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बागपत में धान खरीद जीरो, हरियाणा और दिल्ली ले गए किसान
Updated Thu, 15 Nov 2018 12:48 AM IST
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बागपत। धान की फसल खेतों से उठ चुकी है। लेकिन बागपत में बनाए गए क्रय केंद्रों पर खरीद जीरो है। तीन केंद्रों पर सात किसानों ने नामांकन जरूर कराए, लेकिन धान की फसल लेकर नहीं पहुंचे। इसकी वजह है दिल्ली और हरियाणा में किसानों को बेहतर भाव और सभी वैरायटी की खरीद। क्रय केंद्रों पर कर्मचारी किसानों का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई किसान नहीं पहुंचा।
उपकृषि निदेशक प्रशांत कुमार ने बताया कि बागपत में 45 सौ एकड भूमि पर धान की फसल हुई है। अधिकतर खेतों से धान की फसल की कटाई का कार्य पूरा हो चुका है। किसान धान को लेकर अब मंडियों का रूख कर रहे हैं। विपणन अधिकारी कौशल देव का कहना है कि किसानों से धान खरीदने के लिए तीन क्रय केंद्र बनाए गए थे, इन पर सात किसानों ने अपना पंजीकरण कराया, लेकिन अभी तक एक भी किसान धान लेकर नहीं पहुंचा है। यूपी सरकार के क्रय केंद्रों पर कॉमन धान की खरीद की जाती है, जबकि बागपत के अधिकतर किसान अन्य वैरायटी की बुआई का कार्य करते हैं। इस वजह से यह किसान दिल्ली की नरेला या सोनीपत और हरियाणा के अन्य जिलों में धान बेचते हैं।
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इनसेट
भाव का अंतर भी बड़ी वजह
बागपत। यूपी और दिल्ली की नरेला मंडी के भाव में अंतर भी किसानेां के क्रय केंद्र पर नहीं पहुंचने की वजह है। विपणन अधिकारी का कहना है कि यूपी में भाव 17 सौ रुपये प्रति कुंतल के लगभग है, जबकि नरेला में किसानों को वैरायटी के अनुसार ढाई से तीन हजार रुपये का भाव मिल जाता है, जिस वजह से किसान नरेला जाते हैं।
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इनसेट
क्या कहते हैं किसान
बागपत। सिसाना गांव के किसान सुनील कुमार, नया गांव के जयपाल सिंह का कहना है कि सरकार अगर यूपी में भाव बढिय़ा दे और प्रत्येक वैरायटी की खरीद करें तो नरेला जाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
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उपकृषि निदेशक प्रशांत कुमार ने बताया कि बागपत में 45 सौ एकड भूमि पर धान की फसल हुई है। अधिकतर खेतों से धान की फसल की कटाई का कार्य पूरा हो चुका है। किसान धान को लेकर अब मंडियों का रूख कर रहे हैं। विपणन अधिकारी कौशल देव का कहना है कि किसानों से धान खरीदने के लिए तीन क्रय केंद्र बनाए गए थे, इन पर सात किसानों ने अपना पंजीकरण कराया, लेकिन अभी तक एक भी किसान धान लेकर नहीं पहुंचा है। यूपी सरकार के क्रय केंद्रों पर कॉमन धान की खरीद की जाती है, जबकि बागपत के अधिकतर किसान अन्य वैरायटी की बुआई का कार्य करते हैं। इस वजह से यह किसान दिल्ली की नरेला या सोनीपत और हरियाणा के अन्य जिलों में धान बेचते हैं।
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भाव का अंतर भी बड़ी वजह
बागपत। यूपी और दिल्ली की नरेला मंडी के भाव में अंतर भी किसानेां के क्रय केंद्र पर नहीं पहुंचने की वजह है। विपणन अधिकारी का कहना है कि यूपी में भाव 17 सौ रुपये प्रति कुंतल के लगभग है, जबकि नरेला में किसानों को वैरायटी के अनुसार ढाई से तीन हजार रुपये का भाव मिल जाता है, जिस वजह से किसान नरेला जाते हैं।
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क्या कहते हैं किसान
बागपत। सिसाना गांव के किसान सुनील कुमार, नया गांव के जयपाल सिंह का कहना है कि सरकार अगर यूपी में भाव बढिय़ा दे और प्रत्येक वैरायटी की खरीद करें तो नरेला जाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
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