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यहां लाठी-डंडों से तेंदुआ पकड़ता है वन विभाग

Wed, 24 Oct 2018 01:01 AM IST
Updated Wed, 24 Oct 2018 01:01 AM IST
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यहां लाठी-डंडों से तेंदुआ पकड़ता है वन विभाग
बड़ौत (बागपत)। ककौर कलां गांव के जंगल मेें खटके मेें फंस तेंदुआ की जान पर वन विभाग का संसाधनों की कमी से जूझना भारी पड़ा। विभाग के पास न तो पर्याप्त मात्रा में स्टाफ है और न ही विभाग के पास तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा और जाल। तेंदुआ को बेहोश करने के लिए गन और स्टाफ तक नहीं है। यहीं कारण है कि वन विभाग के अधिकारी आज तक क्षेत्र मेें घूम रहे तेंदुओं को पकड़ने में नाकाम रहे। आलम यह है कि बागपत में पिंजरा न होने के कारण वन कर्मचारियों को या तो सरधना से पिंजरा मंगाना पड़ा है या फिर मेरठ से।
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सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचा मात्र एक वन रक्षक
बड़ौत (बागपत)। ककौर कला गांव के जंगल में ग्रामीणों द्वारा तेंदुआ होने की सूचना के बाद मात्र वन विभाग कार्यालय से वन रक्षक संजय ही सबसे पहले पहुंचा। वह ग्रामीणों की मदद से अकेला तेंदुओं को पकड़ने के लिए जूझता रहा। बाद में करीबन डेढ़ दो घंटे बाद अन्य स्टाफ मौके पर पहुंचा।
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बागपत में वन रक्षकों का टोटा
बड़ौत (बागपत)। ककौर कला गांव में तेंदुए के अंत का कारण वन विभाग मेें स्टाफ की कमी भी है। वन विभाग कार्यालय के अंतर्गत सात वन रक्षकों की जरूरत है, लेकिन उसके सापेक्ष मात्र 3 वन रक्षकों की ही तैनाती है। वन दरोगा पांच चाहिए, लेकिन मात्र चार है। जंगल मेें गश्त करने के अलावा अन्य विभागीय कार्यों के लिए 10 से 15 वन कर्मियों की आवश्यकता है, लेकिन मात्र तीन वन कर्मियों से मांग चलाना पड़ रहा है।
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..... अभी भी दहशत में जी रहे दर्जनों गांव के ग्रामीण
बड़ौत (बागपत)। हेलो, सर गांव के जंगल में तेंदुआ घूम रहा है, इससे पकड़ने के लिए वन विभाग की टीम भेज दो। यह एक गांव के दहशत जुदा लोगों की मांग नहीं ब्लकि अभी भी बागपत जनपद के दर्जनों गांव के ग्रामीण तेंदुआ की दहशत में जी रहे हैं। अब तो मजबूरन ग्रामीणों ने परिवार की रक्षा के लिए रात्रि में स्वयं पहरेदारी शुरू कर दी है। खपराना गांव के जंगल मेें लगे पिंजरा को हटाने के बाद ग्रामीण ओर भयभीत हो गए।
एक के बाद एक तेंदुआ आने की सूचना से यह साफ जाहिर होता है कि अभी भी बागपत जनपद के दर्जनों गांव के ग्रामीण तेदुए की दहशत में जी रहे है। बिनौली क्षेत्र के खपराना, शाहपुर बाणगंगा, गल्हैता, बरनावा सहित कई गांवों में पिछलें 15 दिन से अलग-अलग जगहों पर तेंदुआ देखे जाने की सूचना वन विभाग को मिल रही है। खपराना गांव मेें तो सरधना से पिंजरा मंगवाकर तेंदुआ को पकड़ने का भी प्रयास किया गया, लेकिन ककौर कलां गांव में तेंदुआ को पकड़ने के लिए वहां से अब पिंजरा हटा दिया गया। इससे भयभीत ग्रामीणों ने अब स्वयं ही परिवार की सुरक्षा के लिए पहरेदारी शुरू कर दी है। इसके अलावा जागोस, कोताना, लुहारी, बोहला, औसिक्का, रमाला, किरठल सहित कई गांव मेें भी हाल ही में तेंदुआ देखे जाने की सूचना मिल रही है। इससे ग्रामीण दहशतजुदा है और लगातार वन अफसरों से तेंदुआ पकड़ने की मांग उठा रहे है।

मिलन के समय निकलते हैं जंगल से बाहर
बड़ौत (बागपत)। वन्य जीव विशेषज्ञ जीएस खुशारिया ने मुताबिक दहशरा, दीपावली से शुरू हुए मिलन की प्रक्रिया के तहत तेंदुआ जंगल से बाहर निकलता है और होली पर्व तक उनके मिलन की प्रक्रिया चलती है। तेंदुआ बहुत ही शर्मिला जानवर होता है। आई टू आई कोंटक्ट होने पर ही वह हमला बोलता है। क्योंकि सर्दियों के मौसम में लोग घरों के अंदर सोने लगे है, इसलिए तेंदुआ की अलग-अलग प्रजातियां मिलन के लिए इधर-उधर दौड़ती रहती है।

20 फुट लंबी व 15 फुट ऊंची लगाता है छलांग
बड़ौत (बागपत)। वन क्षेत्राधिकारी राजपाल के अनुसार तेंदुआ 20 फुट लंबी और 15 फुट की ऊंची छलांग लगा सकता है। उसका खरगोस, शेह, कुत्ता आदि खाना पसंद हैं।

पहले भी बागपत जनपद में पकड़े जा चुके हैं तेंदुआ
बड़ौत (बागपत)। ककौर कलां गांव में तेंदुए को पकड़ने का यह पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी कई बार वन विभाग ग्रामीणों की मदद से तेंदुआ को पकड़ चुके हैं। कई तेंदुआ को तो वन विभाग के अफसरों के पहुंचने से पहले ही मौत के घाट उतारा जा चुका है। निरपुड़ा में तेंदुआ का शिकार कर लिया गया था, जबकि हिसावदा में भी तेंदुआ मारा गया था।

ककौर कला गांव के जंगल में तेंदुआ को पकड़ने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी वर्ष 2002 में पुसार गांव में ग्रामीणों द्वारा तेंदुआ को पकड़ते वक्त मौत के घाट उतार दिया गया है। इस मामले में कई ग्रामीणों के खिलाफ वन्य जीव हत्या की धाराओं मेेें मुकदमा दर्ज कराया । इसके अलावा खट्ठा प्रहलादपुर में वर्ष 2010-11 में भी तेंदुआ को वन विभाग की टीम ने पकड़ा। लोनी बोर्डर के अजंता कॉलोनी के पास से भी बामुश्किल वन विभाग की टीम ने तेंदुआ को पकड़कर ग्रामीणों को राहत की सांस दिलाई। अमीनगर सराय के पास एक तालाब मेें घुसे तेंदुआ को टीम पकड़ चुकी है। इसके अलावा हिंडन एयरबेस में भी तेंदुआ को पकड़ा जा चुका है। वन क्षेत्राधिकारी राजपाल सिंह का कहना था कि जंगलों में तेंदुओं को पकड़ने के लिए टीम लगाई गई है।
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