले गए और सीता और लक्ष्मण भी उनके साथ हो लिए। उन्होंने कथा कि माध्यम से राम राज्य की स्थापना की। इसमें कामता प्रसाद गुप्ता, आनंद वर्मा, महीपाल कौशिक, रीना वर्मा, संजीव चौधरी, राम निवास वर्मा, आदेश गर्ग, सुरेंद्र कुच्छल, गौरव कुच्छल, गीता कुच्छल, सरोज अरोरा, लोकेश अरोरा आदि रहे।
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कथा व्यास स्तुति बहन ने राम विवाह के बाद विदाई का प्रसंग सुनाकर भक्तों को भाव विभोर कर दिया।
रविवार को श्रीराम चरित्र मानस के तत्वावधान में ग्रौवेल पब्लिक स्कूल में चल रही श्रीराम कथा के अंतिम दिन कथा व्यास ने बताया कि अयोध्या में सीता का आगमन हुआ। हर्षोल्लास से सारी अयोध्या प्रफुल्लित हो गई। राजा दशरथ की सारी कामनाएं पूर्ण हो गई, किंतु जीवन का यहीं से दूसरा मोड़ प्रारंभ होता है। राजा दशरथ के मन में एक अभिलाषा ने पुन: अंकुरण दिया कि अब सारा राज्य राम को देकर प्रभु का स्मरण कर अपना परलोक सुधारूंगा। इसमें एक पक्ष तो सहजता का है, किंतु दूसरा पक्ष दशरथ के मन का। एक भय भी है, विवाह के समय उन्होंने कैकेयी को दिया । कैकेयी के भी संतान होगी। उसी को राज्य का उत्तराधिकारी नियुक्त किया जाएगा। राजा दशरथ ने विचार किया कि राम को कैकेयी बहुत स्नेह करती है, यदि इस समय में ऐसा निर्णय लूंगा तो सहज भाव से कैकेयी तैयार हो जाएगी और हमारी मन की अभिलाषा भी पूरी हो जाएगी और विरोध भी नहीं होगा। ऐसा विचार कर सर्व प्रथम गुरू वशिष्ठ को अपने विचारों से अवगत कराया, किंतु गुरू वशिष्ठ ने स्वीकृति को पूर्णतया अलग ढंग से प्रस्तुत किया।
दूसरी तरफ कैकेयी को जानकारी हुई तो वह भी बहुत खुश हुई, किंतु दासी मंथरा ने पूर्व समय की याद दिलाकर कैकेयी का मन बदलकर दो वरदानों के माध्यम से पूरा खेल बदल दिया और राम को 14 वर्ष का वनवास और भारत को राज्याभिषेक का निर्णय किया । राम वनवास को चले गए और सीता और लक्ष्मण भी उनके साथ हो लिए। उन्होंने कथा कि माध्यम से राम राज्य की स्थापना की। इसमें कामता प्रसाद गुप्ता, आनंद वर्मा, महीपाल कौशिक, रीना वर्मा, संजीव चौधरी, राम निवास वर्मा, आदेश गर्ग, सुरेंद्र कुच्छल, गौरव कुच्छल, गीता कुच्छल, सरोज अरोरा, लोकेश अरोरा आदि रहे।
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