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अब तक नहीं भूले मौत का मंजर, यमुना में नाव समाने से 19 लोगों की हो गई थी मौत
Updated Sat, 25 Aug 2018 01:20 AM IST
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बागपत। बिजनौर में नाव डूबने से पहले मौत का मंजर बागपत में भी सामने आ चुका है। करीब एक साल पहले काठा गांव में किसान - मजदूर नाव में सवार होकर यमुना पार जा रहे थे, लेकिन नाव नदी में समा गई थी, इसमें काठा गांव के 19 लोगों की मौत हो गई थी। 11 लोगों को जिंदा बचाया था। नाव में करीब 55 लोग सवार थे, जो यमुना पार कर खेतों में काम करने जा रहे थे।
बागपत में हादसा पिछले वर्ष 14 सितंबर को हुआ था। सुबह करीब पौने सात बजे काठा गांव में यमुना पार कर खेतों में जाने के लिए नाव में करीब 55 किसान - मजदूर सवार हुए थे। खाद के बोरे और अन्य सामान भी लाद लिया । किनारे पर ही नाव डगमगाने लगी और पानी भर गया। नाव पानी में समाने चीख पुकार मच गई थी। 11 लोगों को किसी तरह बचाया था। मरने वाले सभी लोग काठा गांव के थे और आज भी हादसे को नहीं भूले हैं। ग्रामीणों ने कहा बेहद दुखदायी हादसा था। ग्रामीण देवेंद्र कुमार, सतेंद्र कुमार और सहदेव का कहना है कि आज भी हादसे को लेकर गांव में गम है।
क्यों हुआ था हादसा?
बागपत। जिस नाव से किसान और मजदूर यमुना पार कर रहे थे, इसमें करीब 55 लोग सवार थे। नाव की क्षमता बामुश्किल 10 लोगों को यमुना पार कराने की है। इसमें खाद के बोरे एवं अन्य कृषि यंत्र भी रख लिए। वजन अधिक हो गया और नाव कुछ दूर जाते ही धंस गई थी।
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खतरे में जान, अभी नहीं इंतजाम
बागपत। हादसे के बाद भी अभी तक प्रशासन ने सबक नहीं सीखा। लोगों को रोज यमुना पार कर खेतों में जाना पड़ता है। इसके लिए ग्रामीण खतरा उठाते हैं। कोई तैरकर, कोई नाव से और कोई बुग्गी से नदी पार करता है। टांडा से लेकर काठा तक करीब 28 गांव ऐसे हैं, जहां खतरा रहता है। इसके अलावा हिंडन और कृष्णा नदी पार करते समय भी ग्रामीण खतरे में रहते हैं। कृष्णा नदी पर तो ग्रामीणों ने बल्ली का पुल बना रखा है, जिसकी वजह से जान खतरे में रहती है। ग्रामीण कई बार पुल की मांग कर चुके हैं।
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बागपत में हादसा पिछले वर्ष 14 सितंबर को हुआ था। सुबह करीब पौने सात बजे काठा गांव में यमुना पार कर खेतों में जाने के लिए नाव में करीब 55 किसान - मजदूर सवार हुए थे। खाद के बोरे और अन्य सामान भी लाद लिया । किनारे पर ही नाव डगमगाने लगी और पानी भर गया। नाव पानी में समाने चीख पुकार मच गई थी। 11 लोगों को किसी तरह बचाया था। मरने वाले सभी लोग काठा गांव के थे और आज भी हादसे को नहीं भूले हैं। ग्रामीणों ने कहा बेहद दुखदायी हादसा था। ग्रामीण देवेंद्र कुमार, सतेंद्र कुमार और सहदेव का कहना है कि आज भी हादसे को लेकर गांव में गम है।
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क्यों हुआ था हादसा?
बागपत। जिस नाव से किसान और मजदूर यमुना पार कर रहे थे, इसमें करीब 55 लोग सवार थे। नाव की क्षमता बामुश्किल 10 लोगों को यमुना पार कराने की है। इसमें खाद के बोरे एवं अन्य कृषि यंत्र भी रख लिए। वजन अधिक हो गया और नाव कुछ दूर जाते ही धंस गई थी।
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खतरे में जान, अभी नहीं इंतजाम
बागपत। हादसे के बाद भी अभी तक प्रशासन ने सबक नहीं सीखा। लोगों को रोज यमुना पार कर खेतों में जाना पड़ता है। इसके लिए ग्रामीण खतरा उठाते हैं। कोई तैरकर, कोई नाव से और कोई बुग्गी से नदी पार करता है। टांडा से लेकर काठा तक करीब 28 गांव ऐसे हैं, जहां खतरा रहता है। इसके अलावा हिंडन और कृष्णा नदी पार करते समय भी ग्रामीण खतरे में रहते हैं। कृष्णा नदी पर तो ग्रामीणों ने बल्ली का पुल बना रखा है, जिसकी वजह से जान खतरे में रहती है। ग्रामीण कई बार पुल की मांग कर चुके हैं।