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जैन श्रद्धालुओं ने तप कल्याणक महोत्सव मनाया
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बड़ौत (बागपत)। मुनि वीर सागर, विशाल सागर और धवल सागर महराज के सानिध्य मेें मंगलवार को दिगंबर जैन कॉलेज के मैदान पर तप कल्याणक महोत्सव धूमधाम से मनाया गया।
पंच कल्याणक महोत्सव की श्रृंखला के तहत हुए कार्यक्रम में आदि कुमार के विवाह का सजीव दृश्य प्रस्तुत किया । समाज के लोग बराती बनकर आदि कुमार के विवाह मेें शामिल हुए। संगीतकार नीलेश एंड पार्टी के मधुर भजनों पर नृत्य प्रस्तुतियां दी। इसके बाद आदि कुमार का राज्य अभिषेक उनके पिता महाराज नाभिराम ने किया। महोत्सव में दिखाया कि किस प्रकार आदि कुमार ने राज का संचालन किया। उनसे जुड़ी अन्य व्यवस्थाओं का भी अच्छी तरफ से प्रदर्शन किया।
इस अवसर पर मुनि वीर सागर महराज ने कहा कि वह तीर्थकर बालक का एक हजार कलश से अभिषेक किया जा रहा था, तब भगवान इंद्र के मन में शंका उत्पन्न हुई कि जब जल का वेग बालक कैसे सहेगा। प्रभु ने तभी अपने पैरों के अंगुठा को हिलकर नीचे दबाया तो पर्वत की कंपायमान हो गया। तीर्थंकर बालक में इतनी शक्ति थी। मुनि ने कहा कि भगवान के दरबार में आओ तो दिल लेकर आओ, दिमाग नहीं। उन्होंने बताया कि आदिनाथ जैन भगवान के प्रथम तीर्थकर से लेकिन वे जैन धर्म के संस्थापक नहीं थे। सभा में सुभाष जैन, मुकेश जैन, प्रदीप जैन, वरदान जैन, अशोक जैन, बालकिशन जैन, रिंकू जैन, सुनील जैन, सुधीर जैन, मुकेश बजाज, मदनलाल, हंस कुमार जैन, वकील चंद जैन, प्रवीण जैन, धनेंद्र कुमार, धन कुमार, बिजेंद्र जैन आदि रहे।
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बुधवार को तप कल्याणक में विराग दर्शन की प्रस्तुति की जाएगी। इसमें दर्शाया जाएगा कि कैसे आदि कुमार को वैराग्य हो जाता है और वे दिगंबर दीक्षा धारण कर लेते हैं।
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पंच कल्याणक महोत्सव की श्रृंखला के तहत हुए कार्यक्रम में आदि कुमार के विवाह का सजीव दृश्य प्रस्तुत किया । समाज के लोग बराती बनकर आदि कुमार के विवाह मेें शामिल हुए। संगीतकार नीलेश एंड पार्टी के मधुर भजनों पर नृत्य प्रस्तुतियां दी। इसके बाद आदि कुमार का राज्य अभिषेक उनके पिता महाराज नाभिराम ने किया। महोत्सव में दिखाया कि किस प्रकार आदि कुमार ने राज का संचालन किया। उनसे जुड़ी अन्य व्यवस्थाओं का भी अच्छी तरफ से प्रदर्शन किया।
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इस अवसर पर मुनि वीर सागर महराज ने कहा कि वह तीर्थकर बालक का एक हजार कलश से अभिषेक किया जा रहा था, तब भगवान इंद्र के मन में शंका उत्पन्न हुई कि जब जल का वेग बालक कैसे सहेगा। प्रभु ने तभी अपने पैरों के अंगुठा को हिलकर नीचे दबाया तो पर्वत की कंपायमान हो गया। तीर्थंकर बालक में इतनी शक्ति थी। मुनि ने कहा कि भगवान के दरबार में आओ तो दिल लेकर आओ, दिमाग नहीं। उन्होंने बताया कि आदिनाथ जैन भगवान के प्रथम तीर्थकर से लेकिन वे जैन धर्म के संस्थापक नहीं थे। सभा में सुभाष जैन, मुकेश जैन, प्रदीप जैन, वरदान जैन, अशोक जैन, बालकिशन जैन, रिंकू जैन, सुनील जैन, सुधीर जैन, मुकेश बजाज, मदनलाल, हंस कुमार जैन, वकील चंद जैन, प्रवीण जैन, धनेंद्र कुमार, धन कुमार, बिजेंद्र जैन आदि रहे।
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बुधवार को तप कल्याणक में विराग दर्शन की प्रस्तुति की जाएगी। इसमें दर्शाया जाएगा कि कैसे आदि कुमार को वैराग्य हो जाता है और वे दिगंबर दीक्षा धारण कर लेते हैं।