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मुनि सौम्य सागर महाराज को वियांजलि दी
Updated Mon, 22 Oct 2018 12:50 AM IST
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बड़ौत (बागपत)। दिगंबर जैन अतिथि भवन मुनि सौम्य सागर महाराज के समाधि लेने पर विनयांजलि दी एवं सुरत्न सागर महाराज के संसघ सानिध्य में विश्व शांति व कल्याण के लिए विधान का आयोजन किया।
इस अवसर पर सुरत्न सागर महाराज ने कहा कि सभी जीवों के यह भाव होते हैं कि वे अपने आत्म कल्याण कार्य करें। दीक्षा आत्म कल्याण के लिए दी जाती है। समाधिक के लिए दी जाती है। जिस दिन साधु दीक्षा ले लेता है, उस दिन से सही समाधि प्रारंभ हो जाती है। प्रत्यक्षमति माता ने कहा कि स्वयं आत्मा में वास कर लेना ही समाधि है, जिस जीव ने अंतिम समय में अपना जीवन सुधार लिया, समझ लो कि सब कुछ सुधार लिया। ब्रह्मचारिणी दीदी मधु ने कहा, मुनि सौम्य सागर महाराज एक भव्य जीव थे। इसमें दिगंबर जैन समाज समिति के अध्यक्ष प्रवीण कुमार, मंत्री अतुल जैन, प्रदीप कुमार, अनुज जैन, शरद कुमार जैन, नेमचंद जैन, अतुल जैन, अंकित जैन, आदिश जैन, संदीप, पंकज जैन आदि रहे।
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इस अवसर पर सुरत्न सागर महाराज ने कहा कि सभी जीवों के यह भाव होते हैं कि वे अपने आत्म कल्याण कार्य करें। दीक्षा आत्म कल्याण के लिए दी जाती है। समाधिक के लिए दी जाती है। जिस दिन साधु दीक्षा ले लेता है, उस दिन से सही समाधि प्रारंभ हो जाती है। प्रत्यक्षमति माता ने कहा कि स्वयं आत्मा में वास कर लेना ही समाधि है, जिस जीव ने अंतिम समय में अपना जीवन सुधार लिया, समझ लो कि सब कुछ सुधार लिया। ब्रह्मचारिणी दीदी मधु ने कहा, मुनि सौम्य सागर महाराज एक भव्य जीव थे। इसमें दिगंबर जैन समाज समिति के अध्यक्ष प्रवीण कुमार, मंत्री अतुल जैन, प्रदीप कुमार, अनुज जैन, शरद कुमार जैन, नेमचंद जैन, अतुल जैन, अंकित जैन, आदिश जैन, संदीप, पंकज जैन आदि रहे।
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